scorecardresearch
 

क्यों श्मशान की भस्म से श्रृंगार करते हैं महादेव? जानें क्या है इसके पीछे वजह

भगवान शिव का स्वरूप अन्य देवताओं से अलग माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे आभूषणों और भौतिक वैभव के बजाय वैराग्य का मार्ग अपनाते हैं. उनके शरीर पर लगी भस्म यह संदेश देती है कि शरीर नश्वर है और अंततः पंचतत्व में विलीन हो जाता है. इसलिए धन, पद, सौंदर्य और अहंकार पर अभिमान नहीं करना चाहिए.

Advertisement
X
भगवान शिव के शरीर पर लगी भस्म यह संदेश देती है कि शरीर नश्वर है और अंततः पंचतत्व में विलीन हो जाता है.
भगवान शिव के शरीर पर लगी भस्म यह संदेश देती है कि शरीर नश्वर है और अंततः पंचतत्व में विलीन हो जाता है.

भगवान शिव का भस्म धारण करने का विषय सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है. धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार, महादेव अपने शरीर पर भस्म धारण कर संसार को जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का संदेश देते हैं. इस विषय में पौराणिक कथाएं, आध्यात्मिक व्याख्याएं और पारंपरिक मान्यताएं भस्म के महत्व को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझाती हैं. मंदिरों में मिलने वाली पूजित विभूति को श्रद्धा और विधि के साथ धारण करने की परंपरा भी इसी मान्यता से जुड़ी है.

भगवान शिव के भस्म धारण करने का क्या अर्थ है?
भगवान शिव का स्वरूप अन्य देवताओं से अलग माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे आभूषणों और भौतिक वैभव के बजाय वैराग्य का मार्ग अपनाते हैं. उनके शरीर पर लगी भस्म यह संदेश देती है कि शरीर नश्वर है और अंततः पंचतत्व में विलीन हो जाता है. इसलिए धन, पद, सौंदर्य और अहंकार पर अभिमान नहीं करना चाहिए.

पौराणिक कथाओं में उल्लेख
शिव पुराण और अन्य धार्मिक परंपराओं में भस्म के महत्व का उल्लेख मिलता है. एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव श्मशान में विचरण करते समय वहां की भस्म धारण करते थे. ताकि संसार को यह संदेश मिले कि अंत में सभी का शरीर राख में बदल जाता है. एक अन्य कथा में कहा गया है कि कामदेव के भस्म होने के बाद भगवान शिव ने उसी भस्म को धारण कर इच्छाओं और वासनाओं पर विजय का संदेश दिया.

Advertisement

भस्म का आध्यात्मिक संदेश
धार्मिक दृष्टि से भस्म केवल राख नहीं मानी जाती, बल्कि यह जीवन का गहरा दर्शन प्रस्तुत करती है. यह मनुष्य को याद दिलाती है कि अहंकार का अंत निश्चित है, मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और आत्मा को सनातन धर्म में अमर माना गया है. इसी कारण भस्म को वैराग्य, आत्मचिंतन और सदाचार का प्रतीक भी माना जाता है.

कौन और कैसे धारण कर सकता है भस्म?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धा और मर्यादा के साथ कोई भी व्यक्ति मंदिर में उपलब्ध पूजित विभूति या यज्ञ की पवित्र भस्म धारण कर सकता है. सामान्य लोगों के लिए श्मशान की भस्म का उपयोग उचित नहीं माना जाता. परंपरा के अनुसार, ललाट पर तीन क्षैतिज रेखाओं यानी त्रिपुंड के रूप में विभूति लगाई जाती है, जिसे शिव, वैराग्य और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है.

---- समाप्त ----
Live TV

TOPICS:
Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement