15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में सोमवार को ऐसी पारी खेली, जिसने एक बार फिर उनकी प्रतिभा की झलक दिखा दी. हालांकि वह शतक से महज 8 रन दूर रह गए. 92 रन पर आउट होने के बाद वैभव इतने निराश हुए कि उन्होंने गुस्से में बैट पटक दिया. स्टैंड्स में मुकाबला देख रहे पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और चयनकर्ता आरपी सिंह भी उनके विकेट पर हैरान नजर आए.
42 गेंद में फिफ्टी, रचा इतिहास
ईस्ट जोन की ओर से सेंट्रल जोन के खिलाफ पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव ने महज 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. इसके साथ ही वह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज बन गए.
27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव ने 15 साल और 157 दिन की उम्र में यह कारनामा किया. उन्होंने करीब छह दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ा. इससे पहले 1968-69 में सेंट्रल जोन के लक्ष्मण सिंह ने 16 साल और 23 दिन की उम्र में नॉर्थ जोन के खिलाफ 63 रन बनाकर यह रिकॉर्ड बनाया था.
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— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) August 31, 2026
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शुरुआत से ही गेंदबाजों पर हमला
सेंट्रल जोन को 266 रन पर समेटने के बाद ईस्ट जोन की पारी शुरू हुई तो वैभव ने पहले ही ओवर से अपना इरादा साफ कर दिया. उन्होंने शुरुआती ओवर में दो चौके लगाए और 14 गेंदों में 21 रन तक पहुंच गए. 21 गेंदों में उनके खाते में 31 रन थे.
12 ओवर के बाद वह 28 गेंदों में 40 रन बना चुके थे. इसी दौरान उन्हें जीवनदान भी मिला. उनका टॉप एज हवा में गया, लेकिन कैच पूरा नहीं हो सका. वैभव तो पवेलियन की तरफ चल भी पड़े थे, लेकिन कैच छूटने का पता चलते ही वापस क्रीज पर लौट आए.
इसके बाद उन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाया और 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया.
सिर्फ चौके-छक्के नहीं, रेड-बॉल की समझ भी दिखाई
इस पारी की खास बात सिर्फ वैभव का आक्रामक अंदाज नहीं था. उन्होंने कुछ मौकों पर गेंद को सम्मान दिया, डिफेंस किया, ग्राउंड शॉट खेले और स्ट्राइक भी रोटेट की. यानी टी20 क्रिकेट में तूफानी बल्लेबाजी के लिए मशहूर यह युवा बल्लेबाज रेड-बॉल क्रिकेट की जरूरतों को भी समझता हुआ नजर आया.
वैभव के लिए यह पारी इसलिए भी अहम है क्योंकि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड अब तक उतना प्रभावशाली नहीं रहा था. सेमीफाइनल से पहले उन्होंने 13 पारियों में 215 रन बनाए थे और उनका औसत 16.53 था. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका उच्चतम स्कोर 93 रन है, जो उन्होंने बिहार की ओर से मेघालय के खिलाफ बनाया था.
शतक से 8 रन पहले टूटा सपना
अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव रुके नहीं. वह तेजी से अपने पहले फर्स्ट क्लास शतक की ओर बढ़ रहे थे. लेकिन 92 रन के स्कोर पर उनकी पारी खत्म हो गई.
हर्ष दुबे की गेंद पर वैभव ने लेग साइड के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन डीप मिडविकेट पर कैच दे बैठे. आउट होने के बाद उनकी निराशा साफ दिखाई दी. पवेलियन लौटते वक्त उन्होंने गुस्से में अपना बैट पटक दिया.
उनका 92 रन दलीप ट्रॉफी में उनका उच्चतम स्कोर बन गया. साथ ही वह अपने फर्स्ट क्लास करियर के सर्वश्रेष्ठ 93 रन से सिर्फ एक रन दूर रह गए.
आरपी सिंह भी रह गए हैरान
वैभव के विकेट का असर स्टैंड्स में बैठे चयनकर्ताओं पर भी दिखाई दिया. पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और चयनकर्ता आरपी सिंह वैभव की बल्लेबाजी पर नजर रख रहे थे. जैसे ही 15 साल का यह बल्लेबाज 92 रन पर आउट हुआ, आरपी सिंह भी हैरान रह गए.
आरपी सिंह के अलावा अजय रात्रा और एसएस दास भी मुकाबला देख रहे थे. बीसीसीआई की नई यात्रा नीति के तहत दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट चरण के प्रत्येक मुकाबले में दो चयनकर्ताओं की मौजूदगी का प्रावधान किया गया है. ऐसे में वैभव की यह पारी चयनकर्ताओं की नजरों के सामने आई.
टेस्ट क्रिकेट के लिए बड़ा संकेत?
वैभव की पहचान अब तक मुख्य रूप से सफेद गेंद के क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजी और उम्र से जुड़े रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी की रही है. लेकिन दलीप ट्रॉफी की यह पारी उनके खेल का दूसरा पहलू दिखाती है.
सबसे कम उम्र में दलीप ट्रॉफी फिफ्टी का रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ 92 रन की पारी में उन्होंने धैर्य, डिफेंस और स्ट्राइक रोटेशन भी दिखाया. शतक भले ही 8 रन दूर रह गया, लेकिन यह पारी इस बात का संकेत जरूर दे गई कि वैभव अब रेड-बॉल क्रिकेट की चुनौती को भी तेजी से समझ रहे हैं.