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चीला

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चीला (Chilla) भारतीय घरों में बनाया जाने वाला एक लोकप्रिय नाश्ता है. यह मुख्य रूप से घोल यानी बैटर से तैयार किया जाता है और तवे पर फैलाकर पकाया जाता है. अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में चीला बनाने का तरीका और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री अलग हो सकती है.

चीला बनाने के लिए बेसन, मूंग दाल, चावल या दूसरे अनाज और दालों का इस्तेमाल किया जाता है. बेसन से बनने वाले चीले को बेसन चीला कहा जाता है, जबकि भिगोई हुई मूंग दाल को पीसकर बनाया गया चीला मूंग दाल चीला कहलाता है. कुछ जगहों पर चावल या अन्य अनाज के आटे से भी चीला बनाया जाता है.

चीला तैयार करने के लिए सबसे पहले इस्तेमाल होने वाली सामग्री का घोल बनाया जाता है. इसमें जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर बैटर तैयार किया जाता है. स्वाद के लिए नमक, मसाले, हरी मिर्च, धनिया, प्याज, टमाटर या दूसरी सब्जियां भी डाली जा सकती हैं. इसके बाद गर्म तवे पर थोड़ा तेल या घी लगाकर बैटर को गोल आकार में फैलाया जाता है. दोनों तरफ से पकने के बाद इसे परोसा जाता है.

चीला आमतौर पर नाश्ते के तौर पर खाया जाता है, लेकिन इसे हल्के भोजन के रूप में भी लिया जाता है. इसे हरी चटनी, टमाटर की चटनी, दही या दूसरी पसंद की चीजों के साथ परोसा जाता है.

चीले की खासियत यह है कि इसे अलग-अलग सामग्री के साथ आसानी से तैयार किया जा सकता है. घर में उपलब्ध सामग्री के आधार पर इसके स्वाद और आकार में बदलाव किया जा सकता है. इसी वजह से यह बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए घरों में बनाया जाने वाला एक आम व्यंजन है.

भारत में चीले की कई स्थानीय किस्में देखने को मिलती हैं. कुछ जगहों पर इसे पतला और कुरकुरा बनाया जाता है, जबकि कहीं यह थोड़ा मोटा और नरम होता है. इसकी लोकप्रियता केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई नाश्ते की दुकानों और रेस्तरां के मेन्यू में भी अलग-अलग तरह के चीले मिलते हैं.

आसान तैयारी और अलग-अलग सामग्री के इस्तेमाल की वजह से चीला भारतीय नाश्ते की परंपरा में अपनी एक अलग पहचान रखता है.

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