सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित एक रॉकेट लॉन्च सेंटर (Spaceport) है. यह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित है. श्रीहरिकोटा (Sriharikota) रेंज का नाम 2002 में इसरो के पूर्व अध्यक्ष सतीश धवन (Satish Dhawan) के नाम पर रखा गया था.
श्रीहरिकोटा द्वीप को 1969 में उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र के लिए चुना गया था. केंद्र 1971 में चालू हुआ जब एक RH-125 साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किया गया. उपग्रह प्रक्षेपण यान पर सवार एक कक्षीय उपग्रह, रोहिणी 1ए के प्रक्षेपण का पहला प्रयास 10 अगस्त 1979 को हुआ, लेकिन रॉकेट के दूसरे चरण के थ्रस्ट वेक्टरिंग में विफलता के कारण, उपग्रह की कक्षा 19 अगस्त 1979 को क्षीण हो गई. इसरो के पूर्व अध्यक्ष सतीश धवन (former Chairman of the ISRO) की स्मृति में 5 सितंबर 2002 को शार का नाम 'सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार' (Satish Dhawan Space Centre SHAR, SDSC) रखा गया.
शार सुविधा में अब दो लॉन्च पैड शामिल हैं, दूसरा 2005 में बनाया गया था. दूसरा लॉन्च पैड 2005 में लॉन्च करने के लिए इस्तेमाल किया गया था और यह एक सार्वभौमिक लॉन्च पैड है, जो इसरो द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी लॉन्च वाहनों को समायोजित करता है (two Launch pads)
इसरो का PSLV-C62 मिशन 12 जनवरी 2026 को फेल हो गया. चार स्टेज का रॉकेट 90% सही काम करता है, फिर फेल हो जाता है. तीसरे स्टेज में रोल रेट डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ डिस्टर्ब होने के कारण 16 सैटेलाइट्स (अन्वेषा सहित) सही ऑर्बिट में नहीं पहुंचे. यह लगातार दूसरी असफलता (C61 के बाद) है, जिससे ISRO, DRDO, NSIL और देश को 500-800 करोड़ रुपये का वित्तीय व इज्जत को बड़ा झटका लगा है.
इसरो की PSLV-C62 मिशन फेल हो चुका है. रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ. लेकिन तीसरे स्टेज के बाद आंकड़ा देरी से मिलने लगा. चौथा स्टेज शुरू तो हुआ लेकिन उसके बाद कोई अपडेट नहीं मिला. मिशन कंट्रोल सेंटर में सन्नाटा पसर गया. बाद में इसरो चीफ ने बताया कि तीसरे स्टेज में गड़बड़ हुई थी. रॉकेट दिशा बदल चुका था. इसलिए सभी सैटेलाइट अंतरिक्ष में खो गए. उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
ISRO PSLV-C62 Launch LIVE Updates: इसरो की अन्वेषा सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल हो गई है. तीसरे स्टेज के बाद रॉकेट ने दिशा बदली. चौथा स्टेज नहीं शुरू हो पाया, जिसके कारण सैटेलाइट सेपरेट नहीं हुआ. सारे पेलोड अंतरिक्ष में खो गए.
PSLV C62 Mission Launch: कल 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे ISRO श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च करेगा. मुख्य पेलोड DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान और पर्यावरण मॉनिटरिंग में क्रांति लाएगा. साथ में 18 सह-यात्री सैटेलाइट्स भी जाएंगे. यह 2025 की असफलता के बाद PSLV का महत्वपूर्ण कमबैक है.
PSLV को ISRO का वर्कहॉर्स कहा जाता है क्योंकि यह 1993 से विश्वसनीयता और मल्टी-सैटेलाइट लॉन्च में माहिर है. अब तक 63 उड़ानें हुई हैं, 60 सफल रही हैं. अगला लॉन्च PSLV-C62 से 12 जनवरी 2026 को EOS-N1 (Anvesha) सैटेलाइट का होगा. भविष्य में प्राइवेट सेक्टर इसे संभालेगा और यह लंबे समय तक मुख्य रॉकेट बना रहेगा.
इसरो 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 से डीआरडीओ की हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट अन्वेषा (EOS-N1) लॉन्च करेगा. यह छिपे हुए वाहन, हथियार और सैनिकों को स्पेक्ट्रल सिग्नेचर से पहचानकर भारतीय सेना की मदद करेगा. पाकिस्तान-चीन सीमाओं पर घुसपैठ और नक्सली इलाकों में छिपी गतिविधियां ट्रैक करने में उपयोगी साबित होगा.
इसरो 2026 की पहली लॉन्चिंग 12 जनवरी को PSLV-C62 मिशन से करेगा. श्रीहरिकोटा से सुबह 10:17 बजे उड़ान होगी. मुख्य सैटेलाइट DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) रक्षा के लिए होगा. स्पेन का KID प्रोब और 17 अन्य कॉमर्शियल पेलोड्स भी हैं.
ISRO का LVM3-M6 मिशन आज अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल की ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में लॉन्च सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. यह दुनिया का सबसे बड़ा कॉमर्शियल संचार सैटेलाइट है, जो सामान्य स्मार्टफोन को स्पेस से सीधे हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड देगा. LVM3 का यह छठा ऑपरेशनल मिशन है और अब तक का सबसे भारी पेलोड.
