इंटरनेट की दुनिया में अक्टूबर के आखिरी दिनों में एक के बाद एक ऐसे साइबर सिक्योरिटी मामले सामने आए हैं, जिन्होंने बड़ी टेक कंपनियों से लेकर सरकारी एजेंसियों तक की चिंता बढ़ा दी है. कहीं वेबसाइट बनाने वाली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज PHP में गंभीर खामियां मिलीं, तो कहीं डिजिटल सर्टिफिकेट बनाने वाली भारतीय कंपनी eMudhra की सिक्योरिटी सिस्टम पर सवाल उठे.
AI मॉडल से जुड़ने वाले सॉफ्टवेयर LiteLLM के एक अपडेट में खतरनाक कोड मिला, जबकि क्लाउड प्लेटफॉर्म Railway ने भी डेटा ब्रीच की आशंका जताई है. SBI के भी हजारों यूजर्स का डेटा लीक होने की खबर है.
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इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट ने खुलासा किया कि चीन से जुड़े एक हैकिंग समूह ने AI की मदद से दुनिया भर के सैकड़ों संगठनों को निशाना बनाया. उत्तर कोरिया के कई सरकारी वेबसाइटों पर भी इंटरनेट बाधित होने की खबर आई. सोशल मीडिया पर इन घटनाओं को 'Black October' कहा जा रहा है.
हालांकि, इन सभी घटनाओं को एक ही साइबर अटैक का हिस्सा मानने का कोई प्रमाण नहीं है. इनका आपस में सीधा कनेक्शन भी स्टैब्लिश नहीं हुआ है. लेकिन इन मामलों से एक बात साफ है कि इंटरनेट की सुरक्षा को लेकर अब सिर्फ पासवर्ड या एंटीवायरस ही काफी नहीं हैं. वेबसाइट चलाने वाले सॉफ्टवेयर, डिजिटल सर्टिफिकेट, क्लाउड सेवाएं और AI टूल भी साइबर सुरक्षा की बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं.
PHP की दो खामियों से दुनिया भर में बढ़ीं हैकिंग की कोशिशें
इस घटनाक्रम की सबसे बड़ी खबर PHP प्रोग्रामिंग भाषा में मिली दो गंभीर सुरक्षा खामियों की है. PHP का इस्तेमाल दुनियाभर में वेबसाइट और वेब ऐप बनाने के लिए होता है. कई लोकप्रिय वेबसाइट सिस्टम और ऑनलाइन सेवाएं इसके सहारे चलती हैं. इसलिए इसकी सुरक्षा में कोई बड़ी चूक सामने आने पर असर काफी दूर तक जा सकता है.
21 अक्टूबर को PHP की टीम ने दो गंभीर खामियों के लिए सुरक्षा अपडेट जारी किए. इन खामियों का फायदा उठाकर हमलावर कुछ कमजोर सर्वर पर बिना लॉगिन किए अपना कोड चला सकते थे. अगर ऐसा होता, तो सर्वर पर मौजूद डेटा चोरी होने, वेबसाइट में बदलाव करने या सेवाओं को बाधित करने का खतरा पैदा हो सकता था.
खामियों की गंभीरता को देखते हुए कई देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने संगठनों को तुरंत अपडेट लगाने की सलाह दी. कुछ सरकारी और सार्वजनिक वेबसाइटों को सुरक्षा पैच लगाने के लिए अस्थायी रूप से ऑफलाइन भी किया गया. ब्रिटेन में BBC के एक शो की वेबसाइट भी प्रभावित वेबसाइटों में शामिल बताई गई.
साइबर सुरक्षा कंपनी Cloudflare के मुताबिक, खामियों की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद उन्हें इस्तेमाल करने की कोशिशों में तेजी से बढ़ोतरी हुई. कंपनी ने पहले हजारों, फिर लाखों कोशिशों की जानकारी दी. हालांकि, किसी हमले की कोशिश और सफल होकर सिस्टम में घुस जाना अलग बातें हैं. शुरुआती रिपोर्टों में इस घटनाक्रम से बड़े पैमाने पर सफल हमले की पुष्टि नहीं हुई थी.
eMudhra की कमजोर डिजिटल की ने क्यों बढ़ाई चिंता?
भारतीय कंपनी eMudhra से जुड़ा डिजिटल सर्टिफिकेट का मामला भी दुनिया भर में चर्चा में रहा. डिजिटल सर्टिफिकेट इंटरनेट पर वेबसाइट की पहचान की पुष्टि करने में मदद करते हैं. ब्राउजर इन्हीं के जरिए यह जांचता है कि सुरक्षित कनेक्शन सही वेबसाइट से जुड़ रहा है या नहीं.
