संजय निषाद (Sanjay Nishad) योगी आदित्यनाथ मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री हैं. वे 2021 से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं. उन्होंने 2016 में निषाद पार्टी की स्थापना की और उसके अध्यक्ष बने.
संजय निषाद का जन्म 7 जून 1965 को गोरखपुर के चौमुखा में एक निषाद परिवार में हुआ था. उन्होंने इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का कोर्स किया. संयज इस कोर्स को चिकित्सा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष शुरू किया और 2002 में पूर्वांचल मेडिकल इलेक्ट्रो होम्योपैथी एसोसिएशन की स्थापना की और इसके अध्यक्ष बने. निषाद पार्टी बनाने से पहले उन्होंने एक दशक तक गोरखपुर के गीता वाटिका रोड पर एक क्लीनिक भी चलाया.
पूर्व आईएएस अभिषेक सिंह की 2027 यूपी विधानसभा चुनाव में संभावित एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं. जौनपुर में निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद से उनकी मुलाकात ने सियासी अटकलों को और बढ़ा दिया है. हालांकि इसे औपचारिक बताया गया, लेकिन उनकी बढ़ती जमीनी सक्रियता संकेत दे रही है कि वे राजनीति में उतर सकते हैं. जौनपुर की कई सीटों पर समीकरण उनके पक्ष में बन सकते हैं, जिससे उनके चुनाव लड़ने की संभावना मजबूत मानी जा रही है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव की बिछाई जा रही सियासी बिसात पर निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद घिर गए हैं. एक तरफ ओम प्रकाश राजभर तो दूसरी तरफ मुकेश सहनी. एक से सीट का खतरा तो दूसरे से सियासी आधार को बचाए रखने की टेंशन है.
योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत सीट जहूराबाद छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. राजभर की नजर निषाद पार्टी के प्रभाव वाली सीटों पर है, लेकिन सवाल यही है कि वो अपनी सीट क्यों छोड़ रहे हैं. क्या उन्हें अंसारी परिवार के वर्चस्व से डर है या फिर सवर्ण वोटों की नाराजगी का खतरा?
गोरखपुर में आयोजित निषाद पार्टी की महारैली में मंत्री डॉ. संजय निषाद भाषण के दौरान भावुक होकर रो पड़े. आरक्षण की मांग को लेकर जुटी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज की आवाज उठाने का भरोसा दिया और विपक्ष पर निषाद समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया. उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने, घर-घर जागरूकता फैलाने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने की अपील की.
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और समाजवादी पार्टी के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. मंत्री ने विपक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद सपा विधायक वेल में आकर उनके भाषण के कागज छीन लिए. इस घटना के बाद संसदीय कार्य राज्यमंत्री ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
UGC कानून पर विरोध के बीच संजय निषाद ने कहा कि जब जनरल कैटेगरी को 10 प्रतिशत EWS आरक्षण मिला था, तब किसी ने विरोध नहीं किया. उन्होंने सवाल उठाया कि अब सामाजिक भेदभाव रोकने के लिए कानून लाया गया तो हंगामा क्यों. संजय निषाद ने कहा कि संसद से बने कानून पहले लागू होने चाहिए, खामियां दिखें तो बाद में संशोधन संभव है.
संभल में चल रहे बुलडोजर एक्शन और विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर संजय निषाद ने कड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की बयानबाजी केवल एक विशेष वर्ग को खुश करने की कोशिश है. संजय निषाद ने इस बात पर जोर दिया कि देश कानून के अधीन चलता है और अवैध संपत्तियों पर उचित कार्रवाई सरकार की जिम्मेदारी है.
आगरा में फतेहाबाद रोड पर यूपी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई. सामने अचानक कुत्ता आने पर ब्रेक लगाने से पीछे से दूसरी कार टकरा गई. हादसे में कार का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन मंत्री और उनके साथ मौजूद लोग पूरी तरह सुरक्षित रहे. हादसे के बाद मंत्री संजय निषाद ने ईश्वर का धन्यवाद करते हुए कहा कि सभी सुरक्षित हैं.
