रामायण के महायुद्ध का जब जिक्र होता है तो भगवान राम की वानर सेना और कुछ शक्तिशाली योद्धाओं का नाम सबसे ऊपर आता है. इनमें हनुमान, अंगद, सुग्रीव, जामवंत, नल और नील कुछ प्रमुख नाम है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रावण की सेना में कितने पराक्रमी और ताकतवर राक्षस थे. गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में रावण के कुछ प्रमुख योद्धाओं का उल्लेख किया है. आइए रावण की सेना के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं के बारे में जानते हैं.
1. कुंभकर्ण
कुंभकर्ण रावण का छोटा भाई था. रामायण में उसे विशाल शरीर और अपार शारीरिक बल वाला योद्धा बताया गया है. उसकी शक्ति इतनी अधिक थी कि युद्ध में उसका सामना करना आसान नहीं था. कुंभकर्ण के बारे में गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस में लिखते हैं-
श्लोक
अतिबल कुंभकरन अस भ्राता।
जेहि कहुँ नहिं प्रतिभट जग जाता।।
करइ पान सोवइ षट मासा।
जागत होइ तिहुँ पुर त्रासा।।
अर्थ
इन चौपाइयों में कुंभकर्ण के असाधारण बल का वर्णन किया गया है. तुलसीदास के अनुसार, उसका मुकाबला करने वाला कोई योद्धा नहीं था. वह छह महीने तक सोता था और उसके जागने पर तीनों लोकों में भय पैदा कर देता था. रामायण की कथा में कुंभकर्ण को रावण की सेना के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में गिना जाता है. युद्ध के दौरान उसने वानर सेना को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन अंततः भगवान श्रीराम ने उसका वध कर दिया.
2. मेघनाद
मेघनाद रावण का बड़ा पुत्र था. उसे इंद्रजीत के नाम से भी जाना जाता है. उसने देवराज इंद्र को युद्ध में पराजित किया था, जिसके बाद उसे इंद्रजीत की उपाधि मिली. वह दिव्य अस्त्र और युद्ध में बड़ा माहिर था. तुलसीदास ने रामचरितमानस में उसके पराक्रम का वर्णन करते हुए लिखा है-
श्लोक-
बारिदनाद जेठ सुत तासू।
भट महुं प्रथम लीक जग जासू।।
जेहि न होइ रन सनमुख कोई।
सुरपुर नितहिं परावन होई।।
अर्थ
मेघनाद रावण का ज्येष्ठ पुत्र और महान योद्धा था. उसकी वीरता की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी. युद्धभूमि में उसका सामना करना कठिन माना जाता था और उसके आक्रमणों से देवताओं तक को परेशानी होती थी. रामायण में मेघनाद के पास कई दिव्य अस्त्र होने का वर्णन मिलता है. उसने नागपाश जैसे अस्त्रों का प्रयोग करके भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को संकट में डाल दिया था. हालांकि लक्ष्मण ने युद्ध में उसका वध कर दिया था.
तुलसीदास की रामायण में रावण के और भी कई योद्धाओं का जिक्र मिलता है.
श्लोक-
कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।
एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।
3. अतिकाय
अतिकाय रावण और उसकी पत्नी विंध्यमालिनी का पुत्र था. वह अपनी असाधारण ताकत और युद्धकौशल के लिए जाना जाता था. ब्रह्मा जी से मिले वरदान के कारण उसे देवताओं, दानवों और मनुष्यों के लिए पराजित करना आसान नहीं था. हालांकि, युद्ध में लक्ष्मण ने दिव्य अस्त्र का प्रयोग कर उसका अंत कर दिया था.
4. अकंपन
अकंपन अपनी दृढ़ता और मायावी शक्तियों के लिए जाना जाता था. कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वह घबराता नहीं था. मान्यता है कि उसने हनुमान जी से युद्ध किया था और अपनी मायावी शक्तियों से कई बार वानर सेना को भ्रमित किया. अकंपन ने ही रावण को बताया था कि युद्ध में राम से सीधे भिड़ जाना ठीक नहीं है और सीता का अपहरण ही एकमात्र रास्ता है.
5. कुमुख
कुमुख रावण की सेना का एक शक्तिशाली राक्षस था, जो अपनी आक्रामक युद्ध शैली और बहादुरी के लिए जाना जाता था. उसकी ताकत और युद्ध में पराक्रम को देखते हुए रावण ने उसे अपनी सेना के प्रमुख योद्धाओं में स्थान दिया था.
6. धूम्रकेतु
धूम्रकेतु रावण की सेना का एक शक्तिशाली राक्षस था. कहा जाता है कि वह आग और धुएं से मायाजाल रचकर शत्रुओं को भ्रमित करता था और उन्हें अपने जाल में फंसाकर युद्ध में कमजोर करने की कोशिश करता था.
7. खर और दूषण
खर और दूषण रावण के सौतेले भाई और शक्तिशाली राक्षस थे. शूर्पणखा ने नाक कटने के बाद सबसे पहले इन्हीं दोनों को अपनी व्यथा सुनाई थी. बहन के अपमान का बदला लेने के लिए खर और दूषण विशाल सेना लेकर पंचवटी पहुंचे और भगवान राम, माता सीता तथा लक्ष्मण जी पर आक्रमण कर दिया. दोनों राक्षस अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण थे और युद्ध में अपनी ताकत के लिए प्रसिद्ध थे.