शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) (Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray)) का गठन 2022 में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हुआ था. उसे चुनाव आयोग ने मुख्य शिवसेना से अलग एक नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया था. यह दो अलग-अलग गुटों में से एक था, दूसरा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली बालासाहब की शिव सेना थी, जो 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के परिणामस्वरूप गठित हुई, जब तक कि चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शिव सेना की वैध संरचना के रूप में मान्यता नहीं दी. फरवरी 2023 में ईसीआई के फैसले के खिलाफ ठाकरे ने नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
महाराष्ट्र में शिवसेना के दो गुटों के बीच विवाद सुप्रीम कोर्ट में तेज हो गया है. उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है और दलबदल विरोधी कानून, पार्टी संविधान की अवहेलना का आरोप लगाया है. सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और देवदत्त कामत ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मूल पार्टी संविधान को आधार बनाने की मांग की.
चीफ जस्टिस की पीठ ने मामले में पांचवें दिन भी सुनवाई की. उद्धव गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि निर्वाचन आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न शिंदे गुट को सौंपते समय तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर फैसला किया.
शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के संगठन को लेकर सवाल पूछे. कपिल सिब्बल ने कहा कि शिवसेना एक राजनीतिक पार्टी है, जिसके अलग-अलग काम के लिए कई निकाय हैं.
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी देने के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अब दो हफ्ते बाद सुनवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना विवाद से जुड़ी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उद्धव ठाकरे गुट की ओर से विस्तार से दलीलें पेश कीं. सिब्बल ने अदालत के समक्ष एक लिस्ट सौंपी और बताया कि शिवसेना को चुनाव आयोग ने विधिवत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी थी.
दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों का प्रदर्शन खत्म होने के बाद शिवसेना उद्धव गुट ने मुंबई के शिवाजी पार्क में तिरंगा रैली की. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद और सभी मांगें माने जाने के बाद ये रैली हुई है. इस रैली में उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, रोहित पवार और आदित्य ठाकरे भी शामिल हुए.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मुंबई के शिवाजी पार्क में 'तिरंगा विजय रैली' निकाली गई. उद्धव ठाकरे ने इसे युवाओं की जीत बताते हुए कहा कि 'देशभक्तों ने अंधभक्तों को हराया', वहीं राज ठाकरे ने Gen-Z की ताकत की तारीफ की.
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने नीट पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है. आदित्य ने ऐसे छात्रों की कानूनी मदद के लिए एक ईमेल आईडी भी जारी की.
20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र की तस्वीर एकदम अलग होगी. इस सत्र में सयोनी घोष और यूसुफ पठान जैसे सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ नहीं दिखेंगे, इसके साथ ही शिवसेना UBT के 6 सांसद भी अब शिंदे सेना के साथ दिखेंगे. इस सत्र में संसद के भीतर सिर्फ सीटिंग अरेंजमेंट ही नहीं बदल रहा, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक संतुलन का नया अध्याय भी शुरू होता नजर आ रहा है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) के चार बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को आधिकारिक मान्यता दे दी है. स्पीकर की अधिसूचना के साथ ही संसद में इन सांसदों की राजनीतिक पहचान बदल गई है.
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया है कि केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार के बाद देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली में जिम्मेदारी मिल सकती है. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. राउत ने 18 जुलाई से शुरू होने वाले 'राम रक्षा आंदोलन' का भी जिक्र किया.
नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की प्रखर विरोधी शिवसेना UBT ने परिसीमन बिल पर सरकार को शर्तों के साथ समर्थन करने की घोषणा कर राजनीतिक जगत को चौंका दिया है. शिवसेना UBT के पास लोकसभा में 9 सांसद थे, लेकिन पार्टी में ताजा बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मात्र 3 सांसद रह गए हैं.
शिवसेना (UBT) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है. उद्धव ठाकरे की पार्टी ने बगावत कर शिंदे गुट में शामिल हुए छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनन मान्य नहीं है. वहीं, एकनाथ शिंदे ने नोटिस को खारिज करते हुए कहा कि सांसदों ने इसे कूड़ेदान में फेंक दिया.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शिंदे गुट में शामिल हुए छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय मान्य नहीं है. वहीं, एकनाथ शिंदे ने नोटिस को बेअसर बताते हुए कहा कि सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष है.
अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (UBT) ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू किया। आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है.
ठाणे के कापूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके बेटे गीतेश राउत के खिलाफ उनकी बहू गिरिजा राउत ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है.
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर राम रक्षा आंदोलन चला रही शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा है कि यह अब बाबर जनता पार्टी बन गई है.
श्रीराम मंदिर के चंदा और चढ़ावा चोरी का मामला अब सियासी रंग ले चुका है. विपक्ष अब इस मुद्दे के बहाने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है और सियासी माहौल बनाने के लिए सड़क पर उतरने का दांव चला है. कांग्रेस यूपी में पदयात्रा शुरू कर रही है तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने महाराष्ट्र में राम रक्षा आंदोलन शुरू किया है.
अब तक मोदी सरकार के दो कार्यकाल में जो मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है, तब बीजेपी खुद अपने दम पर बहुमत में थी. सहयोगियों को सम्मान और पद जरूर मिला. लेकिन अबकी बार NDA सरकार का वो मंत्रिमंडल विस्तार है, जहां सहयोगियों की सियासी ताकत बीजेपी के लिए जरूरी है. ऐसे मंत्रिमंडल फेरबदल में चुनौती पुराने साथी बनाम नए दोस्तों के बीच सामंजस्य बनाने की होगी.
बंगाल में हार के बाद टीएमसी के विधायकों-सांसदों ने बगावत कर दी और NDA को सपोर्ट का ऐलान किया. इसके बाद महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट का दमन थाम लिया. विपक्ष में लगातार टूट के चलते बीजेपी और मजबूत हो रही है. इसी पर देखें सो सॉरी का ये मजेदार एपिसोड,
शिवसेना UBT ने केंद्र सरकार से हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में 'हिंदू संरक्षण बोर्ड' बनाने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि हाल के मंदिर विवादों के बाद पारदर्शी और स्वतंत्र प्रबंधन की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही है.