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इस मामले में eMudhra के आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट से जुड़ी क्रिप्टोग्राफिक की कमजोर पाई गईं. कंपनी के मुताबिक, 30 अप्रैल 2025 को की बनाने की प्रक्रिया में हुई तकनीकी चूक के कारण मजबूत की के साथ कमजोर की का दूसरा सेट भी बन गया. कमजोर की ही ब्राउजर के भरोसे वाले सिस्टम में पहुंच गईं.
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ कमजोर की की वैल्यू 256 से भी कम थी. इनमें एक वैल्यू सिर्फ 4 थी. इसका मतलब यह नहीं कि पूरी इंटरनेट सुरक्षा सिर्फ एक नंबर से टूट गई, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि डिजिटल सर्टिफिकेट बनाने की प्रक्रिया में छोटी चूक कितनी गंभीर हो सकती है.
अगर ऐसी की का गलत इस्तेमाल होता, तो हमलावर फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट बनाने की कोशिश कर सकते थे. इससे किसी वेबसाइट या सॉफ्टवेयर की पहचान पर भरोसा कमजोर पड़ सकता था. Google और Mozilla ने प्रभावित सर्टिफिकेट को ब्लॉक करने के कदम उठाए और eMudhra ने भी उन्हें रद्द किया.
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कंपनी ने कहा कि उसकी भारतीय डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट और eSign सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई और कहा कि भारतीय वेबसाइटों और ऐप पर असर सीमित रहा. फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस घटना को सभी भारतीय डिजिटल सिग्नेचर सेवाओं पर हमला बताना गलत होगा.
AI सॉफ्टवेयर के अपडेट में ही मिला खतरनाक कोड
साइबर सुरक्षा की तीसरी बड़ी चिंता AI टूल LiteLLM से जुड़ी है. यह सॉफ्टवेयर अलग-अलग AI मॉडल को ऐप और दूसरी सेवाओं से जोड़ने में इस्तेमाल होता है. कंपनी ने बताया कि 21 अक्टूबर को उसके सॉफ्टवेयर रिलीज करने वाले सिस्टम से छेड़छाड़ की गई और LiteLLM का 1.107.0 वर्जन खतरनाक कोड के साथ जारी हो गया.
कंपनी के मुताबिक, इस वर्जन में ऐसा कोड था जो संवेदनशील जानकारी और लॉगिन क्रेडेंशियल चुरा सकता था. इससे हमलावर प्रभावित सिस्टम पर आगे भी कार्रवाई करने की कोशिश कर सकते थे. कंपनी ने प्रभावित रिलीज हटा दीं और बताया कि हमलावरों ने डेवलपर खातों से जुड़े क्रेडेंशियल का गलत इस्तेमाल किया था.
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि आम तौर पर लोग सॉफ्टवेयर अपडेट को सुरक्षा सुधारने का तरीका मानते हैं. लेकिन अगर अपडेट जारी करने वाली प्रक्रिया ही हैक हो जाए, तो भरोसेमंद दिखने वाला अपडेट भी खतरा बन सकता है. साइबर सुरक्षा की भाषा में इसे सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन पर हमला कहा जाता है.
ऐसे हमले में हैकर सीधे हर ग्राहक के सिस्टम में घुसने के बजाय उस सॉफ्टवेयर या सेवा को निशाना बनाते हैं जिस पर कई ग्राहक भरोसा करते हैं. फिर उस रास्ते से कई संगठनों तक पहुंचने का जोखिम पैदा हो सकता है.
Railway क्लाउड प्लेटफॉर्म पर भी ग्राहकों की जानकारी को लेकर चिंता
क्लाउड प्लेटफॉर्म Railway ने भी बताया कि किसी अनधिकृत व्यक्ति ने उन सिस्टम तक पहुंच बनाई हो सकती है, जहां ग्राहकों के एनवायरनमेंट वेरिएबल रखे जाते हैं. इन वेरिएबल में API की, डेटाबेस पासवर्ड और दूसरी संवेदनशील जानकारी हो सकती है.
कंपनी की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि कुछ एन्क्रिप्टेड जानकारी तक पहुंच बनी और कुछ मामलों में उसकी असली वैल्यू भी सामने आ सकती थी. Railway ने ग्राहकों को API की और दूसरी संवेदनशील जानकारी बदलने की सलाह दी. कंपनी ने जांच के दौरान अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए कदम उठाए.
