प्यार की कहानियां अक्सर सरहदों से बड़ी बताई जाती हैं, लेकिन जब भावनाओं के साथ कानून की सीमाएं भी पार हो जाएं तो हालात पूरी तरह बदल जाते हैं. ऐसी ही एक कहानी इन दिनों चर्चा में है. बॉलीवुड की चर्चित फिल्म वीर जारा में भी एक भारतीय वायुसेना अधिकारी अपनी मोहब्बत के लिए पाकिस्तान पहुंचता है और वहां कैद हो जाता है. वास्तविक जिंदगी की यह कहानी भी कुछ हद तक उसी एहसास को छूती है, लेकिन इसका अंत अभी अधूरा है.
21 साल का बादल बाबू पाकिस्तान के लाहौर की रहने वाली सना रानी से प्यार के कारण बिना वैध दस्तावेजों के पाकिस्तान पहुंच गया. वहां अवैध रूप से प्रवेश करने के मामले में उसे एक वर्ष की सजा सुनाई गई. अब सजा पूरी होने के बाद भी उसकी भारत वापसी नहीं हो सकी है. परिवार लगातार सरकार से बेटे को वापस लाने की गुहार लगा रहा है.
परिजनों के अनुसार, सितंबर 2024 में बादल बाबू पाकिस्तान के लाहौर स्थित बहाउद्दीन मंडी की रहने वाली सना रानी से मिलने पहुंचा था. परिवार का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनका बेटा पाकिस्तान चला जाएगा. जब इस बारे में पता चला तो परिवार के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था.
परिवार का कहना है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद बादल बाबू की न तो सना रानी से मुलाकात हो सकी और न ही उसके बारे में कोई जानकारी मिल पाई. दूसरी तरफ बिना वैध दस्तावेजों के पाकिस्तान में प्रवेश करने के मामले में वहां की अदालत ने उसे एक साल की सजा सुना दी. इसके बाद उसे लाहौर की कोट लखपत जेल में रखा गया.
करीब एक साल जेल में रहने के बाद बादल बाबू की रिहाई हो गई. हालांकि रिहा होने के बाद भी वह अपने देश वापस नहीं लौट सका. फिलहाल उसे लाहौर के एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. परिवार का कहना है कि अब उसकी भारत वापसी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है.
बिना वैध दस्तावेजों के पहुंचा पाकिस्तान
बादल बाबू के माता-पिता ने बताया कि उनका बेटा दिल्ली में रहकर एक फैक्ट्री में सिलाई का काम करता था. उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि वह अचानक पाकिस्तान चला जाएगा. जब से उन्हें बेटे के पाकिस्तान में होने की जानकारी मिली है, तब से वे लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के संपर्क में हैं. परिवार का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किया, लेकिन अब तक बेटे की वतन वापसी नहीं हो सकी है.
परिजनों के मुताबिक, पाकिस्तान में रहने के दौरान उनकी बादल बाबू से दो बार बात हो चुकी है. उन्होंने बताया कि बादल बाबू किडनी की गंभीर बीमारी से भी जूझ रहा है. जब वह पाकिस्तान गया था, तब उसकी उम्र 19 वर्ष थी और अब वह 21 वर्ष का हो चुका है. परिवार का कहना है कि उसकी बीमारी को देखते हुए भारत सरकार को मामले में गंभीरता से पहल करनी चाहिए ताकि वह जल्द अपने देश लौट सके.
इस बीच, लंदन में रहने वाली पूनम नाम की एक महिला ने भी बादल बाबू की मदद के लिए पहल की. जानकारी के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान के लाहौर में बंद बादल बाबू की रिहाई और कानूनी पैरवी के लिए वहां के एक वकील से संपर्क किया और अपने स्तर पर आर्थिक सहायता भी दी. पूनम का कहना है कि अब विदेश मंत्रालय की ओर से पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास को एक पत्र भेजा जाना जरूरी है. उनका मानना है कि इसके बाद बादल बाबू की डिटेंशन सेंटर से रिहाई और भारत वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.
बादल बाबू के पिता कृपाल ने बताया कि परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी हैं. बेटी की शादी हो चुकी है. दो बेटों की भी शादी हो चुकी है. अब केवल बादल बाबू की शादी बाकी है. परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि वह जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लौट आए और फिर सामान्य जीवन शुरू कर सके.
परिवार को बेटे की सुरक्षित वतन वापसी का इंतजार
परिवार का कहना है कि वे लगातार उम्मीद लगाए हुए हैं कि सरकार उनकी अपील पर ध्यान देगी और बेटे की वतन वापसी के लिए जरूरी कदम उठाएगी. फिलहाल उनकी नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि डिटेंशन सेंटर में रह रहे बादल बाबू की भारत वापसी की प्रक्रिया कब पूरी होती है.
बादल बाबू की कहानी में प्यार है, जुदाई है, जेल है और इंतजार भी. फर्क सिर्फ इतना है कि वीर जारा में कहानी का अंत मिलन से हुआ था, जबकि बादल बाबू के परिवार को अब भी उस दिन का इंतजार है, जब उनका बेटा सुरक्षित अपने घर की चौखट पर लौटेगा. परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि वह जल्द भारत लौटे, अपनों के बीच सामान्य जिंदगी फिर से शुरू करे और महीनों से चला आ रहा यह इंतजार खत्म हो.