सांची के विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूपों और वास्तुकला को रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन में उकेरा गया है. राज्यपाल मंगूभाई पटेल की मौजूदगी में इस आधुनिक स्टेशन का शुभारंभ हुआ.
अशोकनगर के स्थानीय व्यापार और संस्कृति की झलक स्टेशन परिसर में दिखाई देती है. स्टेशन पर निर्बाध ट्रैफिक मूवमेंट और विशाल पार्किंग जोन बनाया गया है.
बालाघाट के प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय कला को स्टेशन की दीवारों और वेटिंग हॉल में सुंदर वॉल आर्ट के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है.
ब्योहारी स्टेशन के पुनर्विकास से स्थानीय यात्रियों के साथ-साथ पर्यटन और क्षेत्रीय व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी.
भिंड स्टेशन पर नए प्लेटफ़ॉर्म शेड, स्वच्छ टॉयलेट कॉम्प्लेक्स और यात्रियों के लिए रियल-टाइम ट्रेन इंफॉर्मेशन डिस्प्ले लगाए गए हैं.
महाराजा छत्रसाल की शौर्यगाथा को समर्पित इस स्टेशन को हेरिटेज लुक दिया गया है, जिससे आने वाले नेशनल और इंटरनेशनल पर्यटकों को सुखद अहसास होगा.
महाकौशल क्षेत्र के इस अहम स्टेशन पर आधुनिक कॉनकोर्स, फूड कोर्ट और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी पर्यावरण-अनुकूल प्रणाली स्थापित की गई है.
खजुराहो और नौगांव जाने वाले पर्यटकों के लिए यह स्टेशन बेहद अहम है. अमृत भारत योजना के तहत इसे सर्वसुविधायुक्त टूरिस्ट फ्रेंडली स्टेशन बनाया गया है.
खनन क्षेत्र जुन्नारदेव के निवासियों को अब सुगम आवाजाही, बेहतर लाइटिंग और दिव्यांग-अनुकूल रैंप की सुविधा मिलेगी.
कभी एशिया के सबसे बड़े नैरो गेज जंक्शन के रूप में मशहूर नैनपुर को अब ब्रॉड गेज के आधुनिक और हाई-टेक मॉडल स्टेशन के रूप में ढाला गया है.
बालाघाट के प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय कला को स्टेशन की दीवारों और वेटिंग हॉल में सुंदर वॉल आर्ट के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है.
शिवपुरी की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक छतरियों की वास्तुकला को स्टेशन की बाहरी बनावट में पिरोया गया है. डिजिटल डिस्प्ले और सोलर पैनल से स्टेशन को सुसज्जित किया गया है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में टीकमगढ़ स्टेशन को यात्रियों को समर्पित किया गया. ओरछा और बुंदेली वास्तुकला से प्रेरित यह स्टेशन अब क्षेत्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बनेगा.