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समीक्षा

प्रेमशंकर शुक्लः चर्चा व विवाद के केंद्र में कविताएं

कविता-विवाद के केंद्र में क्यों हैं प्रेमशंकर शुक्ल?

05 अगस्त 2021

बीते कुछ समय से भोपाल के कवि प्रेमशंकर शुक्‍ल की कुछ कविताएं अश्‍लीलता के आरोपों के कारण चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर इन कविताओं के पक्ष विपक्ष में अनेक साहित्‍यिक लोग सक्रिय हैं. क्‍या है यह पूरा प्रसंग और इन कविताओं में ऐसा क्‍या है जो अश्‍लील है, इस मसले पर लेखकों-कवियों की राय तथा शुक्‍ल के कवित्‍व के आयाम पर प्रकाश

गोदान का आवरण-चित्र और लेखक प्रकाश मनु [इनसेट में]

जयंती विशेषः प्रेमचंद की महाकाव्यात्मक कृति है गोदान

31 जुलाई 2021

'रामचरितमानस' में अगर कल का हिंदुस्तान है तो 'गोदान' में आज का हिंदुस्तान है और यों 'गोदान' मानो 'रामचरितमानस' की अगली कड़ी है.

The Bera Bond पुस्तक का कवर

The Bera Bond: तेंदुआ और इनसान के सह अस्तित्व की गाथा

27 जुलाई 2021

तेंदुआ और इनसानों के शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व की तलाश में संदीप भूतोड़िया बेरा के असंख्य पक्षियों और जानवरों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराते हैं

जया के बहाने गंगा तक विजय सिंह की प्रेम यात्राः जया गंगा का आवरण-चित्र

पुस्तक अंशः जया गंगा, प्रेम को तलाशते लेखक का वृत्तांत

12 जुलाई 2021

वह पतझड़ की रात थी. सर्दी की पहली किरणें पारदर्शी उजाले की तिरछी बरछियों की तरह खिड़की से प्रवेश कर रही थीं. जंग-लगा केरोसिन का लैम्प जल रहा था, जिसकी कांपती हुई किरमिज़ी लौ पपड़ियाए हुए दरवाज़े के रेखांकन जैसी ही निरीह थी

दिलीप कुमारः वजूद और परछाई पुस्तक का आवरण-चित्र [सौजन्यः वाणी प्रकाशन]

पुस्तक अंशः जब दिलीप साहब को खानी पड़ी थी 'क़ुरान' की कसम

07 जुलाई 2021

दिलीप कुमार की इस आधिकारिक आत्मकथा 'वजूद और परछाईं' में उनके जन्म से लेकर आखिरी दिनों तक की जीवन-यात्रा का वर्णन है. क्या दौर था वह भी. श्रद्धांजलि स्वरूप एक अंश

 'नारीवादी निगाह से' पुस्तक का आवरण चित्र [ सौजन्यः राजकमल प्रकाशन ]

निवेदिता मेनन की पुस्तक 'नारीवादी निगाह से' के अंश

05 जुलाई 2021

इस सत्य को स्वीकार करके चलें कि एक बार जब प्यार विवाह की संस्था में करीने से फ़िट हो जाता है तो यह विवाह भी किसी अन्य विवाह जैसा ही हो जाता है.

No Stags Allowed, Novel Cover page

No Stags Allowed: 'कभी-कभी बुरा होना ही ठीक' सिखाती है ये कहानी

28 जून 2021

नॉवेल को पढ़ते हुए महसूस होता है कि बदलते जमाने में कार्पोरेट या निजी कंप‍नियों की नौकरियों और बदले शहरी रंग-ढंग ने एक चीज जिसे ब‍िल्कुल नहीं बदला है, वो है प्रेम. कहानी का शीर्षक (No Stags Allowed-कुंआरों के लिए अनुमत‍ि नहीं) कनॉट प्लेस की पब या डिस्को थेक की कल्चर का एक ह‍िस्सा भर नहीं बल्क‍ि पूरी कहानी का भी एक हिस्सा है.

जीवन और साहित्य का संस्कारी संग्रह

विचार तरंग: साहित्यिक मूल्यों का पुनर्वास

24 जून 2021

सतत अध्यापन लेखन से प्रेम शंकर त्रिपाठी ने धीरे-धीरे एक बड़ी सी लेखमाला ही गूंथ ली, जिसे विचार सीरीज का नाम देकर प्रकाशित कराया.

