1 सितंबर 1969 को 27 साल के लीबियाई सेना के कप्तान मुअम्मर अल-गद्दाफी ने लीबिया में एक सफल तख्तापलट किया. वहां के राजा इदरीस-1 को हटाकर सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली. गद्दाफी को लीबिया के नए शासी निकाय, क्रांतिकारी कमान परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. राजा इदरीस जब देश से बाहर था. तब उसने बिना रक्तपात के तख्तापलट करके इदरीस की सरकार को गिरा दिया.
गद्दाफी का जन्म 1942 में लीबिया के रेगिस्तान में एक तंबू में हुआ था. वह एक खानाबदोश किसान का बेटा था. वह एक प्रतिभाशाली छात्र था. उसने 1963 में लीबिया विश्वविद्यालय से और 1965 में बेनगाजी स्थित लीबियाई सैन्य अकादमी से ग्रेजुएशन किया.
वह एक कट्टर अरब राष्ट्रवादी था. उसने अपने कुछ साथी अधिकारियों के साथ मिलकर राजा इदरीस को सत्ता से हटाने की योजना बनाई. इदरीस को रूढ़िवादी अरब देशों के बीच अधिक राजनीतिक एकता के आंदोलन के प्रति उदासीन माना जाता था. 1969 में जब गद्दाफी कप्तान के पद पर पहुंचे. तब तक क्रांतिकारी हमले के लिए तैयार थे.
गद्दाफी ने राजा इदरीस के देश से बाहर जाने का इंतजार किया. वे तुर्की के एक स्पा में पैर की बीमारी का इलाज करा रहे थे. तब बिना रक्तपात के तख्तापलट करके गद्दाफी ने उनकी सरकार को गिरा दिया.राजशाही समाप्त कर दी गई. इदरीस तुर्की से ग्रीस गए. फिर मिस्र में शरण ली. 1983 में काहिरा में उनका निधन हो गया.
इस्लामी रूढ़िवादिता, क्रांतिकारी समाजवाद और अरब राष्ट्रवाद के मिश्रण से गद्दाफी ने लीबिया में पश्चिमी विरोधी तानाशाही स्थापित की. 1970 में उन्होंने अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य अड्डे हटा दिए और इतालवी और यहूदी लीबियाई लोगों को निष्कासित कर दिया.
1973 में उसने विदेशी स्वामित्व वाले तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया. उसने शराब और जुए पर प्रतिबंध जैसे पारंपरिक इस्लामी कानूनों को फिर से लागू कर दिया. लेकिन, महिलाओं को आजादी दी और सामाजिक कार्यक्रम शुरू किए जिनसे लीबिया में जीवन स्तर में सुधार हुआ.
गद्दाफी की सरकार ने विश्वभर में कई आतंकवादी समूहों को वित्तीय सहायता प्रदान की. इनमें फिलिस्तीनी गुरिल्ला और फिलीपीन मुस्लिम विद्रोही तथा आयरिश रिपब्लिकन आर्मी शामिल थे. 1980 के दशक में, पश्चिमी देशों ने यूरोप में हुए कई आतंकवादी हमलों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया. अप्रैल 1986 में पश्चिमी जर्मनी के एक डांस हॉल पर हुए बम हमले के प्रतिशोध में अमेरिकी युद्धक विमानों ने त्रिपोली पर बमबारी की.
फरवरी 2011 में, जब अरब जगत के अधिकांश हिस्सों में अशांति फैल गई. तब गद्दाफी शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों ने क्रांतिकारियों और वफादारों के बीच गृहयुद्ध को जन्म दिया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने गद्दाफी के गढ़ों पर हवाई हमले शुरू किए. 20 अक्तूबर को गद्दाफी को विद्रोहियों ने पकड़ लिया और मार डाला.