चीनी का नाम सुनते ही मुंह में मिठास घुल जाती है, लेकिन आज चीनी मीठी नहीं रह गई, बल्कि इस पर महंगाई की मार पड़ने से ये बे-स्वाद नजर आ रही है. त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की कीमतें आसमान पर पहुंच रही हैं. रिटेल मार्केट में Sugar Price 60-65 रुपये प्रति किलो या इससे भी ज्यादा पहुंच चुका है. दूसरी ओर चीनी को लेकर राजनीति पर चरम पर है. इस बीच जहां एक ओर सरकार ने देश में पर्याप्त चीनी होने की बात कही है, तो वहीं अब इस मामले में इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से भी बयान आया है, जिसमें चीनी महंगी होने के पीछे के बड़े कारणों के बारे में बताया गया है.
ISMA ने गिनाए चीनी महंगे होने के कारण
इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने देश में चीनी की कीमतों में आ रहे उछाल को लेकर बड़ा बात कही है. उन्होंने कहा कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाजार की चिंताओं को दूर किया जाएगा. Sugar Price में बढ़ोतरी 16 प्रतिशत है और यह कमी के कारण नहीं है.
आईएसएमए चेयरमैन ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे के कारणों पर बात करते हुए कहा कि इस बढ़ोतरी के पीछे मौसम के कारण गन्ने की कम पैदावार, महाराष्ट्र में अधिक क्रशिंग दर और यूपी में किस्मों से जुड़ी समस्याएं हैं. इसके अलावा त्योहारी सीजन के चलते डिमांड तेज होना और ऐसे में ब्राजील ने आपूर्ति कम करना भी बड़ी वजह है.
इसके अलावा शिवगांवकर ने चीनी की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी के पीछे का सबसे बड़ा कारण सट्टेबाजी को बताया है. उन्होंने कहा कि थोक खरीदारों ने स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है, जिससे चीनी बाजार से हट गई है और इसकी कमी पैदा होने से कीमतों में इजाफा हो रहा है.
इथेनॉल से नहीं कोई लेना-देना
चीनी का दाम बढ़ने की वजहों का जिक्र करते हुए ISMA चेयरमैन ने साफ किया कि Sugar Price Hike के संकट के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. इससे पहले मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया था कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल करने से देश में चीनी की सप्लाई कम हो रही है और उसके चलते कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा था कि इस तेजी के पीछे इथेनॉल को कोई लेना-देना नहीं है.
मंत्री ने बताए थे ये कारण
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे दो कारण बताते हुए कहा था कि रेड रॉट बीमारी और अल नीनो की स्थितियों से चीनी के उत्पादन में गिरावट आई है. इससे न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में चीनी समेत कुल एग्रीकल्चर प्रोडक्शन में कमी आई है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया था कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और केंद्र सरकार कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है.