क्रिकेट की दुनिया में कुछ खिलाड़ी अपने आंकड़ों से पहचान बनाते हैं, तो कुछ अपनी शैली और यादगार पलों से. साउथ अफ्रीका के पूर्व ऑलराउंडर लांस क्लूजनर भी उन खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्होंने मैदान पर कई यादगार पल दिए. तूफानी बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी और मैदान पर आक्रामक अंदाज के कारण वह अपने दौर के सबसे खतरनाक ऑलराउंडरों में गिने जाते थे. 'जुलू' के नाम से मशहूर क्लूजनर 4 सितंबर (शुक्रवार) को 55 साल के हो गए.
लांस क्लूजनर ने बतौर तेज गेंदबाज अपने करियर की शुरुआत की थी. नटाल के लिए खेलते समय उन्हें महान वेस्टइंडीज गेंदबाज मैल्कम मार्शल से काफी कुछ सीखने का मौका मिला. शुरुआती दिनों में उनकी गेंदबाजी का अंदाज बेहद आक्रामक था. उनका मानना था कि अगर स्टम्प्स को निशाना बनाना मुश्किल हो, तो बल्लेबाज के शरीर को निशाना बनाया जाए.
हालांकि 1998 में टखने की गंभीर चोट ने उनके करियर को नई दिशा दी. चोट के बाद लांस क्लूजनर को अपनी गति कम करनी पड़ी, जिसके बाद उन्होंने गेंदबाजी में कटर और दूसरी विविधताओं पर ज्यादा काम किया. यही बदलाव बाद में सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सबसे बड़ी ताकत बना.
भारत के खिलाफ डेब्यू पर चमके
लांस क्लूजनर ने 1996 में भारत के खिलाफ कोलकाता टेस्ट से इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा. पहली ही परीक्षा में उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा गया. क्लूजनर ने तब डेब्यू पर 8 विकेट लेकर साउथ अफ्रीका को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. भारत के खिलाफ उनका प्रदर्शन यहीं नहीं रुका. उन्होंने जनवरी 1997 केपटाउन टेस्ट में नाबाद 102 रनों की पारी खेलकर दिखाया कि वह सिर्फ गेंद से ही नहीं, बल्ले से भी मैच का रुख बदल सकते हैं.

1997 में पाकिस्तान में खेले गए विल्स क्वाड्रेंगुलर टूर्नामेंट में भी उनका जलवा देखने को मिला. श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने अर्धशतक के साथ 6 विकेट झटके. फाइनल में उसी टीम के खिलाफ 99 रन बनाने के अलावा एक विकेट भी लिया.
...फिर वर्ल्ड कप में मचाया तूफान
अगर लांस क्लूजनर के करियर का एक अध्याय सबसे ज्यादा चमकता है, तो वह 1999 का वर्ल्ड कप है. उनकी ताकतवर हिटिंग और तेज रन बनाने की क्षमता ने उन्हें टूर्नामेंट का सबसे खतरनाक बल्लेबाज बना दिया था. क्लूजनर ने उस वर्ल्ड कप में 281 रन बनाने के साथ-साथ 17 विकेट अपने नाम किए और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' अवॉर्ड जीता. वह टूर्नामेंट में चार मौकों पर 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी चुने गए.
साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच सेमीफाइनल उस टूर्नामेंट का सबसे यादगार मुकाबला बना. तब आखिरी ओवरों में साउथ अफ्रीका को लांस क्लूजनर से बड़ी उम्मीदें थीं. उन्होंने लगातार दो चौके लगाकर स्कोर बराबर कर दिया, लेकिन इसके बाद हुई गलतफहमी और रन आउट ने साउथ अफ्रीका को फाइनल में पहुंचने से रोक दिया. क्लूजनर और एलन डोनाल्ड का मैदान पर वह निराशाजनक पल आज भी क्रिकेट के सबसे दर्दनाक दृश्यों में शामिल है.
1999 के अंत में लांस क्लूजनर ने इंग्लैंड के खिलाफ पोर्ट एलिजाबेथ टेस्ट में अपने टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर बनाया. तब उन्होंने 174 रनों की शानदार पारी खेली. वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी भूमिका लगातार बदली. तेज गेंदबाजी करने की जगह छोटे रन-अप से कटर डालना शुरू किया. उनकी गेंदों में रफ्तार कम थी, लेकिन बल्लेबाजों के लिए उन्हें पढ़ना और उन पर रन बनाना आसान नहीं था.
2003 में साउथ अफ्रीका ने घरेलू मैदान पर वर्ल्ड कप खेला और लांस क्लूजनर की वापसी से टीम की उम्मीदें बढ़ गईं. लेकिन टूर्नामेंट का अंत बेहद निराशाजनक रहा. श्रीलंका के खिलाफ सुपर सिक्स के अहम मुकाबले में बारिश के कारण लक्ष्य की गणना डकवर्थ-लुईस नियम के तहत बदल गई. साउथ अफ्रीका को आखिरी गेंद पर जीत के लिए जिस लक्ष्य की जरूरत थी, उसे लेकर गलतफहमी हुई और टीम मैच जीतने से चूक गई. इसके साथ ही साउथ अफ्रीका का वर्ल्ड कप अभियान खत्म हो गया.
2003 के बाद लांस क्लूजनर का अंतरराष्ट्रीय करियर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ा. उन्होंने नॉर्थम्पटनशायर के लिए खेला और फिर प्रोफेशनल क्रिकेट से दूरी बनाकर कोचिंग को अपना अगला करियर बनाया. उन्होंने साउथ अफ्रीका की डॉल्फिन्स, जिम्बाब्वे, बांग्लादेश प्रीमियर लीग, अफगानिस्तान सहित कई टीम्स के साथ कोचिंग में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं.
क्लूजनर का ऐसा रहा इंटरनेशनल करियर
लांस क्लूजनर ने साउथ अफ्रीका के लिए 49 टेस्ट और 171 ओडीआई मुकाबले खेले. टेस्ट मैचों में उन्होंने 32.86 की औसत से 1906 रन बनाए, जिसमें 4 शतक और 8 अर्धशतक शामिल रहे. वहीं गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 37.91 के एवरेज से 80 विकेट झटके. वनडे इंटरनेशनल में क्लूजर के नाम पर 41.10 की औसत से 3576 रन दर्ज हैं. वनडे इंटरनेशनल में क्लूजनर ने 2 शतक और 19 अर्धशतक लगाए. क्लजूर ने वनडे इंटरनेशनल में जबरदस्त गेंदबाजी की, जहां उन्होंने 29.95 के एवरेज से 192 विकेट अपने नाम किए.
लांस क्लूजनर की अफ्रीकी भाषा 'जुलू' पर काफी पकड़ थी, जिसके चलते उन्हें इसी नाम से पुकारा जाने लगा. क्लूजनर की कहानी सिर्फ एक वर्ल्ड कप तक सीमित नहीं थी. भारत के खिलाफ डेब्यू टेस्ट में 8 विकेट से लेकर 174 रनों की टेस्ट पारी तक, क्लूजनर ने क्रिकेट के हर विभाग में अपनी अलग छाप छोड़ी.