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बांदा

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बांदा (Banda) उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जिला है. इसका जिला मुख्यालय बांदा शहर है और यह चित्रकूट मंडल का हिस्सा है. जिले का क्षेत्र ऐतिहासिक, भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से बुंदेलखंड से जुड़ा हुआ है. बांदा का नाम यहां के स्थानीय इतिहास और आसपास के पुराने क्षेत्रों के कारण लंबे समय से जाना जाता है.

बांदा जिले का इतिहास काफी पुराना है. ब्रिटिश शासन के समय बांदा संयुक्त प्रांत के इलाहाबाद मंडल का हिस्सा था. उस समय यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता था. जिले में पहले कर्वी और मऊ तहसील भी शामिल थीं. वर्ष 1998 में कर्वी और मऊ को अलग करके चित्रकूट जिला बनाया गया. इसके बाद वर्तमान बांदा जिले का प्रशासनिक स्वरूप तैयार हुआ.

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बांदा जिले की जनसंख्या 17,99,410 थी. जिले में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल हैं. यहां कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है. बांदा में गेहूं, चना, अरहर, तिलहन और अन्य फसलों की खेती की जाती है. जिले की भौगोलिक स्थिति और जलवायु का यहां की कृषि व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है.

प्रशासनिक स्तर पर बांदा जिले में पांच तहसील हैं. इनमें बांदा, नरैनी, बाबेरू, पैलानी और अतर्रा शामिल हैं. जिले में आठ विकास खंड हैं. इनमें बड़ोखर खुर्द, जसपुरा, तिंदवारी, नरैनी, महुआ, बाबेरू, बिसंडा और कमासिन शामिल हैं. जिले में कानून व्यवस्था के लिए कई थाने बनाए गए हैं.

बांदा जिले का दक्षिणी क्षेत्र विंध्य पठार से जुड़ा हुआ है. विंध्य पर्वत श्रृंखला का उत्तरी भाग जिले के दक्षिणी क्षेत्र में दिखाई देता है. यह क्षेत्र यमुना के आसपास से शुरू होकर दक्षिण पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता है. नरैनी तहसील और कालिंजर के आसपास का इलाका भी इस भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा है.

जिले का संबंध ऐतिहासिक कालिंजर क्षेत्र से भी है. कालिंजर का किला नरैनी क्षेत्र में स्थित है और बुंदेलखंड के इतिहास में इसका उल्लेख मिलता है. बांदा क्षेत्र में शजर पत्थर भी पाया जाता है, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से आभूषण और सजावटी वस्तुएं बनाने में किया जाता रहा है.

इस प्रकार बांदा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिला है. इसका वर्तमान स्वरूप वर्ष 1998 में चित्रकूट जिले के गठन के बाद विकसित हुआ. प्रशासनिक व्यवस्था, कृषि क्षेत्र, भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक स्थलों के कारण बांदा की क्षेत्रीय पहचान बनी हुई है.

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