मौसम ने साथ नहीं दिया, लेकिन LVM3 ने फिर चमत्कार कर दिखाया. 2 नवंबर 2025 को ISRO ने श्रीहरिकोटा से CMS-03 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया. 4410 किग्रा वजनी भारत का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट नौसेना के लिए हिंद महासागर में सुरक्षित संचार व निगरानी मजबूत करेगा. ISRO चीफ वी. नारायणन बोले कि हमारा स्पेस सेक्टर ऊंचाइयों को छू रहा है, नौसेना को नई ताकत मिलेगी.
ISRO ने भारतीय नौसेना के लिए CMS-03 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. अब नौसेना बेहतर संचार कर सकेगी. दुश्मन के इलाकों पर नजर रख सकेगी. यह भारत का अब तक सबसे भारी सैटेलाइट है. इसे इसरो ने अपने बाहुबली रॉकेट LVM3-M5 से लॉन्च किया है. देसी तकनीक से बना यह नौसेना के जहाजों, विमानों व पनडुब्बियों को जोड़ेगा.
2 नवंबर 2025 को ISRO का LVM3 रॉकेट 4400 किलो का CMS-03 संचार उपग्रह लॉन्च करेगा. यह भारत का सबसे भारी संचार सैटेलाइट है, जो नौसेना को समुद्री इलाकों में सुरक्षित संचार देगा. ऑपरेशन सिंदूर के सबक से सीख कर यह वायुसेना-नौसेना समन्वय मजबूत करेगा, हिंद महासागर की निगरानी बढ़ाएगा. सफलता से भारत की सैन्य क्षमता नई ऊंचाई छुएगी.
Chandrayaan-3 का चांद पर सफलतापूर्वक पहुंचाने वाले रॉकेट LVM3 से इसरो फिर एक लॉन्च की तैयारी कर रहा है. 2 नवंबर 2025 को देश का सबसे भारी सैटेलाइट CMS-03 लॉन्च किया जाएगा. इसका वजन 4400 किलोग्राम है. यह भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया सैटेलाइट है. भारत के समुद्री इलाकों पर नजर रखेगा.
पाकिस्तान 2026 में पहला एस्ट्रोनॉट भेजने की तैयारी कर रहा है, जो चीन की मदद से हो रहा है. लेकिन पाक स्पेस एजेंसी SUPARCO की शुरुआत से अब तक प्रगति धीमी रही, क्योंकि फंड और स्वतंत्रता की कमी है. ISRO ने चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान जैसे कदमों से दुनिया में नाम कमाया है.
NISAR की सफल लॉन्चिंग भारत और दुनिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह सैटेलाइट कामचटका जैसे भूकंप और सुनामी की पहले से खबर देकर लाखों जिंदगियां बचा सकता है. इसके दोहरे रडार, हर मौसम में काम करने की क्षमता और मुफ्त डेटा नीति इसे अनोखा बनाती है. भारत के लिए यह आपदा प्रबंधन, कृषि और जल प्रबंधन में गेम-चेंजर होगा.
NISAR धरती की निगरानी का सुपरहीरो है. ये भूकंप, बाढ़, हिमनद पिघलने और फसलों पर नजर रखेगा. किसानों को फसल की जानकारी, वैज्ञानिकों को डेटा और आपदा राहतकों को अलर्ट देगा. ISRO और NASA की साझेदारी भारत की अंतरिक्ष ताकत और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है. 30 जुलाई 2025 को GSLV-F16 के साथ लॉन्च होने वाला ये सैटेलाइट भारत को आपदा प्रबंधन, कृषि और जलवायु परिवर्तन में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
NASA-ISRO का निसार मिशन 30 जुलाई को लॉन्च होने को तैयार है. यह सैटेलाइट नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं की सबसे पहले जानकारी देने वाला जासूस होगा. ये अंतरिक्ष से ही भूकंपों, ज्वालामुखी विस्फोट और भूस्खलन जैसी आपदाओं का अलर्ट पहले ही दे देगा. ताकि हजारों-लाखों लोगों की जान बचाई जा सके.
ISRO के पीएसएलवी रॉकेट का तीसरा लॉन्च 18 मई 2025 को असफल रहा. तीसरे चरण में केव्लार कवर के फटने और फ्लेक्स नोजल की खराबी की जांच चल रही है. यह पीएसएलवी की तीसरी असफलता है, जिसकी सफलता दर 94.44% है. इसरो के कुल 97 लॉन्च में 86.08% सफल रहे.
ISRO 18 मई 2025 को PSLV-C61/EOS-09 मिशन लॉन्च करने जा रहा है. ये इसरो की 101वां लॉन्च होगा. EOS-09 की लॉन्चिंग भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा. इसका एक टाइमलैप्स वीडियो आया है जो इस मिशन की तैयारियों को दिखाता है.
ISRO 18 जून को EOS-09 उपग्रह का प्रक्षेपण करेदा. यह उपग्रह न केवल रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में देश की क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा.
ISRO श्रीहरिकोटा से 100वें लॉन्च का 27 घंटे का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. 29 जनवरी 2025 सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से NVS-02 मिशन की लॉन्चिंग होगी. नाविक सैटेलाइट सीरीज का दूसरा उपग्रह है. इसे GSLV-F15 रॉकेट से छोड़ा जाएगा.
ISRO श्रीहरिकोटा से 100वां लॉन्च करने जा रहा है. यह लॉन्च 29 जनवरी 2025 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से होगा. यह नाविक सैटेलाइट सीरीज का दूसरा उपग्रह है. इसे GSLV-F15 रॉकेट से छोड़ा जाएगा.