 'स्वाँग' का आवरण चित्र [सौजन्यः राजकमल प्रकाशन]

पुस्तक अंशः स्वाँग- जहां जयहिंद, बस एक चुटकुला है

16 जून 2021

ज्ञान चतुर्वेदी का नया उपन्यास 'स्वाँग' कोटरा गांव के जनजीवन के जरिये समाज की विद्रूपता को दिखाता है. वह बताता है कि किसी समय मनोरंजन के लिए किया जाने वाला स्वांग अब लोगों के जीवन का ऐसा यथार्थ बन चुका है, जहां पूरा समाज एक विदूषक की स्थिति को प्राप्त है.

कविता संकलन 'यूँ ही साथ-साथ चलते' का आवरण चित्र

जोशी दंपति के काव्य-संकलन में साझा अनुभव की छुवन

08 अप्रैल 2021

इकतीस वर्ष के सुखद सान्निध्य में जहां कुछ लोगों के दाम्पत्य में दरारें पैदा होने लगती हैं, वहीं इस पूरे कालखंड को किसी साझा कविता संग्रह से उत्सवी बना दिया जाए, यह बहुधा कम कवियों के भाग्य में होता है.

आवरण चित्र-पुस्तकः मुंशी दुर्गा सहाय सुरूर जहानाबादी समग्र

सुरूर जहानाबादी की रचनाओं का जगमग संसार

07 अप्रैल 2021

सुरूर! हमने जीवित रहते तुम्हारा सम्मान नहीं किया.... तुम्हें हाथों से खोकर अब हम तुम्हारा सम्मान कर रहे हैं. यदि तुमने संसार के किसी अन्य देश में जन्म लिया होता तो आज तुम्हारी समाधि पर हीरे-मोती न्योछावर किए जाते, तुम्हारे स्मारक बनते, लोग तुम्हारे नाम पर जान छिड़कते... मुंशी प्रेमचंद

किताब में बंटवारे के दर्द को बताया गया है (फाइल फोटो)

बंटवारा और विस्थापन: अपनी ही मिट्टी से दो बार बिछड़ने की कहानी

27 मार्च 2021

आजादी की खुशी के बीच बिछड़ने के गम को एक किताब में पिरोया गया है. किताब का नाम ‘बंटवारा और विस्थापन’ है, जो कि विजय गुप्ता बंटी ने लिखी है. किताब की खास बात ये है कि बिछड़ने की एक क्रिया जिंदगी में दो बार घटी और ऐसी घटी जिसने जिंदगी ही बदल दी.

पाकिस्तान मेल उपन्यास का आवरण चित्र [सौजन्यः राजकमल प्रकाशन]

खुशवंत सिंह पुण्यतिथि विशेषः पुस्तक अंश- पाकिस्तान मेल

20 मार्च 2021

कहते हैं गुलामी के दिनों में जब खुशवंत सिंह के पिता दिल्ली की लगभग आधी बेशकीमती जमीनों के मालिक थे और राजे-महाराजे, गवर्नर्स और भारत के वायसराय तक उनके यहां रात्रि भोजों पर आते थे, तब खुशवंत पर लिखने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि वे पूर्णकालिक लेखक बन गए.

साहित्योत्सव 2021: चंद्रशेखर कंबार, के श्रीनिवासराव और माधव कौशिक

कवि और कविताओं के नाम रहा 'साहित्योत्सव 2021'

15 मार्च 2021

साहित्य की दुनिया में कोरोना काल की महामारी के बाद यह पहला बड़ा जमीनी आयोजन था. साहित्य अकादमी के त्रिदिवसीय आयोजन 'साहित्योत्सव 2021' में तीनों दिन देश भर से आए साहित्यकारों, समीक्षकों, लेखकों, अनुवादकों और पत्रकारों गहमागहमी बनी रही.

स्वामी रामकृष्ण परमहंस व 'पुरखा पत्रकार का बाइस्कोप' पुस्तक का कवर

रामकृष्ण परमहंस ने जब खुद को कहा था ब्राह्मणी बत्तख

18 फरवरी 2021

धर्म और जाति से परे, सनातन धर्म के मूल, परम तत्व को जीवन में अपनाने वाले, महान आध्यात्मिक संत, समाजसेवी, मानवता के परमपोषक, मां काली के उपासक, स्वामी विवेकानंद के गुरु, ‎दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर पढ़िए साहित्य आजतक की विशेष प्रस्तुति.