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समीक्षा

अमलेंदु तिवारी के उपन्‍यास 'विरक्‍त' का कवर

भाषाई अध्‍यात्‍म के विरल प्रकाश में 'विरक्‍त'

21 अक्टूबर 2020

युवा लेखक अमलेंदु तिवारी का उपन्‍यास 'विरक्‍त' गांव, देहात और पिता के वृहत्‍तर जीवन से होता हुआ मुंबई के निज के संघर्ष की आत्‍मिक बानगी पेश करता है.

कैलकटास्केप: म्यूज़िंग्स ऑफ ए ग्लोबट्रॉटर

कैलकटास्केप: म्यूज़िंग्स ऑफ ए ग्लोबट्रॉटर; एक घुमक्कड़ की विचार-यात्रा

16 अक्टूबर 2020

जीवन को ज्यों का त्यों, सहज किंतु आह्लादकारी तरीके से, शब्दों में पकड़ने की इच्छा घुल जाए तो उसका परिणाम संदीप भूतोड़िया की 'कैलकटास्केपः म्यूजिंग्स ऑफ ए ग्लोबट्रॉटर' के रूप में सामने आता है

ऑन द ट्रायल ऑफ बुद्धा— ए जर्नी टू द ईस्ट

बुद्धा-ए जर्नी टू द ईस्ट: संस्कृति की अद्भुत जानकारियां, बुलेट ट्रेन में संस्कृति की है यात्रा

02 अक्टूबर 2020

पुस्तक की प्रस्तावना पद्मभूषण, लोकेश चंद्र द्वारा लिखी गई है. उन्होंने कहा कि, ‘हजारों मन के फूलों से रचित यह किताब सदियों के सोने में लिपटी हुई है. यह बुलेट ट्रेन में संस्कृति की यात्रा है.’

हिंदी दिवस 2020 विशेष

हिंदी दिवस 2020: क्यों सूखती जा रही है हिंदी की सदानीरा?

14 सितंबर 2020

हिंदी की फसल को खाद पानी देने में भारत सरकार ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है किन्तु हिंदी की बेल अपने ही देश में सूखती नजर आती है. हिंदी दिवस पर एक विश्लेषण

अशोक चक्रधर के नए काव्य संकलन का कवर

गई दुनिया नई दुनिया: आपदा से जूझने का बल देती रचनाएं

06 सितंबर 2020

अशोक चक्रधर ने अपने नए कविता संग्रह 'गई दुनिया नई दुनिया' से कोरोना से जूझ रहे इनसानी जीवन में अलख जगाई है और इस व्‍याधि से मनुष्यता को बचाने के कुछ सूत्र दिए हैं.

कवि अशोक वाजपेयी और उनका काव्य संकलन

अप्रतिहत कवि-मन का निर्मल नैवेद्य अशोक वाजपेयी का 'कम से कम'

25 अगस्त 2020

कोरोना संक्रमण के इस दौर ने अशोक वाजपेयी की गतिविधि और यात्राओं पर विराम भले लगाया हो, उनकी कविताओं का करघा कभी मंद नहीं पड़ा

भाषा की खादी का कवर

पुस्तक समीक्षाः भाषा की खादी, हिंदी के रेशों का लेखा-जोखा

04 जून 2020

हिंदी अपने मूल चरित्र में अपने उत्स के हिसाब से एक खांटी भारतीय निष्पत्ति है, जो अपने आदिम स्वरूपों में बीते हज़ारों वर्षों के कालखण्ड में अपना अस्तित्व बनाती-बचाती और सजाती-संवारती आई है.