भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से कोमा में चल रहे 32 वर्षीय हरीश राणा के मामले में पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी है. अदालत ने कहा कि ऐसे मरीज को अनंत समय तक कष्ट में रखना उचित नहीं है और उसे गरिमा के साथ मरने का अधिकार है (Harish Rana Case).
हरीश राणा साल 2013 में चंडीगढ़ में एक पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी. चोट इतनी गंभीर थी कि वे पूरी तरह से अचेत अवस्था में चले गए और डॉक्टरों के अनुसार वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (PVS) में थे. तब से हरीश जीवन रक्षक प्रणाली और फीडिंग ट्यूब के सहारे जीवित थे. डॉक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं थी.
लंबे समय तक बेटे की हालत देखने के बाद हरीश राणा के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि बेटे की असहनीय स्थिति को देखते हुए उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए. परिवार का कहना था कि इतने सालों से हरीश न तो होश में आए और न ही उनके ठीक होने की कोई उम्मीद दिखाई दे रही है.
11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया. अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि मरीज के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए फीडिंग ट्यूब हटाने की अनुमति दी जाती है.
अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से जीवन रक्षक उपकरणों पर बनाए रखना सही नहीं है, खासकर जब उसके ठीक होने की उम्मीद ही न हो.
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए भारत में पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी मान्यता दी थी. उस फैसले में कहा गया था कि कुछ विशेष परिस्थितियों में मरीज को जीवन रक्षक प्रणाली से हटाने की अनुमति दी जा सकती है.
हरीश राणा का मामला इसी फैसले को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है. इसमें अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अगर कोई मरीज लंबे समय तक ट्यूब के सहारे ही जीवित है और उसके ठीक होने की संभावना नहीं है, तो कानून के तहत इच्छामृत्यु की अनुमति दी जा सकती है.
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 2013 में हुए हादसे के बाद 13 साल तक बिस्तर पर जिंदगी और मौत से लड़ने वाले हरीश राणा अब शांत हो गए हैं. उनके पिता अशोक राणा ने नम आंखों से अस्थियां संचित कीं और इस लंबी कानूनी व मानवीय लड़ाई में साथ देने वालों का आभार जताया.
मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.
हरीश राणा के मामले में देश में पहली बार पैसिव यूथेनेसिया लागू हुआ, जहां सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद जीवन से मुक्ति दी गई. 24 मार्च को उनका निधन हो गया. 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए हरीश को पैसिव यूथेनेसिया की अनुमति दी. यह मामला इच्छामृत्यु पर नई बहस छेड़ते हुए असाध्य मरीजों के लिए सम्मानजनक मृत्यु के विकल्प को लेकर अहम उदाहरण बन गया.
'इच्छामृत्यु' सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि भावनाओं का सबसे कठिन इम्तिहान है. हरीश राणा की 13 साल लंबी जंग का अंत जब हुआ, तब हर पल ने परिवार और रिपोर्टर दोनों को भीतर तक झकझोर दिया. एम्स से श्मशान तक का सफर दर्द, संवेदना और एक कठिन मुक्ति की कहानी बन गया.
Harish Rana Last Rites: भारत में पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) की पहली अनुमति पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा पंचतत्व में विलीन हो गए. 13 साल तक कोमा में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश पर लाइफ सपोर्ट हटाए जाने के बाद उन्होंने मंगलवार को अंतिम सांस ली. बुधवार को दक्षिण दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
13 साल से कोमा में रहे हरीश राणा का आज दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क में अंतिम संस्कार कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद उनका एम्स में निधन हुआ था. अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा. परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी. इससे पहले उनके पिता ने एक मैसेज जैसे ही व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा, उसे पढ़ते ही लोगों की आंखों से आंसू निकल आए.
हरीश राणा के जाने की खबर पिता अशोक राणा ने सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में जैसे ही दी, लोगों की आंखें भर आईं. उन्होंने लिखा- 25 मार्च की सुबह 9 बजे हरीश राणा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा. ॐ शांति ॐ…
सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक 'इच्छा-मृत्यु' (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति पाने वाले देश के पहले मरीज हरीश राणा का एम्स दिल्ली में निधन हो गया. 2013 से कोमा में चल रहे हरीश ने लंबी कानूनी और शारीरिक लड़ाई के बाद मंगलवार को गरिमा के साथ अंतिम सांस ली.
Harish Rana News: भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का AIIMS में निधन हो गया. वे साल 2013 से कोमा में थे. सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिसके बाद अस्पताल में उनके लाइफ सपोर्ट को स्टेप वाइज हटाया गया. हरीश राणा के निधन पर AIIMS ने बयान जारी किया. बयान में कहा गया, हम इस कठिन समय में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं.
