Hanuman Ansh: कैंची धाम के नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी अलौकिक महिमा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाल मचा रही है. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने लोगों का दिल जीत लिया है. हनुमान अंश फिल्म में शोभिनव सत्या नीम करौली बाबा के किरदार में नजर आ रहे हैं. यह फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी.
नीम करौली बाबा भारत के महान संतों में से एक थे, जिन्हें भक्त बजरंगबली हनुमान जी का अवतार मानते हैं. उन्होंने अपने जीवनकाल में 100 से ज्यादा हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया था, जिसमें उत्तराखंड का प्रसिद्ध कैंची धाम भी शामिल है. कहा जाता है कि नीम करौली बाबा ने अपने जीवन काल में कई चमत्कार किए थे, जिनके पीछे का रहस्य आजतक कोई नहीं जान पाया है. उन्हीं में से एक था ट्रेन रोकने और चलाने का चमत्कार, जहां से उनका नाम नीम करौली पड़ा था. तो चलिए विस्तार से जानते हैं उस चमत्कार के बारे में.
कैसे महाराज जी बने थे नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा के नाम के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी बताई जाती है. बाबा का असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था, लेकिन बाद में वे नीम करौली बाबा या बाबा नीब करौरी के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए. लेखक रामदास की चर्चित किताब 'Miracle of Love' में भी उनके नाम से जुड़ी एक रोचक घटना का जिक्र मिलता है.
बिना टिकट ट्रेन में सवार हुए थे बाबा
किताब में वर्णित कहानी के अनुसार, एक बार युवा अवस्था में बाबा लक्ष्मण नारायण शर्मा यात्रा के दौरान बिना टिकट ट्रेन में सवार हो गए थे. बताया जाता है कि वे ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठे थे. जब टीटी को पता चला कि उनके पास टिकट नहीं है, तो उनसे ट्रेन से उतरने के लिए कहा गया. आखिरकार बाबा के पास टिकट न होने के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नीब करौरी गांव के पास ट्रेन से उतार दिया गया. उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि इसके बाद एक ऐसी घटना होगी, जो बाबा की पहचान से हमेशा के लिए जुड़ जाएगी.
बाबा के उतरते ही नहीं चली ट्रेन
बताया जाता है कि बाबा के ट्रेन से उतरने के बाद जब ट्रेन को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, तो वह अपनी जगह से नहीं हिली. रेलवे कर्मचारियों ने इंजन को चलाने के कई प्रयास किए, लेकिन ट्रेन शुरू नहीं हो सकी. काफी देर तक अधिकारी और कर्मचारी इस समस्या का कारण समझने की कोशिश करते रहे. यात्रियों के लिए भी यह घटना हैरान करने वाली थी, क्योंकि तकनीकी प्रयासों के बावजूद ट्रेन आगे नहीं बढ़ रही थी.
जब ट्रेन के ना चलने की वजह तलाश की जाने लगी, तो मामले की जानकारी रेलवे के अधिकारियों तक पहुंची. जांच के दौरान टीटी ने बताया कि कुछ समय पहले एक साधु को बिना टिकट यात्रा करने के कारण ट्रेन से उतारा गया था. इसके बाद अधिकारियों ने बाबा को तलाश करने का फैसला किया. जब उन्हें बाबा के बारे में पता चला, तो रेलवे के अधिकारी उनके पास पहुंचे और उनसे दोबारा ट्रेन में बैठने का आग्रह किया.
अधिकारियों के आग्रह पर फिर ट्रेन में बैठे बाबा
बताया जाता है कि अधिकारियों ने बाबा से बार-बार ट्रेन में वापस आने की विनती की. काफी आग्रह के बाद बाबा मुस्कुराते हुए दोबारा ट्रेन में सवार होने के लिए तैयार हो गए. भक्तों की मान्यता के अनुसार, जैसे ही बाबा वापस ट्रेन में बैठे, ट्रेन चल पड़ी. इस घटना को वहां मौजूद लोगों ने असाधारण माना और धीरे-धीरे इसकी चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी.
ऐसे पड़ा नीब करौरी बाबा नाम
इस घटना के बाद बाबा का नाम उस स्थान से जुड़ गया, जहां उन्हें ट्रेन से उतारा गया था. बाद में वे कुछ समय तक नीब करौरी गांव में भी रहे. इसी वजह से लोग उन्हें नीब करौरी बाबा कहने लगे, जो आगे चलकर नीम करौली बाबा के रूप में प्रसिद्ध हो गया. बताया जाता है कि इस घटना के बाद बाबा की इच्छा के अनुसार उस क्षेत्र में रेलवे स्टेशन बनाए जाने की बात भी सामने आई. धीरे-धीरे नीब करौरी बाबा की ख्याति एक ऐसे संत के रूप में फैलती गई, जिनके जीवन से जुड़ी कई कथाएं और चमत्कार आज भी उनके भक्तों के बीच गहरी आस्था का विषय हैं.