इस तरह के मामले में खतरा सिर्फ एक क्लाउड अकाउंट तक सीमित नहीं रहता. अगर किसी हमलावर को API की या डेटाबेस पासवर्ड मिल जाए, तो वह दूसरी जुड़ी सेवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है. इसी वजह से कंपनियों को संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा, उसकी नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर उसे बदलने पर ध्यान देना पड़ता है.
माइक्रोसॉफ्ट का खुलासा: AI की मदद से सैकड़ों संगठनों को निशाना बनाया
AI को लेकर सबसे गंभीर खुलासों में से एक माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट है. कंपनी ने कहा कि Storm-0940 नाम से ट्रैक किया जाने वाला चीन से जुड़ा हैकिंग समूह AI आधारित टूल ARTEX का इस्तेमाल कर रहा था. माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 से इस समूह ने दुनियाभर के सैकड़ों संगठनों को निशाना बनाया.
इस अभियान में सरकारी संस्थानों, वित्तीय सेवाओं, तकनीक, ऊर्जा, निर्माण और अन्य क्षेत्रों के संगठन शामिल थे. माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि कुछ मामलों में शुरुआती निशाना बनाने से लेकर क्लाउड सिस्टम में ऊंचे स्तर की पहुंच हासिल करने तक तीन घंटे से भी कम समय लगा.
ARTEX ऐसा फ्रेमवर्क है जो AI मॉडल की मदद से सुरक्षा जांच के कई काम अपने आप कर सकता है. इसका वैध इस्तेमाल सुरक्षा परीक्षण में हो सकता है, लेकिन यही क्षमता गलत हाथों में जाने पर हमले की तैयारी और कई रास्तों से सिस्टम में घुसने की कोशिश को तेज कर सकती है.
माइक्रोसॉफ्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान में निशाना बनाए गए अधिकतर प्रयास सफल नहीं हुए. प्रभावित एप्लिकेशन या सफल लॉगिन का मतलब अपने आप यह नहीं है कि हर संगठन का डेटा चोरी हुआ. फिर भी यह घटना दिखाती है कि AI के कारण हमलावरों की गति बढ़ सकती है और सुरक्षा टीमों को जवाब देने के लिए कम समय मिल सकता है.
उत्तर कोरिया के इंटरनेट पर भी बाधा, लेकिन यह अलग मामला
23 अक्टूबर को Reuters ने अमेरिकी नेटवर्क निगरानी कंपनी Kentik के विश्लेषण के हवाले से बताया कि उत्तर कोरिया के इंटरनेट पर संभावित DDoS हमले के कारण रुकावटें आईं. इस दौरान .kp डोमेन वाली 40 से ज्यादा सरकारी वेबसाइटों पर असर पड़ा. इनमें विदेश मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी KCNA की वेबसाइटें भी शामिल थीं.
DDoS हमले में किसी वेबसाइट या सर्वर पर बहुत ज्यादा इंटरनेट ट्रैफिक भेजा जाता है, ताकि असली यूजर उसकी सेवा तक न पहुंच सकें. Kentik के विश्लेषण में वियतनाम और फिलीपींस से आने वाले ट्रैफिक में तेज उछाल दिखा, लेकिन हमले के पीछे किसका हाथ था, इसकी पुष्टि नहीं हुई. कुछ विशेषज्ञों ने उत्तर कोरिया की बिजली और नेटवर्क व्यवस्था में अस्थिरता को भी संभावित वजह बताया.
क्या आम यूजर को भी खतरा है?
इन घटनाओं का मतलब यह नहीं है कि हर इंटरनेट यूजर का डेटा चोरी हो गया है या हर वेबसाइट हैक हो चुकी है. सबसे सीधा खतरा उन कंपनियों और वेबसाइटों को है जो कमजोर सॉफ्टवेयर चला रही हैं या जिनके सिस्टम में संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा ठीक से नहीं की गई है.
आम यूजर को अपने ब्राउजर, ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप को अपडेट रखना चाहिए. किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, जहां संभव हो दो-स्तरीय सुरक्षा चालू रखें और अगर किसी कंपनी की ओर से पासवर्ड या API की बदलने की सलाह मिले, तो उसे नजरअंदाज न करें. कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे अपने सर्वर और सॉफ्टवेयर के वर्जन जांचें, सुरक्षा अपडेट लगाएं और संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें.