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यूपी के 45 डिग्री से खतरनाक है जर्मनी का 33 डिग्री... इंडियन महिला ने बताया अनुभव

यूरोप में रिकॉर्डतोड़ हीटवेव के बीच जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो वायरल हो रहा है. महिला का कहना है कि उत्तर प्रदेश की 45-50 डिग्री गर्मी झेलने के बावजूद जर्मनी की 33 डिग्री गर्मी उनसे बर्दाश्त नहीं हो रही. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यूरोप की कम गर्मी भारत की ज्यादा गर्मी से भी ज्यादा परेशान क्यों करती है?

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यूरोप में यह हीटवेव अब जानलेवा साबित हो रही है (Photo:X/@ChadBhishm)
यूरोप में यह हीटवेव अब जानलेवा साबित हो रही है (Photo:X/@ChadBhishm)

यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और ब्रिटेन समेत कई देशों में तापमान लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. वीडियो में महिला बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी झेलने के बावजूद जर्मनी की 33 डिग्री गर्मी उन्हें कहीं ज्यादा परेशान कर रही है.

जिम से घर लौटते समय रिकॉर्ड किए गए वीडियो में महिला कहती हैं, "मैं जर्मनी में रहती हूं और यहां इस समय 33 डिग्री तापमान है. मैं भारत के यूपी में रही हूं, जहां अक्सर 45 से 50 डिग्री तक गर्मी पड़ती है. वहां इतनी परेशानी नहीं हुई, लेकिन यहां की गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रही."

महिला के मुताबिक तेज धूप और लगातार बनी रहने वाली गर्मी ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी है. उन्होंने बताया कि 33 डिग्री तापमान पर ही हीट वार्निंग जारी कर दी गई है और ज्यादातर लोग घरों के अंदर रहने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि आम दिनों में भीड़ से भरा रहने वाला उनका जिम भी इस गर्मी की वजह से लगभग खाली पड़ा था.

देखें वीडियो

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आखिर यूरोप की 33 डिग्री गर्मी यूपी की 45 डिग्री से ज्यादा क्यों लगती है?

Reuters की एक रिपोर्ट कहती है कि पहली वजह है कि यूरोप के ज्यादातर घर, ऑफिस और सार्वजनिक इमारतें ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. वहां एयर कंडीशनर भारत की तरह आम नहीं हैं. ऐसे में बाहर के साथ-साथ घर के अंदर भी गर्मी बनी रहती है.

दूसरी वजह है लंबे दिन. गर्मियों में यूरोप में सूरज 15 से 16 घंटे तक निकलता है. लगातार धूप पड़ने से इमारतें और सड़कें देर तक गर्म रहती हैं और रात में भी तापमान आसानी से नहीं गिरता.

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तीसरी वजह यह है कि यूरोप के लोग ऐसी गर्मी के आदी नहीं हैं. भारत में 40 से 45 डिग्री तापमान कई इलाकों में सामान्य माना जाता है. लोग उसी हिसाब से अपने घर, कपड़े और दिनचर्या ढाल चुके हैं. जबकि यूरोप में 30 से 35 डिग्री तापमान भी असामान्य माना जाता है.

इसके अलावा वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय यूरोप में 'ओमेगा ब्लॉक' नाम का हाई-प्रेशर वेदर सिस्टम बना हुआ है. यह सिस्टम गर्म हवा को कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में फंसा देता है, जिससे लगातार हीटवेव की स्थिति बनी रहती है. जलवायु परिवर्तन के कारण भी यूरोप में ऐसी चरम गर्मी पहले की तुलना में अधिक बार और ज्यादा गंभीर रूप में देखने को मिल रही है.

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1300 से ज्यादा लोगों की मौत

यूरोप में यह हीटवेव अब जानलेवा साबित हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 21 जून के बाद से 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. अकेले फ्रांस में करीब 1,000 लोगों की मौत की बात कही जा रही है. वहीं जर्मनी में जंगलों में आग, सड़कों और रेलवे ट्रैक को नुकसान तथा इमरजेंसी सेवाओं पर बढ़ते दबाव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तापमान देखकर गर्मी की तुलना करना सही नहीं है. किसी जगह की नमी, हवा की स्थिति, इमारतों की बनावट, रात का तापमान और लोगों की तैयारी जैसे कई कारक तय करते हैं कि गर्मी इंसान को कितनी ज्यादा महसूस होगी. यही वजह है कि जर्मनी की 33 डिग्री गर्मी, उत्तर प्रदेश की 45 डिग्री गर्मी से भी ज्यादा असहनीय महसूस हो सकती है.

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