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समीक्षा

वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश मनु की आत्मकथा 'मैं मनु' का आवरण-चित्र

मैं मनुः रचनाकार के बचपन की भोली छवियों वाली आत्मकथा

13 जून 2022

हिंदी साहित्य की गद्य विधाओं में आत्मकथा की अपनी एक समृद्ध परंपरा है. प्रकाश मनु की आत्मकथा 'मैं मनु' बेहद आकर्षक है और किसी रोचक उपन्यास की तरह पाठक को बांध लेती है

'आंखें' और 'नींद का रंग' का आवरण चित्रः सारा शगुफ़्ता का नज़्म संकलन अब हिंदी में

सारा शगुफ़्ता के संग्रह 'आंखें', 'नींद का रंग' पर एक नज़र

09 जून 2022

पाकिस्तान की मशहूर शायरा सारा शगुफ़्ता ने ज़िंदगी में कितनी तकलीफें सहीं? वक्त ने उनके साथ कितनी ज्यादतियां की? इन सवालों का जवाब 'आंखें' और 'नींद का रंग' के हर पन्ने पर बिखरा पड़ा है.

Aurangzeb Banam Rajput Book Review

औरंगजेब पर जारी बहस को नई दिशा देने का प्रयास करती किताब

03 जून 2022

पत्रकार अफसर अहमद ने अपनी किताब में औरंगजेब के व्यक्तित्व को लेकर कई ऐसी बातें बताई हैं जिनके बारे में आमतौर पर चर्चा नहीं होती है.

रामविलास शर्मा रचनावली

रामविलास शर्मा रचनावली: पढ़ें पुस्तक के अंश

31 मई 2022

पुस्तक में भारतीय इतिहास के बारे में बहुत-सी बातें कही गई हैं. सिन्ध और पंजाब से आर्य लोग उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंचे. ऐसा लगता है कि वे दो रास्तों से एक साथ भारत में प्रवेश कर रहे थे.

रेत समाधि उपन्यास

कैसा है गीतांजलि श्री का उपन्यास रेत समाधि, जिसे मिला है बुकर पुरस्कार, पढ़ें-पुस्तक अंश

30 मई 2022

जानी मानी लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि की जबरदस्त चर्चा है. रेत समाधि दिग्गज लेखिका गीतांजलि श्री का पांचवां उपन्यास है. पाठकों से लिए पेश है उपन्यास रेत समाधि का पुस्तक अंश.

गीतांजलि श्री, उपन्यास 'रेत समाधि', डेजी रॉकवेल और Tomb of Sand

'रेत समाधि' के बुकर प्राइज की दौड़ में पहुंचने के मायने

13 अप्रैल 2022

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2022 की शॉर्टलिस्ट में गीतांजलि श्री के उपन्यास 'रेत समाधि' का डेजी रॉकवेल द्वारा किया अनुवाद 'Tomb of Sand' भी शामिल है. क्यों न इस उपलब्धि को भारतीय साहित्य के एक बेहतर अवसर के रूप में बदल दिया जाये.

युद्ध और त्रासदीः इस पीड़ा का अंत नहीं

रूस-यूक्रेन युद्ध और नासिरा शर्मा का 'अजनबी जज़ीरा'

05 मार्च 2022

एकाएक दरवाज़े पर दस्तक हुई तो वह सिहर उठी. उसकी आंखों में खौफ़ उभरा. उसने पहले शौहर की बन्द आंखों, फिर उन दस खुली आंखों की तरफ़ देखा जो गुलाबी डोरों के बीच भयभीत हिरनियों की सवालिया नज़रें थीं.

लेखक संजीव बख्‍शी और 'केशव, कहि ना जाइ का कहिये' का आवरण चित्र

संजीव बख्‍शी का संस्‍मरण: केशव, कहि न जाइ का कहिये

02 मार्च 2022

संजीव बख्‍शी का प्रशासनिक जीवन उनके साहित्‍यिक जीवन से गुंथा हुआ है. अपने संस्‍मरणों में वे दोनों को साथ-साथ साधते हैं. 'केशव, कहि न जाइ का कहिये' में भी उन्होंने यही दर्ज किया है.

कहने में जो छूट गया का आवरण चित्र [ सौजन्यः राजपाल एंड संस]

'कहने में जो छूट गया' में शामिल है नरम अहसासों की खुशबू

25 फरवरी 2022

जाने-माने शायर फ़रहत अहसास के संपादन में एक चयन आया है 'कहने में जो छूट गया' नाम से, जिसमें समकालीन उर्दू शायरी के पांच अहम शायरों मनीष शुक्ल, मदन मोहन दानिश, शारिक कैफ़ी, खुशवीर सिंह 'शाद' व फ़रहत एहसास की ग़ज़लें शामिल हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी पुस्तक और सागरिका घोषः इंदिरा के बाद एक अलहदा काम

ATAL BIHARI VAJPAYEE के जीवन और प्यार की अनूठी दास्तां

22 फरवरी 2022

भारतीय राजनीति को अटल बिहारी वाजपेयी ने लंबे अरसे तक अपनी प्रभावी उपस्थिति से सराबोर रखा. यह यों ही नहीं है कि उनके धुर विरोधी भी उन्हें एक 'बुरी पार्टी में अच्छा आदमी' करार देते थे... शायद इसीलिए जानीमानी पत्रकार, स्तंभकार और लेखक सागरिका घोष ने अंग्रेजी में 'ATAL BIHARI VAJPAYEE' नाम से एक पुस्तक लिखी, जो जगरनॉट से प्रकाशित हुई है.

