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चना

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चना (Chana) भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दालों में से एक है. इसे अंग्रेजी में Chickpea या Bengal Gram कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Cicer Arietinum है. चना फैबेसी परिवार से संबंधित एक दलहनी फसल है. भारत के रोजमर्रा के खानपान में इसका इस्तेमाल कई अलग-अलग रूपों में किया जाता है.

चना मुख्य रूप से रबी मौसम में उगाया जाता है. इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के आसपास होती है, जबकि फसल की कटाई फरवरी से अप्रैल के बीच की जाती है. इसकी खेती के लिए ठंडा मौसम और अपेक्षाकृत कम नमी वाली परिस्थितियां उपयुक्त मानी जाती हैं. चने की फसल को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी उगाई जाती है.

भारत चने के प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है. देश में इसकी खेती मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में की जाती है. अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी, मौसम और खेती की परिस्थितियों के अनुसार चने की विभिन्न किस्में उगाई जाती हैं.

चना मुख्य रूप से दो प्रकार का माना जाता है, देसी चना और काबुली चना. देसी चना आकार में छोटा और उसका रंग आमतौर पर भूरा या गहरा होता है. काबुली चना अपेक्षाकृत बड़ा और हल्के क्रीम रंग का होता है. दोनों का इस्तेमाल अलग-अलग व्यंजनों में किया जाता है.

चने को साबुत दाने के रूप में, दाल बनाकर और आटे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. चने को पीसकर बनाए जाने वाले आटे को बेसन कहा जाता है. बेसन का इस्तेमाल पकौड़े, चीला, कढ़ी, सेव और कई तरह की मिठाइयां बनाने में होता है. इसके अलावा भुना चना भी भारत में एक लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है.

कृषि और खाद्य बाजार में चने की कीमत उत्पादन, मौसम, मांग, सरकारी नीतियों और मंडियों में आवक के आधार पर बदलती रहती है. चना दाल उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है.

भारत में चने की खेती किसानों और दाल उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. इसके व्यापक इस्तेमाल के कारण यह देश की प्रमुख दलहनी फसलों में अपनी खास जगह रखता है.

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