शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) (Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray)) का गठन 2022 में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हुआ था. उसे चुनाव आयोग ने मुख्य शिवसेना से अलग एक नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया था. यह दो अलग-अलग गुटों में से एक था, दूसरा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली बालासाहब की शिव सेना थी, जो 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के परिणामस्वरूप गठित हुई, जब तक कि चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शिव सेना की वैध संरचना के रूप में मान्यता नहीं दी. फरवरी 2023 में ईसीआई के फैसले के खिलाफ ठाकरे ने नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया है कि केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार के बाद देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली में जिम्मेदारी मिल सकती है. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. राउत ने 18 जुलाई से शुरू होने वाले 'राम रक्षा आंदोलन' का भी जिक्र किया.
नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की प्रखर विरोधी शिवसेना UBT ने परिसीमन बिल पर सरकार को शर्तों के साथ समर्थन करने की घोषणा कर राजनीतिक जगत को चौंका दिया है. शिवसेना UBT के पास लोकसभा में 9 सांसद थे, लेकिन पार्टी में ताजा बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मात्र 3 सांसद रह गए हैं.
शिवसेना (UBT) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है. उद्धव ठाकरे की पार्टी ने बगावत कर शिंदे गुट में शामिल हुए छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनन मान्य नहीं है. वहीं, एकनाथ शिंदे ने नोटिस को खारिज करते हुए कहा कि सांसदों ने इसे कूड़ेदान में फेंक दिया.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शिंदे गुट में शामिल हुए छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय मान्य नहीं है. वहीं, एकनाथ शिंदे ने नोटिस को बेअसर बताते हुए कहा कि सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष है.
अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (UBT) ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू किया। आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है.
ठाणे के कापूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके बेटे गीतेश राउत के खिलाफ उनकी बहू गिरिजा राउत ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है.
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर राम रक्षा आंदोलन चला रही शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा है कि यह अब बाबर जनता पार्टी बन गई है.
श्रीराम मंदिर के चंदा और चढ़ावा चोरी का मामला अब सियासी रंग ले चुका है. विपक्ष अब इस मुद्दे के बहाने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है और सियासी माहौल बनाने के लिए सड़क पर उतरने का दांव चला है. कांग्रेस यूपी में पदयात्रा शुरू कर रही है तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने महाराष्ट्र में राम रक्षा आंदोलन शुरू किया है.
अब तक मोदी सरकार के दो कार्यकाल में जो मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है, तब बीजेपी खुद अपने दम पर बहुमत में थी. सहयोगियों को सम्मान और पद जरूर मिला. लेकिन अबकी बार NDA सरकार का वो मंत्रिमंडल विस्तार है, जहां सहयोगियों की सियासी ताकत बीजेपी के लिए जरूरी है. ऐसे मंत्रिमंडल फेरबदल में चुनौती पुराने साथी बनाम नए दोस्तों के बीच सामंजस्य बनाने की होगी.
बंगाल में हार के बाद टीएमसी के विधायकों-सांसदों ने बगावत कर दी और NDA को सपोर्ट का ऐलान किया. इसके बाद महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट का दमन थाम लिया. विपक्ष में लगातार टूट के चलते बीजेपी और मजबूत हो रही है. इसी पर देखें सो सॉरी का ये मजेदार एपिसोड,
शिवसेना UBT ने केंद्र सरकार से हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में 'हिंदू संरक्षण बोर्ड' बनाने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि हाल के मंदिर विवादों के बाद पारदर्शी और स्वतंत्र प्रबंधन की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही है.
उद्धव गुट को छोड़कर शिंदे में गुट में जाने वाले सांसद संजय दीना पाटील का एक विवादित वीडियो सामने आया है..जिसमें वो पत्रकारों के साथ गाली-गलौज और बदसलूकी करते नज़र आ रहे.. पत्रकारों को सवाल न पूछने और कैमरा बंद करने की धमकी देते दिखे...और वीडियो में कह रहे है...अगली बार आओगे तो मार खाओगे. देखें...
बागी सांसद संजय दिना पाटिल पर पत्रकारों को धमकी देने के आरोप लगे हैं. इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे इन दिनों जबरदस्त सियासी चक्रव्यूह घिरे हैं. एक तरफ उनके 6 लोकसभा सांसद बगावत कर शिंदे के साथ चले गए हैं तो दूसरी तरफ उद्धव के द्वारा बुलाई महाविकास अघाड़ी में 23 विधायक शामिल नहीं हुए. ऐसे में उद्धव का कहना है कि क्या हम साथ हैं?
महा विकास अघाड़ी की बैठक में उद्धव ठाकरे ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या हम सच में साथ हैं. यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब उनके गुट से 6 सांसद अलग हो चुके हैं. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि विपक्ष की एकता सिर्फ बयान में नहीं, बल्कि सदन और सड़क दोनों जगह दिखनी चाहिए.
शिवसेना UBT के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने स्पीकर से मिलकर बागी गुट को मान्यता देने की किसी भी कोशिश पर आपत्ति जताई है. दोनों नेताओं ने दावा किया कि स्पीकर ने फिलहाल किसी पत्र के मिलने से इनकार किया है.
शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा सांसदों की बगावत के बाद संसदीय ताकत में भारी कमी का सामना कर रही है. छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं, जिससे पार्टी के संसदीय दल में सिर्फ चार सांसद बचे हैं. ऐेसे में अब संसद भवन परिसर में पार्टी के कार्यालय के आवंटन पर संकट मंडराने लगा है, क्योंकि नियम के मुताबिक पांच या ज्यादा सांसदों वाले दलों को ही अलग कार्यालय मिलता है.
एकनाथ शिंदे ने कहा कि ऑपरेशन टाइगर तो पूरा हुआ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे खत्म कर दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी और भी कदम उठाने बाकी हैं.
उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं. 6 सांसदों ने अभी शिंदे गुट में शामिल होने का एलान किया ही था कि अब विधायकों में बगावत की खबरें आ रही हैं. उद्धव की बैठक से 3 विधायक और एक एमएलसी नदारद रहे. इसके बाद सवाल उठने लगा है कि सांसदों के बाद क्या उद्धव गुट के विधायक भी टूटेंगे? देखें रिपोर्ट.
महाराष्ट्र के सियासी चक्रव्यूह में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे घिरते जा रहे हैं. पहले सांसदों की बगावत और अब उद्धव की बैठक में तीन विधायक और एक एमएलसी का गैर-हाजिर रहने से सियासी चर्चा तेज हो गई है. सवाल उठता है कि क्या ये उद्धव के लिए अस्तित्व को बचाए रखने का संकट गहरा गया है?
आज हम बात करने जा रहे हैं महाराष्ट्र की सियासत से जुड़ी बड़ी खबर पर. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होती नज़र नहीं आ रही हैं. 6 सांसदों ने अभी शिंदे गुट में शामिल होने का एलान किया ही था कि सियासी गलियारे में नई बगावत की चर्चा तेज हो गयी.