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समीक्षा

पुत्रिकामेष्टि का आवरण चित्र, अपनी तरह का एक अनूठा संकलन

लीक से अलग हैं 'पुत्रिकामेष्टि' संकलन की कहानियां

24 नवंबर 2021

सच्चिदानंद जोशी अपनी कहानियों में ऐसे शब्द-चित्र उकेरते हैं जो पढ़ते ही हृदय से आ लगते हैं. हर बिन्दु, हर घटना में कोई न कोई सकारात्मक बिन्दु तलाशते हुए वे कहानी खत्म कर देते हैं पर उसकी अनुगूंज देर तक बनी रहती है.

फिल्मकार और लेखक विनोद कापड़ी अपनी पुस्तक के असली नायकों के साथ

पुस्तक अंश: 1232km कोरोना काल में एक असंभव सफर

23 नवंबर 2021

कोरोना लॉकडाउन ने करोड़ों भारतीयों को अकल्पनीय त्रासदी का सामना करने के लिए विवश कर दिया था. नगरों-महानगरों में कल-कारखानों पर ताले लटक गए; काम-धंधे रुक गए और दर-दुकानें बंद हो गईं. इससे एक झटके में बेरोजगार, बेसहारा हो गए मजदूरों के दर्द और जज़्बे की अनूठी दास्तान

Dhaai Chal Book

ढाई चाल: एक दिलचस्प पॉलिटिकल थ्रिलर, जिसने बताई ‘जनता की कीमत’!

18 नवंबर 2021

‘ढाई चाल’ राजस्थान की राजनीति की कहानी है, जिसका मुख्य किरदार राघवेंद्र शर्मा है. राजनीति का उभरता हुआ सितारा जो बहुत कुछ पा लेना चाहता है, लेकिन छात्र राजनीति से जुड़े कुछ पुराने किस्से हैं जो साथ-साथ चलते हैं.

प्रकाश मनुः साहित्य ही जीवन

बाल दिवसः बाल उपन्यासों में बच्चों की दुनिया का रोमांच

14 नवंबर 2021

किसी अच्छे बाल उपन्यास की दुनिया भी बहुत हद तक बच्चों की अपनी दुनिया ही हो जाती है. उपन्यास पूरा पढ़ लेने के बाद भी उस दुनिया के भीतर बाल पाठकों की आवाजाही अनवरत चलती रहती है. बाल दिवस पर पढ़िए वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश मनु के बाल सृजन पर उन्हीं का कथ्य

अविनाश सिंह तोमर के कहानी संग्रह 'ज़ीरो पीरियड' का आवरण-चित्र

अफवाह और इश्क एक उम्र के बाद घुटने टेक देते हैं

28 अक्टूबर 2021

युवा कथाकार अविनाश सिंह तोमर का कहानी संग्रह 'ज़ीरो पीरियड' की कहानियों ने छोटे शहर के आम आदमी के दैनिक क्रियाकलापों व गली-मोहल्लों के बीच जन्म लिया है.

डॉ सुमन सिंह द्वारा चार खंडों में संचयित और संपादित काव्य संग्रह के आवरण-चित्र

प्रेम कविताओं की वसुंधरा है चार खंडों का यह संचयन

26 अक्टूबर 2021

हर पीढ़ी प्रेम को अपनी नजर से निरखती परखती है. डॉ सुमन सिंह के संचयन में सर्वभाषा ट्रस्ट से चार खंडों में प्रकाशित काव्य-संकलन 'सदानीरा है प्यार', 'प्रेम तुम रहना', 'प्रेम गलिन' और 'खिल गया जवाकुसुम' प्रेम को अनूठे रूप में व्यक्त करता है

राजेश जोशी के काव्य संकलन 'उल्लंघन' का आवरण चित्र

'उल्लंघन' तो राजेश जोशी का स्वभाव है, नए संग्रह पर नज़र

23 अक्टूबर 2021

राजेश जोशी एक कवि के रूप में यह ध्‍यान रखते हैं कि उनकी कविता विचारधारा की जड़ मशीनरी से निकली युक्ति या उक्ति न बन जाए. तभी तो कुछ कविताएं यहां ऐसी हैं जो शब्द में नए अर्थ का संधान करती हैं. अर्थविस्तार करती हैं. अपने अभिप्रायों में खिलती हैं.

Eternal Echoes- a book of poems

सद्गुरु की नई पुस्तक 'एटरनल इकोज', तीन दशकों की अद्भुत कविताओं का संकलन

22 अक्टूबर 2021

यह पुस्तक पाठकों को सद्गुरु के जीवन के प्रति अंतर्दृष्टि मसलन 'योग' और 'प्रकृति' के रहस्य से लेकर 'लोग और स्थानों' तक से संबंधित लगभग तीन दशकों की अद्भुत कविताओं का संकलन एक साथ पढ़ने का अवसर देती है. 

अफ़ग़ानिस्तान से ख़त-ओ-किताबत का आवरण-चित्र

पुस्तक अंश: अफ़ग़ानिस्तान से ख़त-ओ-किताबत

19 अक्टूबर 2021

आज की पृष्ठभूमि में 'अफ़ग़ानिस्तान से ख़त-ओ-किताबत' जैसी पुस्तक को पढ़ना यह जानने के लिए ज़रूरी है कि बीती चार दहाइयों ने दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत जगहों में एक, अनेक धर्मों की भूमि रहे उस देश से क्या-क्या छीन लिया है.

ममता कालिया का संस्मरणः जीते जी इलाहाबाद

जीते जी इलाहाबाद: जिए हुए अतीत को पुनर्जीवन

13 अक्टूबर 2021

इलाहाबाद बहुतों का प्रिय रहा है. एक दौर ही था इलाहाबाद साहित्य के केंद्र में था. उसका रुतबा हिंदी में कम से कम बनारस से कम न था. रचनाकारों की अनेक पीढ़ियां पली बढ़ीं और पनपीं.

नारीवाद पर आईं दो किताबें

स्त्री विमर्श पर दो महत्वपूर्ण किताबें जो एक-दूसरे की पूरक पुस्तकें भी हैं

03 अक्टूबर 2021

निवेदिता मेनन की अंग्रेजी किताब सीइंग लाइक ए फेमिनिस्ट का हिंदी अनुवाद- नारीवादी निगाह से और सुजाता की किताब- आलोचना का स्त्रीपक्षः पद्धति, परम्परा और पाठ, अब पाठकों के लिए उपलब्ध हैं.

Dhoomil Samagra

हिंदी का जनकवि जिसे अखाड़ों ने नहीं पहचानाः क्यों ज़रूरी था धूमिल समग्र

03 अक्टूबर 2021

पुस्तकें छापने का क्रम लगातार ही चलता रहता है और चलता रहना चाहिए. लेकिन राजकमल प्रकाशन द्वारा धूमिल समग्र के पेपरबैक का आना एक बेहद स्वागत योग्य और बहुप्रतीक्षित कदम है.

महात्मा गांधी [ फाइल चित्र ]

गांधी-जीवन: एक अकिंचन इच्छा की विराट फलश्रुति

02 अक्टूबर 2021

ऐसा क्या है कि एक राष्ट्र के निर्माण के पीछे, उसकी आजादी के पीछे, उसके आत्मगौरव के पीछे एक ऐसे शख्स का संघर्ष तरोताज़ा है जिसने अफ्रीका जाकर भारतीयों को उनके आत्म गौरव का बोध कराया

महात्मा गांधी [फाइल फोटो ]

गांधी जयंती विशेषः बापू ने कहा- मैं विभाजन कब चाहता था?

02 अक्टूबर 2021

विश्व में जहां महात्मा गांधी के विचार उत्तरोत्तर सम्मान पा रहे हैं, वहीं राष्ट्रपिता के रूप में समादृत इस महानतम शख्सियत के चरित्र और फैसलों पर कई अधकचरे लोग सवाल उठाते हैं.

