रतन टाटा से लेकर मुकेश अंबानी जैसे 10 बड़े दिग्गजों से बातचीत पर आधारित ये किताब सफलता का एक नया नजरिया पेश करती है. यह उन युवाओं को पढ़ना चाहिए, जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं या फिर कारोबार शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं.
किताब ‘1947: The Battle of Badgam and Shalateng’ कश्मीर में 1947 के शुरुआती सैन्य संघर्ष और बड़गाम व शालतेंग की निर्णायक लड़ाइयों पर केंद्रित है.
चित्रदीप चक्रवर्ती की किताब 'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम' साइबर अपराध की जटिलताओं को समझाने वाली एक महत्वपूर्ण नॉन-फिक्शन रचना है.
नई जेनरेशन की नई-नई समस्याओं के लिए कुछ अलग ही सॉल्यूशन की ज़रूरत होती है. ये सॉल्यूशन हमारे आसपास हो या नहीं, लेकिन हमारे ग्रंथों, हमारी कहानियों में ज़रूर हैं. ऐसे ही कई जवाबों को लेकर एक किताब आई है, आप ही हीरो हैं... ये कैसी है ज़रूर पढ़ें.
पूर्व राजनयिक व लेखक नवतेज सरना की पुस्तक A Flag to Live and Die For: A Short History of India’s Tricolour में राष्ट्रीय ध्वज की कहानी इस एहसास के साथ आगे बढ़ती है कि स्वतंत्रता आंदोलन का अपना एक अलग प्रतीक होना चाहिए.
'अनश्वरः चौदहवें दलाई लामा की जीवनी' डॉ अरविंद यादव ने लिखी है. यह परम पावन के जीवन पर हिंदी में लिखी हुई पहली मौलिक और प्रमाणिक जीवनी है
कौन कहता है कि इतिहास हमेशा बड़े लोग ही लिखते हैं, कई बार यह किसी आम इनसान के असाधारण साहस द्वारा भी लिखा जाता है. राजधानी का इंडिया इंटरनेशनल सेंटर ऐसी ही एक शाम का गवाह बना. यह शाम 'सम्पा' के नाम रही. 'सम्पा: विश्वास, धैर्य और संकल्प की अनूठी दास्तान'
मात्र 85 पन्नों वाला यह उपन्यास अपनी सरल भाषा, सहज कथानक और वास्तविक जीवन के अनुभवों से इस तरह पगा है कि आप कई दिनों तक इस कहानी को अपने हिसाब से समझने की कोशिश करते रहेंगे. उपन्यास के संवाद इतने स्वाभाविक हैं कि जैसे लगता है कि मानव मनोविज्ञान का सजीव चित्रण किया गया है.
एक साइकॉलजी स्कॉलर यूएस रिटर्न लड़की एक ऐसे मनोवैज्ञानिक शोध में लगी हुई जो अपने आप में अनोखा है. आपने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इस तरह का रिसर्च भी दुनिया में होता है. इस बीच शहर में एक हत्या होती है. फिर कहानी अपने चरम पर होती है.
आकाश वाजपेयी की किताब 'Freedom on Trial' भारत की आजादी की लड़ाई के उन अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है जो अदालतों में लड़े गए मुकदमों से जुड़े हैं. महात्मा गांधी, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक जैसे क्रांतिकारियों के मुकदमों के जरिए यह किताब स्वतंत्रता संग्राम के कानूनी संघर्ष को रोचक और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है.