राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल की बदहाली को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया. स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं का ग्रामीणों ने विरोध किया. CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और वाहनों में तोड़फोड़ की गई. वहीं ग्रामीणों की ओर से भी पार्टी के लोगों के गांव में पहुंचने को लेकर नाराजगी जताई गई.
घटना के बाद CJP की शिवांगी शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर उन्हें और उनके साथियों को बाहरी या पाकिस्तानी क्यों कहा जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनका घर जयपुर से महज आधे घंटे की दूरी पर है और वह यहीं पली-बढ़ी हैं. शिवांगी ने कहा कि देश के बच्चों के लिए बेहतर स्कूल की मांग करना किसी दूसरे देश के लिए काम करना नहीं है.
स्कूल देखने पहुंचे थे CJP के कार्यकर्ता
बताया गया कि CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर स्कूल ठीक करो अभियान शुरू किया है. इसी अभियान के तहत पार्टी के कुछ कार्यकर्ता रामपुरा-कंवरपुरा गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे थे. कार्यकर्ताओं के स्कूल पहुंचने की जानकारी मिलते ही कुछ ग्रामीण वहां पहुंच गए और उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया. मामला बढ़ने पर कार्यकर्ताओं को वहां से वापस लौटना पड़ा. कुछ देर बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका भी स्कूल पहुंचे. उनके पहुंचने के बाद ग्रामीणों की ओर से नारेबाजी किए जाने की बात सामने आई. विरोध बढ़ते-बढ़ते धक्का-मुक्की तक पहुंच गया. CJP का आरोप है कि उसके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई. पार्टी की ओर से यह भी दावा किया गया कि कुछ वाहनों के शीशे तोड़े गए. घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया.
शिवांगी ने कहा- ‘मैं पाकिस्तान से नहीं आई हूं'
घटना के बाद मीडिया से बातचीत में CJP की शिवांगी शर्मा ने कहा कि उन्हें और पार्टी के कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर ‘पाकिस्तानी’ कहकर संबोधित किया गया. इस पर उन्होंने नाराजगी जताई. शिवांगी ने कहा, क्या मैं पाकिस्तानी हूं? मेरा घर यहां से सिर्फ आधे घंटे की दूरी पर है. मैं जयपुर में ही पली-बढ़ी हूं. मैं यहीं बच्चों के साथ बड़ी हुई हूं. फिर मैं बाहर की कैसे हो गई? उन्होंने कहा कि वह जिस बात से सबसे ज्यादा आहत हैं, वह यह है कि देश के भीतर ही एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को दूसरे देश से जोड़कर देखा जा रहा है. उनके मुताबिक, CJP के कार्यकर्ता किसी दूसरे देश से नहीं आए हैं. वे भी इसी देश के नागरिक हैं और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अपनी बात रखने के लिए गांव पहुंचे थे.
स्कूल के बच्चों की बात करने आए थे
शिवांगी शर्मा ने कहा कि पार्टी का अभियान सरकारी स्कूलों की स्थिति से जुड़ा है. उनका कहना था कि यदि किसी स्कूल में सुधार की जरूरत है तो उसके बारे में सवाल उठाना किसी के खिलाफ दुश्मनी नहीं है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी समाज अलग-अलग नहीं हैं और पार्टी के कार्यकर्ता भी इसी समाज का हिस्सा हैं. उनका दावा था कि CJP ग्रामीणों के विरोध में नहीं, बल्कि स्कूलों की स्थिति देखने और बच्चों से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए वहां पहुंची थी. शिवांगी ने कहा कि यदि देश में शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़े सवाल उठाने पर मारपीट और धक्का-मुक्की होने लगे तो यह चिंता की बात है.
पहले से प्रशासन को दी गई थी जानकारी
CJP की ओर से दावा किया गया कि कार्यक्रम की जानकारी पहले ही पुलिस प्रशासन और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की गई थी. शिवांगी ने कहा कि पार्टी की ओर से यह बताया गया था कि कार्यकर्ता निर्धारित कार्यक्रम के तहत स्कूल का दौरा करने वाले हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद सुबह से ही विरोध की स्थिति बन गई थी. उनके मुताबिक, कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए और लाठियों से हमला किया गया.
लड़कियों को पीछे छोड़ने की कोशिश हुई
शिवांगी ने दावा किया कि मौके पर मौजूद महिला कार्यकर्ताओं को भी असुरक्षित महसूस हुआ. उन्होंने कहा कि पुरुष कार्यकर्ताओं को आगे से भगाया गया, जिसके बाद महिला कार्यकर्ताओं के पीछे रह जाने की स्थिति बनी. उनका आरोप था कि कुछ लोग रस्सियां लेकर पीछे आ रहे थे. शिवांगी ने कहा कि अगर मौके पर मीडिया नहीं पहुंचती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी. उन्होंने यह भी कहा कि महिला होने की वजह से शायद उनके साथ कुछ संयम बरता गया, लेकिन उनके अनुसार अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई. बातचीत के दौरान शिवांगी ने एक कार्यकर्ता के गले पर लाल निशान दिखाते हुए दावा किया कि उसके साथ गला दबाने जैसी हरकत की गई. उन्होंने कहा कि कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी पत्थर लगने की बात सामने आई है. CJP की ओर से वाहनों में तोड़फोड़ का भी आरोप लगाया गया. शिवांगी ने कहा कि उनकी गाड़ियां मौके पर खड़ी हैं और उन्हें देखकर नुकसान की स्थिति की जांच की जा सकती है. उन्होंने कहा कि यदि वाहनों के शीशे टूटे हैं या अन्य नुकसान हुआ है तो इसकी जांच की जानी चाहिए और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
शिवांगी ने आशुतोष रांका का जिक्र करते हुए कहा कि वह पिछले कुछ समय से देश से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. उनका सवाल था कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन की विचारधारा से मतभेद है तो उसका जवाब हिंसा से क्यों दिया जाए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति की जगह होनी चाहिए. किसी मुद्दे पर असहमति होने पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन मारपीट या तोड़फोड़ का रास्ता उचित नहीं है.