काव्य संग्रह वह एक और मन और आईपीएस प्रवीण कुमार [इनसेट में]

उम्दा है आईपीएस प्रवीण कुमार का संग्रह 'वह एक और मन'

23 सितंबर 2021

पुलिसिया पेशे में ज़िन्दगी बहुत मसरूफ़ होती है मगर तजुर्बे भी मीलों लंबे होते हैं. सच को सच कहने की क़ुव्वत रखने वाले पुलिस अफसर प्रवीण कुमार का यह कविता संकलन तो यही बताता है.

चंद्रमौली राय की पुस्तक मृत्यु

मौत से जुड़े सवालों के जवाब सुझाती ‘मृत्यु’

21 सितंबर 2021

मृत्यु एक ऐसी घटना है जिसके नाम तक से लोग सिहर जाते हैं. हालांकि यह भी सच है कि मृत्यु और उसके बाद के जीवन को लेकर आम जन का मन जिज्ञासा से भरा रहता है. उनके पास इसे लेकर अनेक सवाल होते हैं. चंद्रमौली राय ने अपनी किताब में इन्हीं सवालों का जवाब देने की कोशिश की है.

उपन्यास 'कंथा' का आवरण चित्र

जब 'भारतेन्दु' नाम को लेकर चिंतित हो गए थे प्रसाद

10 सितंबर 2021

प्रेम, सौन्दर्य, मानवीयता, इतिहास, त्याग और अध्यात्म के अद्भुत चितेरे जयशंकर प्रसाद के जीवन और युग पर केन्द्रित श्याम बिहारी श्यामल के उपन्यास 'कंथा' का अंशः

बसंत चौधरी के काव्य-संकलन 'अनेक पल और मैं' का आवरण चित्र

स्‍वप्‍नमयता का इज़हार हैं बसंत चौधरी की कविताएं

09 सितंबर 2021

कविता केवल रस नहीं, भाव नहीं, रीति नहीं, ध्वनि नहीं, वह एक विचार भी है. हर कविता एक विचार करती है. वह कवि के विवेक का उद्भावक होती है. बसंत चौधरी की कविताएं विचारों और भावों की सहचरी हैं.

अमृत राय और रम्या का आवरण चित्र

जन्मशती विशेष: अमृत राय के ललित निबंध

03 सितंबर 2021

अमृत राय को प्राय: 'कलम के सिपाही' के लेखक के रूप में जाना जाता है जबकि उन्होंने कहानी, उपन्‍यास, आलोचना, नाटक और संस्मरण हर विधा में प्रभूत साहित्य लिखा. उनकी जन्मशती पर उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाल रहे हैं हिंदी के सुधी आलोचक डॉ ओम निश्चल

एक देश बारह दुनिया किताब का कवर

एक देश बारह दुनिया: हाशिये पर छूटे भारत की तस्वीर

30 अगस्त 2021

यह बताने की जरूरत नहीं है कि बेला कौन है. इसे उन्नीस की उम्र में यहां बेचा गया था. पिछले सोलह साल से यह यहीं रहती है. अब यही उसकी बस्ती है, यही उसका घर है. बेला यहीं जीना चाहती है और यहीं मरना भी. मुंबई महानगर में कमाठीपुरा की यह मंडी एशिया की सबसे बड़ी देह मंडी कही जाती है. कमाठीपुरा की यह कोठरी इतनी तंग है कि यहां सिर्फ एक बेड रखने लायक जगह है.

 राजेन्द्र यादव और एक दुनिया: समानान्तर का आवरण-चित्र

जयंती विशेषः क्लीव और बौनों की दुनिया पर राजेन्द्र यादव

28 अगस्त 2021

अफ़सरों और सांसदों की कोठियों से लेकर दस-दस मंज़िले एम्प्लायमेंट एक्सचेंजों के दरवाज़ों के सामने एड़ियां रगड़ती भीड़ है...जो कुछ कर-दिखाने के साहसहीन, साधनहीन सपने देखकर, अपने को निर्ममता से तोड़कर बेच देती है...