एशियन गेम्स 2026 में भारत की पिंकी बलहारा ने कुराश में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के खाते में एक और पदक जोड़ दिया है. पिंकी ने विमेंस -78 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया है.
सेमीफाइनल में उन्हें साउथ कोरिया की मो सुमिन के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा. सेमीफाइनल में हार के बाद उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा. पिंकी बलहारा का ये एशियन गेम्स में लगातार दूसरा सिल्वर मेडल रहा. पिंकी के पदक जीतने के बाद कुराश एक बार फिर चर्चा में है. ऐसे में सवाल है कि आखिर कुराश क्या होता है और यह खेल कैसे खेला जाता है?
क्या है कुराश?
कुराश मध्य एशिया की एक पारंपरिक मार्शल आर्ट और जैकेट रेसलिंग का रूप है. इसकी जड़ें आधुनिक उज्बेकिस्तान के क्षेत्र में मानी जाती हैं. यह एक ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ी खड़े रहकर अपने प्रतिद्वंद्वी को दांव लगाकर मैट पर गिराने की कोशिश करता है.
यह भी पढ़ें: DRS को लेकर कप्तान बावुमा से भिड़ गए क्विंटन डिकॉक, याद आया पुराना विवाद, VIDEO
कुराश को दुनिया की प्राचीन मार्शल आर्ट्स में शामिल किया जाता है और इंटरनेशनल कुराश एसोसिएशन के अनुसार इसकी परंपरा करीब 3,500 साल पुरानी मानी जाती है. पुराने समय में इसका इस्तेमाल सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों में भी होता था.

कुश्ती से कितना अलग है कुराश?
कुराश देखने में कुश्ती जैसा जरूर लगता है, लेकिन इसके नियम काफी अलग हैं. सबसे बड़ा अंतर यह है कि इसमें ग्राउंड फाइट नहीं होती. मुकाबला खड़े होकर ही खेला जाता है.
खिलाड़ी एक-दूसरे की जैकेट पकड़कर अलग-अलग तकनीकों से थ्रो लगाने की कोशिश करते हैं. जैसे ही कोई खिलाड़ी मैट पर गिरता है, एक्शन रोक दिया जाता है और मुकाबला फिर खड़े होकर शुरू होता है.
यह भी पढ़ें: 18 साल में टेस्ट डेब्यू, लंच से पहले शतक… पाकिस्तान के इस धुरंधर की बल्लेबाजी थी सबसे अलग
A bronze for India. A place in history! 🥉🇮🇳
— Olympic Khel ™ (@OlympicKhel) September 28, 2026
Pincky Balhara becomes the first Indian to win multiple Asian Games medals in Kurash, bringing home India's third-ever medal in the sport! 👏🔥#AichiNagoya2026 #AsianGames pic.twitter.com/ncRgBUUVRu
कैसे मिलते हैं अंक?
कुराश में विरोधी को गिराने के तरीके और थ्रो की गुणवत्ता के आधार पर अंक मिलते हैं. इसमें तीन प्रमुख स्कोरिंग टर्म इस्तेमाल किए जाते हैं.
खलोल (Halal/Khalol): सबसे प्रभावी थ्रो, जिसमें खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को पूरी तरह नियंत्रित करते हुए पीठ के बल गिराता है.
योंबोश (Yonbosh): यह भी प्रभावी थ्रो होता है, लेकिन खलोल की तुलना में इसमें नियंत्रण, ताकत या लैंडिंग में कुछ कमी रह जाती है.
चाला (Chala): ऐसा थ्रो जो प्रभावी तो होता है, लेकिन योंबोश के स्तर तक नहीं पहुंचता.
यह भी पढ़ें: IND vs WI: विराट कोहली पर कप्तान गिल का बरसा प्यार, मैच के बाद सरेआम कही दिल की बात
कौन से दांव प्रतिबंधित हैं?
कुराश में खिलाड़ी मुक्का या किक नहीं मार सकते. इसके अलावा गला दबाना, दर्द देने वाले लॉक या होल्ड लगाना और बेल्ट के नीचे पकड़ना भी प्रतिबंधित है. यानी इस खेल में सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि सही टाइमिंग, पकड़ और थ्रो की तकनीक बेहद महत्वपूर्ण होती है.
इंटरनेशनल लेवल पर कैसे पहुंचा कुराश?
कुराश को आधुनिक इंटरनेशनल खेल के रूप में विकसित करने के लिए International Kurash Association (IKA) की स्थापना 1998 में हुई थी. इसके बाद इस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिला और कुराश एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच का हिस्सा बना. अब एशियन गेम्स 2026 में पिंकी बलहारा के कांस्य पदक ने भारत में भी इस पारंपरिक खेल को चर्चा में ला दिया है.