
थाईलैंड... इस देश की पहचान कभी अपने खूबसूरत समुद्र तटों, मंदिरों, जंगलों और समृद्ध संस्कृति के लिए थी. लेकिन समय के साथ इसके कुछ शहरों की एक अलग छवि भी बन गई. मसाज, नाइटलाइफ, अय्याशी और देह कारोबार से जुड़ी पहचान ने खासकर पटाया को दुनिया भर में चर्चा में ला दिया. लेकिन इस बदलाव की कहानी सिर्फ रात की चमक-दमक की नहीं है. इसके पीछे युद्ध, अमेरिकी सैनिक, डॉलर, गरीबी, गांवों से शहरों की ओर पलायन और तेजी से बढ़ती पर्यटन अर्थव्यवस्था की करीब सात दशक लंबी कहानी है.
286 दिन समुद्र में रहा जहाज, फिर पहुंचा पटाया
हाल की एक घटना ने अमेरिका और पटाया के इस पुराने कनेक्शन को फिर चर्चा में ला दिया. यूएसएस अब्राहम लिंकन करीब 5,000 अमेरिकी नाविकों और मरीन्स को लेकर थाईलैंड पहुंचा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जहाज करीब 286 दिनों तक समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड के लेम चाबांग पोर्ट पर पहुंचा था. पांच दिनों के पोर्ट विजिट के दौरान सैनिकों ने लंबे समय तक तैनाती के बाद पटाया और आसपास के इलाकों में समय बिताया. पटाया में अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौजूदगी ने शहर की नाइटलाइफ और मनोरंजन अर्थव्यवस्था को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया.लेकिन सवाल यह है कि अमेरिकी सैनिकों का पटाया से इतना पुराना रिश्ता आखिर बना कैसे?
आज का पटाया चमकती सड़कों, होटल, बार और मनोरंजन स्थलों के लिए जाना जाता है. लेकिन 1960 के दशक से पहले इसकी तस्वीर काफी अलग थी. यह एक छोटा-सा मछली पकड़ने वाला शहर था, जहां बैंकॉक से लोग मछली पकड़ने या कभी-कभार छुट्टियां मनाने आते थे.

फिर वियतनाम युद्ध ने कहानी बदल दी.
1960 के दशक में अमेरिका ने वियतनाम में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई. थाईलैंड रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण था. यहां अमेरिकी सैन्य अड्डे बने और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक पहुंचे.
युद्ध में लंबे समय तक तैनात रहने वाले सैनिकों के लिए कुछ दिनों के आराम और मनोरंजन की व्यवस्था की जाती थी. इसे आरएंडआर यानी रेस्ट एंड रिक्रिएशन कहा जाता था. 1967 के बाद थाईलैंड अमेरिकी सैनिकों के लिए ऐसे ब्रेक का बड़ा ठिकाना बन गया.बैंकॉक और खासकर पटाया में होटल, बार, नाइट क्लब, मसाज पार्लर और दूसरे मनोरंजन कारोबार तेजी से फैलने लगे.
सैनिकों की छुट्टी से बना नया बाजार
अमेरिकी सैनिकों के लिए थाईलैंड युद्ध से कुछ दिनों की दूरी और आराम की जगह था. लेकिन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए यह एक नए बाजार की शुरुआत थी. सैनिकों के साथ पैसा आया और उनके आसपास होटल, बार, मसाज सेंटर और मनोरंजन से जुड़े कई कारोबार खड़े होने लगे.
इसी मनोरंजन अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा देह कारोबार भी बना. हालांकि उस समय कानून की स्थिति अलग थी. थाईलैंड में इस गतिविधि पर कानूनी पाबंदियां थीं, लेकिन कई मनोरंजन स्थलों और वास्तविक कारोबार के बीच एक ऐसी स्थिति बन गई, जहां कानून और जमीन पर चल रही गतिविधियों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देने लगा.धीरे-धीरे पटाया की पहचान अमेरिकी सैनिकों की छुट्टियों, नाइटलाइफ और देह कारोबार से जुड़ने लगी.
सिर्फ विदेशियों की मांग की कहानी नहीं
लेकिन इस पूरी कहानी को केवल अमेरिकी सैनिकों या विदेशी पर्यटकों की मांग से समझना अधूरा होगा.थाईलैंड के उत्तर-पूर्वी इलाके ईशान में गरीबी, खेती पर निर्भरता और रोजगार के सीमित अवसर लंबे समय से बड़ी चुनौती थे. बेहतर कमाई की तलाश में लोगों का शहरों की ओर पलायन बढ़ा. महिलाओं का भी बैंकॉक और दूसरे शहरी केंद्रों की तरफ जाना इसी बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव का हिस्सा था.
