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फरसा हाथ में, दूसरी तरफ संविधान और दूध से अभिषेक... राहुल गांधी के पोस्टर पर भड़क उठा ब्राह्मण समाज

एक हाथ में परशुराम का फरसा, दूसरे हाथ में संविधान... राहुल गांधी के जन्मदिन पर यह पोस्टर अब सियासी और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है। वाराणसी में यूथ कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान ये पोस्टर सामने आया, जिस पर दूध से अभिषेक किया गया. अब इस पर ब्राह्मण समाज ने कड़ी नाराजगी जताई है.

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वाराणसी में कार्यकर्ताओं ने पोस्टर के साथ मनाया था राहुल गांधी का जन्मदिन. (Photo: PTI)
वाराणसी में कार्यकर्ताओं ने पोस्टर के साथ मनाया था राहुल गांधी का जन्मदिन. (Photo: PTI)

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का जन्मदिन था. कांग्रेस कार्यकर्ता जश्न मना रहे थे. लेकिन वाराणसी के गंगा घाट पर हुआ एक आयोजन अब नए विवाद की वजह बन गया है. वजह है राहुल गांधी का एक पोस्टर, जिसमें उनके एक हाथ में भगवान परशुराम का फरसा और दूसरे हाथ में संविधान की प्रति थी. कार्यकर्ताओं ने इस पोस्टर का दूध से अभिषेक किया.

तस्वीरें और वीडियो सामने आए तो मामला सोशल मीडिया से निकलकर धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया. अब अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने इस पर नाराजगी जताई है. 19 जून को राहुल गांधी के जन्मदिन के मौके पर वाराणसी में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किया.

यहां देखें Video

इस दौरान राहुल गांधी का एक पोस्टर लगाया गया था. कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर दूध चढ़ाया और जन्मदिन मनाया. कुछ ही देर में इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा ने इस पूरे मामले पर आपत्ति जताई है. अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा है कि भगवान परशुराम कोई राजनीतिक प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन आस्था, तप, त्याग और धर्मरक्षा के शाश्वत प्रतीक हैं.

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अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि किसी भी नेता के जन्मदिवस पर उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में प्रस्तुत करना करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है, जिसे राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: 56 साल के हुए राहुल गांधी, PM मोदी ने दी जन्मदिन की बधाई

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक राजनीतिक व्यक्ति हैं, उनका सम्मान अपनी जगह है, लेकिन उनकी तुलना भगवान परशुराम से करना न तो उचित है और न ही सनातन परंपरा के अनुरूप. कांग्रेस नेताओं को व्यक्तिपूजा और धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग से बचना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज अपने आराध्य देवों का सम्मान करता है, उन्हें किसी राजनीतिक प्रचार अभियान का हिस्सा बनाए जाने का समर्थन नहीं कर सकता. पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा ने आगे कहा कि आज आवश्यकता भगवान परशुराम के आदर्शों ज्ञान, तप, शौर्य और धर्म के प्रति समर्पण को जीवन में उतारने की है, न कि उनके स्वरूप का राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए उपयोग करने की.

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. उन्हें शौर्य, तपस्या, ज्ञान और धर्म की रक्षा के लिए जाना जाता है. खासकर ब्राह्मण समाज में उनकी विशेष श्रद्धा है. फिलहाल कांग्रेस की ओर से अभी इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है.

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