मुनव्वर राना. एक ऐसा शायर जिसने मां को न सिर्फ महबूबा के बरक्स खड़ा किया बल्कि एक नई इबारत भी लिखने का काम किया. वे साहित्य आज तक के मंच से अपने श्रोताओं से रू-ब-रू हुए. वे 'मां की बात' सत्र में जनता के सामने आए और अपनी नज्में सुनाईं. आप भी जानें कि आखिर उनकी बातों का क्या हाईलाइट रहा...
1. वे कहते हैं कि जब वाल्मीकि एक दस्यु होकर बाद में रामायण रच सकते हैं तो कोई भी सुधर सकता है.
2. उनकी इस आदत से मां बहुत परेशान रहा करती थी.
3. उनकी मां उनकी नींद में चलने की आदत पर परेशान होकर दूर कहीं कुएं के किनारे दुआ करती रहतीं.
4. वे बचपन में बेहद गरीबी से गुजरे. खानपान के लिए उन्हें नानी के घर भेज दिया जाता था.
5. वे कहते हैं कि क्यों नहीं हो सकती.
6. पहले हम गाय को मां समझा करते थे अब मां को गाय समझने लगे हैं.
7. अब घरों में गाय की जगह मारुति खड़ी करने लगे हैं. वे किसी भी ओल्ड एज होम को गिरा देना ही अपनी उपलब्धि मानेंगे.
8. मां की ताकत को वे हमेशा से ही सबसे ऊपर मानते हैं. कर देती है.
9. शायर का काम तो इशारा करना है. समझने का काम तो जनता करती है.
10. वे कहते हैं कि शायर का काम शायरी करना है और उसे जन-जन तक पहुंचाने का काम डाकिए का है.