रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून.
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून...
ये दोहा रहीम का है, जहां उन्होंने पानी को तीन अर्थों में प्रयुक्त किया है, यानी श्लेष अलंकर. पानी का पहला अर्थ मनुष्य के संदर्भ में 'विनम्रता' से है. मनुष्य में हमेशा विनम्रता (पानी) होना चाहिए. पानी का दूसरा अर्थ चमक से है जिसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं. तीसरा अर्थ जल से है जिसे आटे (चून) से जोड़कर बताया गया है.
रहीम का कहना है कि जिस तरह आटे के बिना संसार का अस्तित्व नहीं हो सकता, मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता है उसी तरह विनम्रता के बिना व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं हो सकता. मनुष्य को अपने व्यवहार में हमेशा विनम्रता रखनी चाहिए.
रहीम के इस दोहे के मायने आज भी हैं, इस दोहे को थोड़ा सा बदला जाए या इसे ट्विस्ट किया जाए तो एक लाइन बनती है: 'बिन बुमराह टीम इंडिया में सब सून'.
यह बात पूरी तरह से सटीक बैठती है. क्योंकि जब जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया में ना हों तो गेंदबाजी अटैक में एक सूनापन तो साफ तौर पर नजर आता है.
ऐसा कैसे?
तो आइए आपको इस बारे में समझाते हैं...
जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया के ऐसे गेंदबाज हैं, जो मुश्किल से मुश्किल हालात में भी मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं. पिच सपाट हो, बल्लेबाज आक्रामक अंदाज में खेल रहा हो या रन तेजी से बन रहे हों, बुमराह अपनी सटीक लाइन-लेंथ और अलग-अलग वैरिएशन से विरोधी टीम को परेशान कर देते हैं.
वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में भारतीय तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन इस चिंता को फिर सामने ले आया. गुरनूर बरार, आकिब नबी समेत दूसरे तेज गेंदबाज रन रोकने में जूझते नजर आए. वहीं, दूसरे टी20 इंटरनेशनल में 250 रन का विशाल स्कोर बनाने के बावजूद टीम इंडिया उसे बचा नहीं सकी. बल्लेबाजी में दम दिखाने के बाद गेंदबाज अहम मौके पर असर नहीं छोड़ पाए.
बुमराह के बिना आंकड़े भी दे रहे गवाही
भारतीय गेंदबाजी की यह परेशानी सिर्फ एक-दो मैचों तक सीमित नहीं है. इस साल टी20 इंटरनेशनल में बुमराह ने 17 मैचों में 23 विकेट लिए हैं. वह भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उनकी मौजूदगी में टीम ने 17 मैचों में कुल 128 विकेट लिए, जबकि गेंदबाजों का औसत 21.49 और इकोनॉमी रेट 8.62 रहा.
इसके उलट, बुमराह की गैरमौजूदगी वाले 16 मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने 90 विकेट लिए. इस दौरान गेंदबाजी का औसत बढ़कर 27.84 और इकोनॉमी रेट 9.16 हो गया.
वनडे में भी तस्वीर चिंताजनक है. इस साल बुमराह के बिना खेले गए 10 मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने 66 विकेट लिए, लेकिन उनका एवरेज 44.83 और इकोनॉमी रेट 6.43 रहा. ये आंकड़े सवाल खड़ा करते हैं कि क्या भारत का तेज गेंदबाजी आक्रमण एक ही गेंदबाज पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गया है?
अश्विन को भी सता रही भारतीय गेंदबाजी की चिंता
वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 में 250 रन का बचाव नहीं कर पाने के बाद पूर्व भारतीय स्पिनर आर अश्विन ने गेंदबाजी की क्वालिटी पर चिंता जताई. उनका मानना है कि देश में हाई लेवल के गेंदबाज तैयार करने पर पर्याप्त जोर नहीं दिया गया है.
उन्होंने कहा कि रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव जैसे कप्तानों को बुमराह के रूप में एक ऐसा गेंदबाज मिला, जो जरूरत पड़ने पर रनों पर लगाम लगा सकता है और धीमी गेंदों के जरिए बल्लेबाजों को चकमा दे सकता है. अश्विन के मुताबिक, हर गेंदबाज में ऐसी प्रतिभा नहीं होती और उन्हें भारतीय गेंदबाजी के भविष्य की चिंता है.
भरत अरुण ने बताई असली चुनौती
भारतीय तेज गेंदबाजी की इस समस्या को समझने के लिए 'इंडिया टुडे' ने टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण से बात की. उनके मुताबिक, इस चैलेंज के दो अहम पहलू हैं- वर्कलोड मैनेजमेंट और प्रेशर में अपनी स्किल का सही इस्तेमाल.
भारतीय तेज गेंदबाजों की इंजरी ने उनके फिटनेस मैनेजमेंट पर सवाल खड़े किए हैं. बुमराह खुद फिटनेस से जुड़ी परेशानियों का सामना कर चुके हैं. वहीं, हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे युवा तेज गेंदबाजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में संभालने के तरीके पर भी सवाल उठे हैं. चिंता यह रही है कि कहीं कुछ खिलाड़ी पूरी तरह फिट होने से पहले मैदान पर तो नहीं लौटे, जिसके बाद उन्हें दोबारा चोट का सामना करना पड़ा.
हालांकि, अरुण के मुताबिक वर्कलोड मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ गेंदबाजों को मैचों से दूर रखना नहीं है. जरूरी यह है कि जब भी वे खेलें, पूरी तरह तैयार और फिट हों.
अरुण ने कहा कि इसमें फिजियो, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच, गेंदबाजी कोच और टीम मैनेजमेंट की अहम भूमिका होती है. सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गेंदबाज मैच में उतरते समय पूरी तरह तैयार और तेज हों.
प्रतिभा की कमी नहीं, उसे संभालने की जरूरत
अरुण ने भारतीय तेज गेंदबाजी में प्रतिभा की कमी की बात से सहमति नहीं जताई. उन्होंने जहीर खान, आशीष नेहरा, वेंकटेश प्रसाद, जवागल श्रीनाथ और इरफान पठान जैसे गेंदबाजों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में हमेशा अच्छे तेज गेंदबाज रहे हैं.
उनके मुताबिक, तेज गेंदबाज की स्किल में फिटनेस की अहम भूमिका होती है और उसे लंबे समय तक फिट रखना टीम के लिए बड़ी चुनौती है. यानी समस्या सिर्फ नए गेंदबाज तैयार करने की नहीं, बल्कि उनकी फिटनेस बनाए रखने और उनसे लगातार बेहतर प्रदर्शन कराने की भी है.
वर्ल्ड कप से पहले भारत को ढूंढना होगा ऑप्शन
भारत के पास अर्शदीप सिंह जैसे प्रभावी गेंदबाज हैं, लेकिन मजबूत गेंदबाजी आक्रमण बनाने के लिए कुछ अच्छे नामों का होना ही काफी नहीं है. बाकी तेज गेंदबाजों को भी जिम्मेदारी उठानी होगी, ताकि बुमराह पर निर्भरता कम हो सके.
अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है. प्रतिभा मौजूद है, लेकिन उसे फिट, उपलब्ध और दबाव में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तैयार करना होगा.