कौन कहता है कि इतिहास हमेशा बड़े लोग ही लिखते हैं, कई बार यह किसी आम इनसान के असाधारण साहस द्वारा भी लिखा जाता है. राजधानी का इंडिया इंटरनेशनल सेंटर ऐसी ही एक शाम का गवाह बना. यह शाम 'सम्पा' के नाम रही. 'सम्पा: विश्वास, धैर्य और संकल्प की अनूठी दास्तान'
मात्र 85 पन्नों वाला यह उपन्यास अपनी सरल भाषा, सहज कथानक और वास्तविक जीवन के अनुभवों से इस तरह पगा है कि आप कई दिनों तक इस कहानी को अपने हिसाब से समझने की कोशिश करते रहेंगे. उपन्यास के संवाद इतने स्वाभाविक हैं कि जैसे लगता है कि मानव मनोविज्ञान का सजीव चित्रण किया गया है.
एक साइकॉलजी स्कॉलर यूएस रिटर्न लड़की एक ऐसे मनोवैज्ञानिक शोध में लगी हुई जो अपने आप में अनोखा है. आपने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इस तरह का रिसर्च भी दुनिया में होता है. इस बीच शहर में एक हत्या होती है. फिर कहानी अपने चरम पर होती है.
आकाश वाजपेयी की किताब 'Freedom on Trial' भारत की आजादी की लड़ाई के उन अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है जो अदालतों में लड़े गए मुकदमों से जुड़े हैं. महात्मा गांधी, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक जैसे क्रांतिकारियों के मुकदमों के जरिए यह किताब स्वतंत्रता संग्राम के कानूनी संघर्ष को रोचक और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है.
साहित्य अकादेमी ने बहुप्रतीक्षित अकादेमी पुरस्कारों की घोषणा अंततः कर ही दी. अकादेमी ने मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं में वार्षिक साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिए जाने की जो सूची जारी की है, उनमें आठ कविता-संग्रह, चार उपन्यास, छः कहानी संग्रह, दो निबंध, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण की पुस्तकें शामिल हैं.
अनामिका अनु आधुनिक हिन्दी साहित्य की वह रचनाकार हैं जिन्होंने कविता, कहानी, अनुवाद और संपादन के विभिन्न साहित्यिक क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट छवि बनाई है. वे विज्ञान के क्षेत्र से आती हैं; संभवतः इसी कारण उनका साहित्यिक दृष्टिकोण न केवल संवेदनशील है, बल्कि तार्किक, विश्लेषणात्मक और बहुआयामी भी है.