भारत को टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव को जब इसी साल टूर्नामेंट के तुरंत बाद टीम से बाहर किया गया, तो उनके लिए भी यह फैसला किसी झटके से कम नहीं था. जुलाई 2024 में भारत की टी20 कप्तानी संभालने वाले सूर्यकुमार सूर्यकुमार ने इस दौरान एक भी टी20 सीरीज नहीं गंवाई थी. भारत ने उनके नेतृत्व में एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप भी जीता. इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए उनसे आगे निकलते हुए श्रेयस अय्यर को कप्तान बना दिया.
अब सूर्यकुमार यादव ने पहली बार खुलकर बताया है कि टीम से बाहर किए जाने के बाद उनके मन में क्या चल रहा था. उन्होंने माना कि शुरुआत में उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले को स्वीकार करने की कोशिश की, लेकिन कुछ समय बाद यही सवाल उन्हें भीतर से परेशान करने लगा- ‘ऐसा कैसे हो सकता है? यह संभव कैसे है?’
सूर्यकुमार ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा से बातचीत में कहा कि जब टीम की घोषणा हुई और उनका नाम उसमें नहीं था, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया मुस्कुराने की थी. उन्होंने कहा कि दबाव या मुश्किल हालात में भी वह मुस्कुराकर खुद को शांत रखने की कोशिश करते हैं.
उन्होंने कहा, 'जब मेरा नाम नहीं था तो मैं मुस्कुराया. पिछले एक-दो साल में जब भी मैं मुश्किल परिस्थितियों में रहा हूं या चीजें मेरे मुताबिक नहीं हुईं, मैंने हमेशा मुस्कुराने और खुद को शांत रखने की कोशिश की है. जो मौके मुझे मिले, उनके लिए मैं हमेशा आभारी रहा हूं.'
हालांकि, सूर्यकुमार ने माना कि 2026 की शुरुआत में उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि ऐसा फैसला उनके सामने आएगा. उन्हें लगा था कि वह अगले दो साल तक टीम को आगे ले जाएंगे. ओलंपिक और अगले टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े लक्ष्य उनके सामने थे.
उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा था कि 2026 के बाद मैं अगले दो साल तक इस टीम को आगे ले जाऊंगा. ओलंपिक आएगा, फिर एक और टी20 वर्ल्ड कप होगा और आगे कई चुनौतियां होंगी. लेकिन आप जो सोचते हैं और सामने वाला जो सोचता है, दोनों अलग हो सकते हैं. अगर चयनकर्ताओं को लगा कि आगे के लिए यही बेहतर फैसला है, तो उन्होंने वह फैसला लिया. मैंने उस पर प्रतिक्रिया नहीं दी.'
सूर्यकुमार ने श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाए जाने पर भी कोई सवाल नहीं उठाया. उन्होंने कहा कि वह श्रेयस को लंबे समय से जानते हैं और उनके अच्छे खिलाड़ी होने के साथ-साथ अच्छे इंसान और कप्तान होने पर भी उन्हें भरोसा है.
लेकिन असली परेशानी कुछ समय बाद शुरू हुई.
‘सोच रहा था- ऐसा कैसे हो सकता है?’
सूर्यकुमार ने स्वीकार किया कि चयनकर्ताओं के फैसले को समझने की कोशिश करने के बावजूद वह इस सवाल से बाहर नहीं निकल पा रहे थे कि आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी.
सूर्यकुमार ने कहा,'मैं थोड़ा निराश था. क्योंकि आपने दो साल में एक भी सीरीज नहीं हारी. आपने वर्ल्ड कप और एशिया कप जीता. फिर आप चाहते हैं कि वही चीज आगे भी जारी रहे. जब सब कुछ अच्छा चल रहा था तो बदलाव क्यों? बदलाव की वजह क्या थी? यही मेरे दिमाग में चलता रहता था.'
उन्होंने बताया कि टीम से बाहर किए जाने के बाद वह करीब डेढ़ महीने तक घर पर रहे और इसी सवाल पर सोचते रहे.
सूर्या कहते हैं, 'मैं सोच रहा था- यह कैसे हो सकता है? यह संभव कैसे है? हमने अभी वर्ल्ड कप जीता है. हां, आईपीएल उतना अच्छा नहीं गया जितना मैं चाहता था. लेकिन हम घर पर बैठे थे. दोस्त आए, परिवार आया. सबने कहा कि कोई बात नहीं, जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन जब सब घर से चले जाते हैं, तब आप घर पर अकेले रह जाते हैं.'
यही वह दौर था जब विश्व कप विजेता कप्तान को पहली बार अपने भविष्य को लेकर नए सिरे से सोचना पड़ा.
चयनकर्ताओं ने तीन दिन पहले दी थी खबर
सूर्यकुमार ने यह भी बताया कि टीम की घोषणा से करीब दो-तीन दिन पहले चयन समिति ने उनसे संपर्क किया था. उन्हें पहले ही बता दिया गया था कि इंग्लैंड सीरीज के लिए चुनी जाने वाली टीम में उनका नाम नहीं होगा.
सूर्यकुमार ने कहा, 'उन्होंने मुझे दो-तीन दिन पहले फोन किया था. उन्होंने कहा कि अब आगे बढ़ने का समय है. मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. क्योंकि यह मेरा फैसला नहीं था. जिसने भी यह फैसला लिया, उसने टीम के लिए इसे बेहतर समझकर लिया होगा. आपने फैसला लिया और मुझे बता दिया, इसमें कोई समस्या नहीं है.'
सूर्यकुमार का यह बयान उस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू सामने रखता है. एक तरफ चयनकर्ताओं के पास बल्लेबाजी में गिरते प्रदर्शन और भविष्य की टीम तैयार करने की वजह थी, तो दूसरी तरफ उनके नेतृत्व में भारतीय टी20 टीम का रिकॉर्ड असाधारण रहा था. यानी सवाल सिर्फ यह नहीं था कि सूर्यकुमार की जगह कौन लेगा, बल्कि यह भी था कि जिस कप्तान ने भारत को लगातार जीत दिलाई, उसे उसी जीत के दौर में टीम से बाहर क्यों कर दिया गया?
... अब सूर्यकुमार ने अपने दर्द और उलझन को शब्द दे दिए हैं.