इस तरह एक तरफ विदेशी ग्राहकों से मांग पैदा हुई, तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों की आर्थिक परेशानियों, रोजगार की तलाश और पलायन ने इस उभरती अर्थव्यवस्था को काम करने वाले लोग दिए.
यानी पटाया की कहानी सिर्फ अय्याशी की कहानी नहीं थी. इसके पीछे थाईलैंड के समाज और अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े बदलाव भी थे.
युद्ध खत्म हुआ, लेकिन असर नहीं
वियतनाम युद्ध खत्म हुआ और अमेरिकी सैनिक वापस चले गए. लेकिन उनके जाने के साथ पटाया की पूरी अर्थव्यवस्था खत्म नहीं हुई. होटल रह गए, बार रह गए, सड़कें और पर्यटन का इंफ्रास्ट्रक्चर रह गया.
अब ग्राहक सिर्फ अमेरिकी सैनिक नहीं थे. दुनिया के दूसरे हिस्सों से पर्यटक आने लगे. धीरे-धीरे थाईलैंड ने खुद को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के तौर पर स्थापित करना शुरू किया.
1970 के दशक तक विदेशी पर्यटकों की संख्या 10 लाख से ऊपर पहुंच गई. 1980 और 1990 के दशक में थाईलैंड की पर्यटन ब्रांडिंग और मजबूत हुई. समुद्र, मसाज, नाइटलाइफ, सस्ते होटल और दूसरे पर्यटन अनुभवों को एक साथ पेश किया जाने लगा.
इस तरह जो बाजार कभी सैनिकों की कुछ दिनों की छुट्टियों से जुड़ा था, वह धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन अर्थव्यवस्था का स्थायी हिस्सा बन गया.
इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों ने सीधे लोगों को इस काम में पहुंचाया. अध्ययन का महत्व इस बात में था कि कई दशक पहले मौजूद सैन्य ठिकानों से जुड़े आर्थिक और सामाजिक बदलावों के निशान बाद के वर्षों में भी कुछ इलाकों में दिखाई दे रहे थे.
यानी अमेरिकी सैनिक चले गए, लेकिन उनके दौर में बना आर्थिक तंत्र और पर्यटन का ढांचा लंबे समय तक अपना असर छोड़ता रहा.
फिर आया 1997 का आर्थिक संकट
1997 में एशियाई वित्तीय संकट ने थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दिया. देश की मुद्रा की कीमत गिर गई. इसका एक असर यह हुआ कि विदेशी पर्यटकों के लिए थाईलैंड पहले की तुलना में ज्यादा सस्ता हो गया.
अगले साल 1998 में अमेजिंग थाईलैंड अभियान शुरू हुआ. इसने दुनिया के सामने थाईलैंड को एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में पेश करने में अहम भूमिका निभाई.
इस समय तक थाईलैंड की पहचान सिर्फ सैनिकों के आरएंडआर ठिकाने की नहीं रही थी. वह पूरी दुनिया के पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय छुट्टी का गंतव्य बन चुका था.
कानून कुछ और, जमीन पर तस्वीर कुछ और
थाईलैंड में प्रोस्ट्यूशन कानूनन प्रतिबंधित है. इसके बावजूद दशकों में विकसित हुई नाइटलाइफ और पर्यटन अर्थव्यवस्था ने एक जटिल स्थिति पैदा कर दी. बार, मसाज पार्लर और मनोरंजन स्थलों से जुड़ी अर्थव्यवस्था कई पर्यटन क्षेत्रों में बड़ी होती गई.
इसके साथ मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार और नाबालिगों के शोषण जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आईं. इसलिए इस पूरी कहानी को सिर्फ रंगीन रातों या विदेशी पर्यटकों की मौज-मस्ती के रूप में देखना सही नहीं होगा.इसके पीछे गरीबी, मजबूरी, पलायन, आर्थिक असमानता और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल भी हैं.
पटाया की चमक के पीछे सात दशक की कहानी
आज पटाया की किसी चमकती सड़क पर रात में हजारों लाइटें दिखाई देती हैं. लेकिन उस चमक के पीछे सिर्फ नाइटलाइफ नहीं है. इसके पीछे वियतनाम युद्ध की परछाई है, अमेरिकी सैनिकों के डॉलर हैं, ग्रामीण इलाकों की गरीबी है, रोजगार की तलाश में शहरों की ओर हुआ पलायन है और पिछले करीब सात दशकों में बदलती हुई पर्यटन अर्थव्यवस्था है.