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10वीं की परीक्षा छोड़ी, फिर भी एक दिन में 2 करोड़ की कमाई! वैभव सूर्यवंशी पर बरस रहा है पैसा, रिपोर्ट ने उड़ाए फैन्स के होश

वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली है. क्रिकेट के नए स्टार बनने वाले वैभव की फैन फॉलोइंग हर दिन के साथ बढ़ती चली जा रही है.

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वैभव हुए मालामाल. (PHOTO: (INSTAGRAM/vaibhav_sooryavanshi09))
वैभव हुए मालामाल. (PHOTO: (INSTAGRAM/vaibhav_sooryavanshi09))

अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में वैभव सूर्यवंशी को बल्ले से दमखम दिखाने का मौका नहीं मिला है. पहले टी20 में बड़ी तादाद में फैन्स वैभव सूर्यवंशी को खेलते हुए देखने पहुंचे थे. लेकिन पहले मैच की प्लेइंग इलेवन में उन्हें शामिल नहीं किया गया. 

वैभव सूर्यवंशी को भले ही खेलने का मौका नहीं मिला हो, लेकिन वह सुर्खियों में लगातार बने हुए हैं. महज 15 साल की उम्र में मैदान पर गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाले वैभव सूर्यवंशी कमाई के मामले में भी काफी आगे निकल रहे हैं.

बिहार के इस वंडर बॉय की ब्रांड वैल्यू इस कदर आसमान छू रही है कि वे एक दिन के विज्ञापन शूट के लिए करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक चार्ज कर रहे हैं. इतनी कम उम्र में इतना बड़ा कमर्शियल स्टार बनना भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बेहद कम देखने को मिला है, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे कई बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

सचिन से हो रही है वैभव की तुलना

वैभव की उम्र अभी केवल 15 साल है. कानूनी तौर पर देखा जाए तो वे न तो गाड़ी चला सकते हैं, न ही चुनाव में वोट डाल सकते हैं और न ही किसी कानूनी दस्तावेज पर खुद दस्तखत कर सकते हैं. आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें जो टाटा की एसयूवी कार मिली थी, उसे चलाने के लिए भी उन्हें अभी 3 साल इंतजार करना होगा. 

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10वीं की बोर्ड परीक्षा छोड़कर क्रिकेट पर दांव लगाने वाले वैभव आज सिर्फ एक दिन के शूट से उतनी कमाई कर लेते हैं, जितनी एक आम इंसान सालों में नहीं कमा पाता. हौलिहान लोकी की 2026 में छपी रिपोर्ट में तो उनकी तुलना शुरुआती दिनों के सचिन तेंदुलकर से कर दी गई है.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

वैभव पर कंपनियां क्यों लगा रही है दांव

लेकिन असली चिंता यह है कि क्या वैभव का करियर और पैसा सुरक्षित हाथों में है? नाबालिग होने के कारण वैभव खुद कोई बिजनेस डील साइन नहीं कर सकते, उनके सारे कॉन्ट्रैक्ट्स उनके अभिभावक यानी माता-पिता ही संभालते हैं. फिलहाल उनके पास कोई पेशेवर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट एजेंसी नहीं है. उनके पारिवारिक सदस्य और राजस्थान रॉयल्स की टीम ही मिलकर उनके कमर्शियल मामलों में मार्गदर्शन कर रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां आज वैभव पर उनके अगले 10 साल के भविष्य को देखते हुए बड़ा दांव लगा रही हैं. हालांकि, खतरा यह भी है कि पैसों और विज्ञापनों की इस चकाचौंध में कहीं इस युवा खिलाड़ी का क्रिकेट पीछे न छूट जाए. 

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