प्रबोध कुमार पर अंक के साथ 'लमही' के विशेषांकों का सिलसिला जारी है

लमही ने प्रबोध कुमार के साहित्यि‍क अवदान को किया याद

11 फरवरी 2022

प्रबोध कुमार मुंशी प्रेमचंद के दौहित्र थे. उनका नाम अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के मानव विज्ञानियों में लिया जाता है. जहां तक साहित्यिक रचनाधर्मिता का प्रश्न है, उनकी अनेक रचनाएं कहानियां, आलोचना, कल्पना, कहानी, कृति और वसुधा आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं.

उपन्यास 'घटोत्कच के मायाजाल में' और नमिता गोखले

पुस्तक अंश: घटोत्कच के मायाजाल में, अद्भुत फंतासी गाथा

02 फरवरी 2022

महाभारत कथा के जिन पात्रों में आज भी लोगों की जिज्ञासा है, घटोत्कच उनमें प्रमुख है. साहित्य आजतक पर पढ़िए एक्शन और एडवेंचर से भरपूर, रेखाचित्रों से सजे नमिता गोखले के पूर्ण मनोरंजक उपन्यास 'घटोत्कच के मायाजाल में' का एक अंशः

गांधी और सुभाषः भारत माता के दो अमर सपूत

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंतीः 'पराक्रम दिवस' पर विशेष

23 जनवरी 2022

नेताजी की 125वीं जयंती पर जानिए कि महात्मा गांधी और नेताजी के आपसी रिश्ते क्या थे, कि वैचारिक पथ अलग होने के बावजूद सुभाष बाबू ने उन्हें राष्ट्रपिता कहा. लेखक राज खन्ना की पुस्तक 'आजादी से पहले, आजादी के बाद' का अंश

साहित्य 2021: कथा-कथेतर

साहित्य 2021: कथा-कथेतर विधाएं; हैं कहानियां कितनी!

31 दिसंबर 2021

इधर कुछ सालों से पाठक कहानी व उपन्‍यास से कथेतर विधाओें की ओर मुड़े हैं. वे संस्‍मरणों, आत्‍मकथाओं व जीवनियों में दिलचस्‍पी रखते हैं. सेलीब्रिटीज के जीवन में क्‍या कुछ हो रहा है, यह जानने की जिज्ञासा भला किसे नहीं होती. इसलिए प्रोफाइल लेखन का रास्‍ता प्रशस्‍त हुआ है. कथा और कथेतर विधाओं में साल 2021 में क्‍या कुछ लिखा गया, इसका जायज़ा ले रहे हैं हिंदी के सुधी कवि समालोचक डॉ ओम निश्‍चल

साल 2021 में जिन काव्य संकलनों ने छुआ दिल

साहित्य तक टॉप 10- कविताः विद्रोही स्वर में प्रेम राग

31 दिसंबर 2021

साहित्य तक की टॉप 10 पुस्तकों की कड़ी में जो काव्य संकलन दर्ज हुए वे हैं...

साल 2021 में इन उपन्यासों ने हिला दिया

साहित्य तक टॉप 10- उपन्यासः अपराध और कटाक्ष ने भरी उछाल

31 दिसंबर 2021

साल का आखिरी दिन है और बुक कैफे की टॉप 10 पुस्तकों की इस कड़ी में आज लोकप्रिय उपन्यासों की चर्चा हुई है.

इस साल जिन कथा संकलनों ने दिल छुआ

साहित्य तक टॉप 10 कथा संकलनः इन कहानियों में है कुछ खास

30 दिसंबर 2021

गांव की माटी में पनपते सहज संबंध हों या उठऊआ विवाह की कोशिश, प्रवासी धरती का अपराध हो या देवी-देवताओं से भरे किस्से. ये कथा संकलन हैं खास

जिन पुस्तकों ने साहित्य तक पर कथेतर टॉप 10 में जगह बनाई

साहित्य तक टॉप 10: कथेतर पुस्तकें, जो इस श्रेणी में हैं

30 दिसंबर 2021

साहित्य तक पर बुक कैफे की टॉप 10 पुस्तकों की कड़ी में जिन पुस्तकों को जगह मिली

अनुवाद की जिन पुस्तकों से समृद्ध हुआ हिंदी क्षेत्र

साहित्य तक टॉप 10: अनूदित पुस्तकों में कौन सी शानदार

30 दिसंबर 2021

साहित्य तक पर 'बुक कैफे' के तहत पुस्तकों की चर्चा की एक कड़ी इसी साल जनवरी में शुरू हुई थी. अनूदित पुस्तकों की सूची में इन टॉप 10 पुस्तकों ने जगह बनाई.

साल 2021 में फिर से छपी इन किताबों से समृद्ध हुआ साहित्य जगत

साहित्य 2021: किताबों का पुनर्मुद्रण, नई हिंदी की गति

29 दिसंबर 2021

प्रकाशकों ने कोरोना, जीएसटी और प्रसार संबंधी मुश्किलों और मौजूदा संकट को देखते हुए वही पुस्तकें पुन: छापी हैं जिनकी मांग आज भी है या जिनके पुनर्मुद्रित संस्करण के निकल जाने की आशा है. हिंदी के बाजार पर साहित्य आजतक की एक नजर