लगभग पचहत्तर वर्षों के बाद जनता ने साफ तौर पर तय कर लिया है कि मोदी और योगी के आने के बाद उत्तर प्रदेश में क्या बदलाव हुए हैं. जनता जानती है कि पहले क्या हालात थे और अब अर्थव्यवस्था, कानून व्यवस्था, विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, जल और सड़क सेवाएं किस प्रकार प्रभावित हुई हैं.
नीतीश कुमार के बुर्का संबंधी बयान पर टिप्पणी को लेकर उठे विवाद के बाद कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनकी बात को गलत संदर्भ में लिया गया और वह पूर्वांचल की बोलचाल का हिस्सा थी. किसी महिला, समुदाय या धर्म का अपमान करने का उनका इरादा नहीं था. उन्होंने बयान वापस लेने की बात भी कही.
बलिया में निषाद पार्टी के मंत्री संजय निषाद के विवादित बयान पर करणी सेना ने 5.51 लाख रुपये इनाम की घोषणा की. मंत्री ने बलिया के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया. कांग्रेस ने प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार निकाला और FIR दर्ज करने की मांग की. मंत्री या पार्टी ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बयान पर विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया दी है. विपक्षी दलों ने कहा कि सहयोगी दलों को लग रहा है कि बीजेपी के साथ रहने में अब कोई फायदा नहीं है.
निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद ने बरेली में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि कृष्ण वंशज होने के नाते उन्हें कृष्ण जन्मभूमि की आजादी" के लिए आवाज उठानी चाहिए. उन्होंने NDA को समर्थन दोहराते हुए कहा कि उनकी पार्टी "त्रेता युग से NDA के साथ है", जिसकी जड़ें भगवान राम और निषाद राज की दोस्ती में हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने एफआईआर, नोटिस बोर्ड और अन्य कई जगहों पर जाति का उल्लेख न करने और जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल न करने का नियम लागू किया है. इस निर्णय पर कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए या पुनर्याचिका दायर करनी चाहिए.
उत्तर प्रदेश सरकार ने जातीय आधारित बैठकों और रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने अपनी ही सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताई है. संजय निषाद ने कहा है कि जातीय आधारित आंदोलन और रैलियां नहीं होंगी तो सामाजिक न्याय कैसे मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इससे पिछड़े और अति पिछड़ों का हक मारा जाएगा.
संतकबीरनगर जिले में निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव अब्दुल अजीम पर फायरिंग की घटना सामने आई है. अजीम का कहना है कि बाइक सवार बदमाश उन्हें गोली मारकर मौके से फरार हो गए. फिलहाल, इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीजेपी सहयोगी दलो के निशाने पर रहे हैं. पर योगी ने पिछले कुछ दिनों से जिस तरह एनडीए के दलों को महत्व देना शुरू किया है वह उनकी शैली से अलग ही दिख रहा है. जाहिर है कि यह बदलाव यूं ही नहीं है.
दरअसल, इससे पहले संजय निषाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बीजेपी को अगर उनसे फायदा नहीं है तो वह गठबंधन तोड़ सकती है. यही नहीं, निषाद ने यह भी कहा था कि बीजेपी अपने स्थानीय नेताओं से सहयोगी दलों पर हमले कराना बंद करे, नहीं तो आगे दोस्ती बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा.
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने बीजेपी को साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि अगर लगता है कि उन्हें निषाद पार्टी से फायदा नहीं है तो गठबंधन तोड़ सकते हैं. संजय निषाद के इस बयान के पीछे सियासी परेशानी है या फिर पावरगेम?
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में शामिल बीजेपी के तीन सहयोगी ओबीसी नेताओं ने दिल्ली में एक मंच पर एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए सियासी हुंकार भरी है, जिसकी सियासी तपिश लखनऊ की सियासत तक में महसूस की जाने लगी है. ऐसे में सवाल उठता है कि तीनों क्षत्रपों का साथ आना संयोग है या फिर सियासी प्रयोग?
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की सफेद फॉर्च्यूनर गाड़ी विधानसभा के नो पार्किंग ज़ोन में खड़ी थी. ट्रैफिक पुलिस गुरुवार को विधानसभा सत्र के दौरान इस गाड़ी को क्रेन से उठाकर ले गई.