हरीश राणा की हालत बिना भोजन और पानी के भी स्थिर बनी हुई है. पैसिव यूथेनेशिया प्रक्रिया के तहत पिछले कई दिनों से उनका पोषण बंद है. डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें दर्द से राहत देने की दवाएं दी जा रही हैं, ताकि उनकी अंतिम यात्रा बिना किसी कष्ट के पूरी हो सके.
वायरल वीडियो में हरीश राणा की हालत दिल झकझोर देती है, जहां बहन लवली उसके सिर पर हाथ रखे उसे निहारती दिखती हैं. हरीश की आंखों की हरकतें और बहन की आवाज पर उसकी प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देती हैं कि वह सब कुछ सुन और समझ रहा था. यह पल ऐसा महसूस कराता है मानो उसे अपने आखिरी समय का एहसास हो चुका था.
गाजियाबाद के हरीश राणा 13 साल से कोमा में हैं, उनके लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया दिल्ली एम्स में शुरू है. सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद डॉक्टर लाइफ सपोर्ट कम कर रहे हैं. इस दौरान मरीज को दर्द से राहत देने का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. परिवार ने आध्यात्मिक सहारा भी लिया है. डॉक्टरों का कहना है कि हरीश की जिंदगी अब अंतिम चरण में है.
गाजियाबाद के हरीश राणा 2013 से कोमा में हैं. उनकी इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो गई है. दिल्ली AIIMS में डॉक्टर उनकी हालत पर नजर रख रहे हैं, लेकिन मृत्यु का समय तय करना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया जाएगा. परिवार इस फैसले को दर्दनाक लेकिन जरूरी मानते हुए आध्यात्मिक सहारा भी ले रहा है.
गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में एक मानवीय पहल सामने आई है. पड़ोसी दीपांशु मित्तल ने बताया कि करीब ढाई साल पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने अंगदान और देहदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली थी. परिवार चाहता था कि बेटे के जाने के बाद भी उसके अंग किसी जरूरतमंद को जीवन दे सकें. अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एम्स में चल रही प्रक्रिया के बीच यह पहल चर्चा में है.
गाजियाबाद के हरीश राणा की अंतिम विदाई से पहले कहा गया 'सबसे माफी मांगते हुए जाओ' संदेश चर्चा में है. ब्रह्माकुमारी से आईं बहन लवली ने हरीश के एम्स जाने से पहले जो भी कहा अब उसका अर्थ समझाया है. जानकारों का कहना है कि अंतिम समय में माफी का संदेश मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन के लिए अहम माना जाता है.
एम्स (AIIMS) दिल्ली में हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद डॉक्टरों की विशेष टीम लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया अपना रही है. विशेषज्ञों के अनुसार मरीज को किसी तरह की पीड़ा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है. सूत्रों के मुताबिक पूरी मेडिकल प्रक्रिया को पूरा होने में करीब दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं.
गाजियाबाद के हरीश राणा की दर्दभरी कहानी इन दिनों चर्चा में है. सालों तक बिस्तर पर कोमा जैसी स्थिति में रहने के बाद अब उन्हें इच्छामृत्यु की प्रक्रिया से गुजारा जा रहा है.
दिल्ली एम्स ने 31 वर्षीय हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस के लिए हरीश को शनिवार को गाजियाबाद स्थित आवास से एम्स के डॉ. बीआर अंबेडकर संस्थान रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया है, जहां धीरे-धीरे हरीश के लाफ सपोर्ट सिस्टम को वापस लिया जाएगा, ताकि शरीर स्वाभाविक रूप से शांत हो जाए.
हरीश राणा को लेकर क्या बोलीं उनकी मां?
Harish Rana Euthanasia: गाजियाबाद के हरीश राणा द्वारा इच्छामृत्यु की मांग के बीच ब्रह्माकुमारी संस्थान की लवली दीदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. पिछले 18 वर्षों से परिवार के साथ जुड़ीं लवली दीदी ने इस कठिन समय में आत्मा, परमात्मा और परिवार के संघर्षपूर्ण सफर के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है.
गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में एक मानवीय पहल सामने आई है. पड़ोसी दीपांशु मित्तल ने बताया कि करीब ढाई साल पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने अंगदान और देहदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली थी. परिवार चाहता था कि बेटे के जाने के बाद भी उसके अंग किसी जरूरतमंद को जीवन दे सकें. अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एम्स में चल रही प्रक्रिया के बीच यह पहल चर्चा में है.