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भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, लॉन्च पैड पर पहुंचा विक्रम-1 रॉकेट

विक्रम-1 के लॉन्च पैड तक पहुंचने के साथ भारत की प्राइवेट अंतरिक्ष कंपनियों की क्षमताओं और स्पेस सेक्टर में बढ़ती भागीदारी की नई तस्वीर सामने आई है.

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बाएं से- पहले लॉन्च पैड पर खड़ा विक्रम-1 रॉकेट और खड़े होते समय उसे देखती स्काईरूट की टीम. (Photo: Skyroot)
बाएं से- पहले लॉन्च पैड पर खड़ा विक्रम-1 रॉकेट और खड़े होते समय उसे देखती स्काईरूट की टीम. (Photo: Skyroot)

हैदराबाद की प्राइवेट अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने विक्रम-1 रॉकेट के पहले चरण (स्टेज-1) को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के फर्स्ट लॉन्च पैड पर स्थापित कर दिया है. यह भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार कोई पूरी तरह प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च पैड तक पहुंचा है. कंपनी इस रॉकेट को जून-जुलाई के दौरान लॉन्च करने की तैयारी कर रही है.

विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1: मिशन आगमन की घोषणा

  • भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च होने जा रहा है.
  • सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
  • 450 किलोमीटर ऊंचाई, 60 डिग्री झुकाव, निचली पृथ्वी कक्षा
  • लॉन्च विंडो: 12 जुलाई – 4 अगस्त 2026

रॉकेट अब भारत के ऐतिहासिक फर्स्ट लॉन्च पैड (FLP) पर पूरी तरह तैयार और स्टैक्ड हो चुका है.

Vikram-1 Rocket Skyroot Aerospace

विक्रम-1 करीब 20 मीटर लंबा रॉकेट है. इसे कार्बन कंपोजिट से बनाया गया है, जिससे इसका वजन कम और मजबूती ज्यादा रहती है. यह रॉकेट लो अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट भेज सकता है. इसमें कुल चार स्टेज हैं, जिनमें अलग-अलग तरह के इंजन लगाए गए हैं, ताकि रॉकेट सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचा सके.

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में हुई थी. कंपनी ने नवंबर 2022 में विक्रम-एस नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था. यह भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट लॉन्च था. अब कंपनी विक्रम-1 के जरिए छोटे सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में भेजने की तैयारी कर रही है.

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विक्रम-1 का लॉन्च भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है. यह पहली बार है जब किसी पूरी तरह निजी भारतीय ऑर्बिटल रॉकेट ने लॉन्च पैड तक पहुंचने का चरण पूरा किया है. इससे साफ है कि अब प्राइवेट कंपनियां भी रॉकेट लॉन्च करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं.

हाल के वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों के बाद प्राइवेट  कंपनियों को इसरो की लॉन्च और टेस्टिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली है. इससे भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स को अपने रॉकेट तैयार करने और लॉन्च करने का मौका मिला है.

कंपनी की प्लानिंग विक्रम-1 को जून-जुलाई के दौरान लॉन्च करने की है. अगर यह मिशन सफल रहता है, तो भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को बड़ी मजबूती मिलेगी और छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने के क्षेत्र में देश की क्षमता भी बढ़ेगी.

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