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₹600 प्रतिकिलो और ₹2500 प्रतिकिलो वाले घी में क्या होता है अंतर? सेहत के लिए कौन सा बेस्ट, खाने से पहले जान लें

बिलोना और A2 घी के नाम पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स और सामान्य घी के बीच का अंतर केवल कीमत नहीं, बल्कि न्यूट्रिशन वैल्यू भी है. इस आर्टिकल में डॉक्टर से जानेंगे कि आपकी रसोई के लिए कौन सा घी है सबसे सही और कितनी मात्रा में है जरूरी.

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What is the difference between ghee priced at ₹600 per kg and ₹2500 per kg
What is the difference between ghee priced at ₹600 per kg and ₹2500 per kg

Ghee benefits vs market price: भारतीय रसोई में घी का सिर्फ एक खाद्य पदार्थ के तौर पर नहीं, बल्कि ताकत और सेहत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. बाजार में ₹600 प्रति किलो से लेकर ₹2500 प्रति किलो तक घी उपलब्ध है जो उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा करता है. एक न्यूट्रिशन प्लेटफॉर्म की फाउंडर डॉ. शिखा शर्मा के अनुसार, ₹600 और ₹2500 वाले घी में बुनियादी फर्क प्रोडक्शन और क्वालिटी का है. असली देसी घी बनाने के लिए बड़ी मात्रा में दूध की आवश्यकता होती है इसलिए बहुत कम कीमत पर मिलने वाले घी की शुद्धता पर हमेशा सवाल उठते हैं. तो आइए जानते हैं मार्केट में मिलने वाले सस्ते घी और महंगे घी में मुख्य अंतर क्या होता है.

महंगे और सस्ते घी की कीमत का गणित: ₹600 vs ₹2500

सीधा सा कैलकुलेशन यह है कि 1 किलो शुद्ध और अच्छा घी बनाने के लिए लगभग 25 से 30 लीटर दूध की जरूरत होती है. ऐसे में इसकी लागत ही काफी हो जाएगी.

₹600 वाला घी: यह अक्सर बड़े लेवल पर फैक्ट्री में बनता है. इसमें शायद मलाई के साथ-साथ दूध के सॉलिड्स या अन्य चीजें भी मिलाई जाती हैं. इसका मतलब यह नहीं कि यह जहर है लेकिन इसमें उस मात्रा में न्यूट्रिशन नहीं होता जितना आप उम्मीद कर रहे हैं.

₹2000+ वाला घी: यह अक्सर 'A2' काउ घी होता है जो देशी गायों के दूध से बनता है. इसे 'बिलोना' (Bilona) तरीके से बनाया जाता है, जिसमें दही जमाकर उसे मथकर मक्खन निकाला जाता है और फिर धीमी आंच पर गर्म किया जाता है. इसमें मेहनत ज्यादा लगती है, इसलिए इसकी कीमत ज्यादा होती है.

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घी कितना खाना चाहिए?

डॉ. शर्मा स्पष्ट करती हैं कि मॉडर्न न्यूट्रिशन के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में कुल चिकनाई (तेल, मक्खन, घी मिलाकर) 1 छोटा चम्मच प्रति व्यक्ति से ज्यादा नहीं लेनी चाहिए. आयुर्वेद में भी इसे औषधि के रूप में सीमित मात्रा में लेने की सलाह दी गई है. अत्यधिक सेवन, खासकर अगर जीवनशैली सुस्त हो तो कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. हनी एंड स्पाइस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक औसत वयस्क के लिए रोजाना 1-2 चम्मच घी पर्याप्त है जबकि एथलीट अपनी शारीरिक जरूरतों के अनुसार इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं.

गाय VS भैंस का घी

आयुर्वेद के अनुसार, गाय का घी भैंस के घी की तुलना में हल्का और अधिक फायदेमंद माना जाता है. भैंस का घी काफी भारी होता है जो पचने में कठिन हो सकता है. वहीं A2 घी स्वदेशी गायों के दूध से बनता है जो इसे पचाने में आसान और स्वास्थ्य के लिए बेहतर बनाता है.

अगर घर पर दूध की मलाई जमा करके घी निकाला जाए तो यह सबसे सुरक्षित विकल्प है. इसमें एडल्टरेशन (मिलावट) की गुंजाइश खत्म हो जाती है. हालांकि, घी चाहे महंगा हो या घर का बना, इसे सीमित मात्रा में खाना ही सेहत के लिए सही सॉल्यूशन है.

घी खरीदने से पहले ये जानें

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घी को सिर्फ 'चिकनाई' न समझें. इसे औषधि की तरह लें. चाहे आप महंगा घी खाएं या सस्ता, उसे सीमित मात्रा में खाना ही सबसे बड़ा सॉल्यूशन है. आप चाहे कितना भी महंगा घी खरीद लें, अगर दिन भर में बहुत ज्यादा मात्रा में खाएंगे या एक्सरसाइज नहीं करेंगे, तो यह सेहत को नुकसान ही पहुंचाएगा.

किसी भी पैकेट को खरीदने से पहले पीछे का 'लेबल' जरूर पढ़ें. अगर उसमें वेजिटेबल फैट या वनस्पति जैसी चीजें लिखी हैं तो उससे बचें. असली घी में सिर्फ 'मिल्क फैट' होना चाहिए.

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