भोपाल के 'किसान महा चौपाल' में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर हमला किया. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों तक, प्रधानमंत्री मोदी को सीधे कटघरे में खड़ा किया. राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि जब चीन की सेना भारतीय सीमा में घुस रही थी, तब सरकार ने सेना को उसके हाल पर छोड़ दिया था.
राहुल गांधी ने कहा, "नरवणे जी ने अपनी किताब में साफ लिखा है कि जब चीन के टैंक हिंदुस्तान के अंदर आ रहे थे, तब उन्होंने रक्षा मंत्री, एनएसए और विदेश मंत्री को फोन किया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया. 2 घंटे बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि जो उचित लगे वो करो. उस वक्त प्रधानमंत्री सेना प्रमुख से बात करने के बजाय अपने कमरे में छिपे थे."
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में उनका भाषण खत्म होते ही पीएम मोदी सदन से भाग गए और उसी शाम राष्ट्रपति ट्रंप को फोन कर उस व्यापारिक समझौते (India-US Trade Deal) पर सहमति दे दी जो 4 महीने से रुका हुआ था. राहुल ने आरोप लगाया कि इस डील से अमेरिका की बड़ी कंपनियां भारत में सोया, कपास और दालें बेच सकेंगी, जिससे भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे.
उन्होंने कहा कि भारत को हर साल अमेरिका से 9 लाख करोड़ रुपये का माल खरीदना होगा, जिससे हमारी टेक्सटाइल इंडस्ट्री खत्म हो जाएगी. इतना ही नहीं राहुल ने आरोप लगाया कि यह सब दबाव में किया गया क्योंकि मोदी 'कंप्रोमाइज्ड' हैं. राहुल गांधी ने कहा, 'हिंदुस्तान के पास दुनिया में सबसे ज़्यादा डेटा है. दूसरे नंबर पर चाइना है. आपके डेटा के बिना अमेरिका चाइना का मुक़ाबला नहीं कर सकता है.'
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'एपस्टीन फाइल्स' का जिक्र
राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका में “एपस्टीन फाइल्स” से जुड़े लाखों दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम दबाव बनाने के लिए उजागर किया गया.
उन्होंने उद्योगपति अनिल अंबानी और गौतम अडाणी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अपने संबंध स्पष्ट करने चाहिए. राहुल ने आरोप लगाया कि अडाणी समूह पर अमेरिका में आपराधिक मामले चल रहे हैं और इस पूरे प्रकरण का असली निशाना प्रधानमंत्री हैं, न कि अडाणी.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में 'एपस्टीन फाइल्स' (Epstein Files) के रिलीज होने से सरकार दबाव में है. राहुल ने चुनौती देते हुए कहा, "मैं मोदी जी को चुनौती देता हूं कि अगर आपमें दम है तो अमेरिका के साथ इस जनविरोधी डील को रद्द करके दिखाएं."
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रैली में राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया और कहा कि “देश के किसान और युवा दबाव में लिए गए फैसलों को स्वीकार नहीं करेंगे.” भोपाल की इस रैली ने आने वाले राजनीतिक महीनों में केंद्र और कांग्रेस के बीच टकराव को और तेज करने के संकेत दे दिए हैं.