मुंबई की अगली मेयर जनरल कैटेगरी की महिला होगी. इसका फैसला गुरुवार को लॉटरी निकालकर हुआ. हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्तारूढ़ 'महायुति' गठबंधन के पक्ष में यह लॉटरी सिस्टम 'फिक्स' था. लॉटरी के नतीजों के बाद शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पार्टी को उम्मीद थी कि मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होगा. एसटी महिला कैटेगरी में पात्र दोनों उम्मीदवार उद्धव ठाकरे की पार्टी से ही थीं.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 15 जनवरी को हुए चुनावों में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में 89 सीटें जीतीं, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. इस तरह महायुति गठबंधन 114 के बहुमत के आंकड़े को पार कर देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर नगरीय निकाय पर नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में आ गया. शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं. उसके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को क्रमशः 6 और 1 सीट मिली.
बता दें कि 1997 से 2022 तक बीएमसी पर शिवसेना ने शासन किया. हालांकि, 2022 में पार्टी में टूट पड़ गई और यह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और शिवसेना (शिंदे गुट) में विभाजित हो गई थी. लॉटरी सिस्टम के जरिए हुए फैसले में महाराष्ट्र की आठ अन्य नगर निकायों- पुणे, धुले, नांदेड़-वाघाला, नवी मुंबई, मालेगांव, मीरा-भायंदर, नागपुर और नासिक में भी सामान्य वर्ग की महिलाएं मेयर होंगी. लॉटरी सिस्टम के तहत यह तय किया जाता है कि मेयर पद किस श्रेणी- सामान्य (GEN), महिला (W), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित होगा.
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शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदों को लगा झटका
कैटेगरी घोषित होने के बाद पात्र उम्मीदवार नामांकन दाखिल करते हैं. राज्य के शहरी विकास विभाग, जिसकी जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है, ने मुंबई समेत 28 नगर निकायों के मेयर पदों के लिए यह लॉटरी कराई, जहां 15 जनवरी को चुनाव हुए थे. मुंबई के लिए निकली लॉटरी ने शिवसेना (यूबीटी) की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. पिछले सप्ताह चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि 'अगर भगवान की इच्छा हुई तो मुंबई को हमारी पार्टी का मेयर मिलेगा.'
शिवसेना (यूबीटी) को उम्मीद थी कि यदि लॉटरी में एसटी महिला के लिए आरक्षण तय होता तो उसके पक्ष में परिणाम आ सकता था, क्योंकि इस श्रेणी में केवल दो महिला उम्मीदवार हैं और दोनों ठाकरे गुट से हैं. शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने लॉटरी सिस्टम का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि फैसले के नियम बिना किसी को बताए बदल दिए गए. उन्होंने कहा कि पिछले दो मेयर सामान्य वर्ग से थे, इसलिए इस बार ओबीसी वर्ग से मेयर होना चाहिए था. पेडनेकर ने यह भी आरोप लगाया कि एसटी वर्ग को लॉटरी सिस्टम से बाहर रखा गया. उन्होंने कहा, 'हम इस पूरी प्रक्रिया की निंदा करते हैं. लॉटरी की प्रक्रिया फिक्स की गई थी.'
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कांग्रेस ने भी लॉटरी सिस्टम पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी लॉटरी सिस्टम को 'फिक्स' बताते हुए इसमें धांधली का आरोप लगाया. हालांकि शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, 'हमने कानून के अनुसार लॉटरी प्रक्रिया पूरी की है.' लॉटरी के मुताबिक आठ अन्य नगरीय निकायों- छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, सांगली-मिरज-कुपवाड़, अमरावती, वसई-विरार, सोलापुर, पिंपरी-चिंचवड़ और भिवंडी-निजामपुर में भी सामान्य वर्ग के मेयर होंगे (जिनमें महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं).
ठाणे नगर निगम में अनुसूचित जाति वर्ग से मेयर होगा, जबकि जलगांव, चंद्रपुर, अहिल्यानगर और अकोला नगर निगमों में ओबीसी वर्ग की महिलाएं मेयर होंगी. पनवेल, इचलकरंजी, कोल्हापुर और उल्हासनगर नगर निगमों में ओबीसी वर्ग से मेयर होगा, जबकि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में अनुसूचित जनजाति वर्ग का मेयर होगा. जालना और लातूर नगर निगमों में अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाएं मेयर होंगी.