पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह बुधवार को बांदा में बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा के अंतिम दिन शामिल होने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कई निजी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और कार्यकर्ताओं के बीच अपना पुराना अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि एक बार औरैया में हुए एक्सीडेंट के दौरान एक अधिकारी उनकी हत्या कराना चाहता था, तब बांदा और बुंदेलखंड के हजारों लोगों ने अस्पताल को घेरकर उनकी जान बचाई थी. बांदा के इसी अटूट प्रेम और सहयोग को उन्होंने स्वयं पर एक बड़ा कर्ज बताया है.
जब अस्पताल को घेर लिया था हजारों लोगों ने
बृजभूषण शरण सिंह ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि बांदा उनके हृदय में बसता है. उन्होंने बताया कि जब वह अस्पताल में भर्ती थे और उनकी हत्या की साजिश रची जा रही थी, तब बुंदेलखंड से करीब एक हजार लोग वहां पहुंच गए थे. वे लोग तब तक डटे रहे जब तक बृजभूषण पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो गए. उन्होंने भावुक होकर कहा कि बांदा और अयोध्या की दूरी मायने नहीं रखती, यहां के लोगों ने हमेशा उनका साथ दिया है.
6 बार सांसद और परिवार का राजनीतिक दबदबा
अपनी राजनीतिक ऊंचाई का जिक्र करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि वह छह बार सांसद रहे हैं, उनकी पत्नी सांसद रहीं और अब उनका बेटा सांसद है. उन्होंने बताया कि उनके पहले चुनाव में भी बांदा से एक हजार लोग पोलिंग एजेंट बनने के लिए गए थे. उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि वे इस पुराने और गहरे संबंध को आगे बढ़ाते रहें.
राजनीतिक सवालों पर साधी चुप्पी
कार्यक्रम के बाद जब मीडिया ने उनसे वर्तमान राजनीति को लेकर सवाल पूछने चाहे, तो उन्होंने किनारा कर लिया. बृजभूषण ने सीधे तौर पर कहा कि वह राजनीति की बात करने बांदा नहीं आए हैं. इसके बाद वे अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए.