
आजकल की तेज रफ्तार की जिंदगी में सब कुछ क्विक और इंस्टैंट हो गया है. सुबह की चाय के लिए दूध खत्म हो गया हो या शाम को अचानक घर आए मेहमानों के लिए स्नैक्स मंगवाना हो. अब हमारी उंगलियां सबसे पहले ब्लिंकिट, जेप्टो या स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक-कॉमर्स ऐप्स पर ही जाती हैं.
महज 10 मिनट में घर के दरवाजे पर सामान की डिलीवरी देने वाली ये सर्विस नौकरीपेशा और ऐसे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिनके पास समय की कमी है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जो सामान आपकी उंगलियों के एक टच पर मिनटों में घर पहुंच रहा ह, उसके लिए आप कितनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं.
इस सहूलियत ने जाहिर तौर पर हमारी जिंदगी आसान बनाई है लेकिन क्या वाकई इन ई कॉमर्स ऐप्स से घर का सौदा सस्ता पड़ता है या फिर इससे आपकी जेब कट रही है. यही जानने के लिए हमने इस आर्टिकल में ऑनलाइन और किराना स्टोर पर मिलने वाले सामान के बीच की तुलना की है.
इन चीजों को खरीदना पड़ेगा महंगा
महीने भर का भारी राशन आपके लिए यहां घाटे का सौदा है. आटा, चावल, दाल और तेल जैसी चीजें इन ऐप्स पर एमआरपी या बहुत कम डिस्काउंट पर मिलती हैं. सुपरमार्केट या घर के पास की किराना दुकान की तुलना में ये आपको ऐप्स पर काफी महंगी पड़ सकती हैं.
उदाहरण के लिए हमने ब्लिंकिट पर एक ब्रेड का पैकेट ऑर्डर किया जिसकी कीमत 65 रुपये थी. लेकिन 30 रुपये डिलीवरी चार्ज, 13 रुपये हैंडलिंग चार्ज और 99 रुपये से कम शॉपिंग करने पर आपको जो दंड मिलेगा, उसके लिए आपको 20 रुपये दंडस्वरूप देने होंगे. तब जाकर आपके घर में ब्रेड का पैकेट पहुंचाया जाएगा. इस हिसाब से आपका टोटल बिल होता है 128 यानी एक ब्रेड की कीमत से लगभग दोगुना.

अगर आपको इन पर ऑफर मिल भी रहा है तो उतना ही ऑफर या उससे थोड़ा ज्यादा आपको किराने की दुकान पर मिल जाएगा जहां आपको डिलीवरी और हैंडलिंग चार्ज के नाम पर पैसे नहीं देने होंगे. वहीं, अगर आप दुकान से एक ब्रेड का पैकेट खरीदते हैं तो आपको कोई एक्ट्रा चार्ज नहीं देना होता है. बस आपको कुछ कदम चलकर दुकानदार के पास जाना होगा.
क्या सस्ता और क्या महंगा
अब मेट्रो सिटी ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी 10 मिनट डिलीवरी यानी क्विक-कॉमर्स ऐप्स लोगों की जरूरत बन चुके हैं. आमतौर पर इन ऐप्स को लेकर धारणा है कि इन पर हर चीज बाजार और दुकान की तुलना में कम दाम पर मिलती है लेकिन ये आधा सच है. पूरा सच है कि इन ऐप्स से हर चीज खरीदना समझदारी नहीं है.
बेशक कुछ चीजों पर आपको यहां डिस्काउंट मिल जाएगा लेकिन छूट और टोटल खर्च में बड़ा अंतर है. हो सकता है कि छूट के चक्कर में आप इन ऐप्स पर किराने से ज्यादा खर्च कर रहे हों. इन ऐप्स पर कुछ चीजें बेहद महंगी मिलती हैं जबकि कुछ चीजों पर अच्छे ऑफर्स के कारण वो सस्ती भी पड़ती हैं.
ताजी सब्जियां और फल
अगर बात फल और सब्जी की जाए तो यहां हम आपको इन्हें ऑनलाइन खरीदने की तो बिलकुल भी सलाह नहीं देंगे. कई ऐप्स ताजी सब्जियों और फल पर डिस्काउंट देते हैं. लेकिन अगर आप बाजार से इनकी तुलना करेंगे तो ये आपको महंगे ही पड़ेंगे. उदाहरण के लिए टमाटर हमें इस समय लोकल मार्केट में 40 रुपये किलो मिल जाएगा लेकिन ब्लिंकिट पर डिस्काउंट लगाकर हमें 31 रुपये में केवल आधा किलो ही मिल रहा है.
यहां ये भी समस्या है कि आपको अगर खाना पकाने के लिए केवल 2 या 3 सब्जी चाहिए तो इसके लिए आपको कई चार्जेस लगाकर दोगुना पैसा देना होगा. हमने आपकी संतुष्टि के लिए खुद इसका रियलिटी चेक किया और नतीजा आपके सामने है.
ऐसे करें प्राइस टेस्ट

10 मिनट की डिलीवरी का गणित भी जान लें
अब जरा अंतिम गणित समझिए. 4 सब्जियों के 181 रुपये दिखाकर ऐप ने आपको 34 रुपये का डिस्काउंट तो दे दिया लेकिन हैंडलिंग और डिलीवरी चार्ज के रूप में आपसे वो एस्क्स्ट्रा 43 रुपये भी वसूल रहे हैं और सिर्फ इस तरह आपकी जेब से कुल 190 रुपये कट जाते हैं. यानी सिर्फ 10 मिनट की सुविधा के नाम पर सब्जी के आपको लोकल मार्केट से अधिक दाम और 40 रुपये एक्स्ट्रा देने पड़ रहे हैं. यही वह छिपा हुआ गणित है जो आपके मंथली बजट का कबाड़ा कर देता है और आपको लगता है कि ऑनलाइन कम कीमत पर शॉपिंग कर रहे हैं फिर भी आपका खर्चा बढ़ रहा है.
इतना ही नहीं जब आप बाजार में ठेले वाले से खुद से चुनकर अच्छी-अच्छी और ताजी सब्जी चुनते हैं और पूरी संतुष्टि के बाद ही उन्हें तौलवाकर घर लाते हैं...ये सुविधा आपको 10 मिनट वाला डिलीवरी ऐप नहीं देता है. ऐसा कई बार होता है कि ऐप से मंगाई गई सब्जी उतनी फ्रेश और अच्छी क्वालिटी की नहीं होती है और इस तरह आपके वो पैसे भी यूं ही वेस्ट हो जाते हैं. इसलिए फल और सब्जी खुद जाकर ठेले वाले से खरीदना ही आपके लिए फायदे का सौदा है.
सुविधा के बदले एक्स्ट्रा चार्ज
सुविधा के नाम पर हैंडलिंग फीस, डिलीवरी चार्ज, सर्ज प्राइस और किसी चीज की बाजार से ज्यादा कीमत पहली नजर में छोटा लगती है लेकिन महीने के आखिर में ये एक बड़ा अमाउंट बन जाती है. लेकिन हम यहां आपको जो प्राइस टेस्ट करा रहे हैं, उसे देखकर आप भी हर छोटी चीज के लिए ऐप खोलने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर हो जाएंगे.
ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में कोई छूट नहीं
अब अगर रोज की जरूरत की चीजें जैसे शैंपू और कॉस्मेटिक्स की बात की जाए तो शैंपू, मेकअप, कॉस्मेटिक्स और सीरम जैसी चीजों पर इन ऐप्स पर बड़े डिस्काउंट नहीं मिलते. इन्हें ई-कॉमर्स वेबसाइट्स या ब्रांड स्टोर से लेना ज्यादा किफायती होता है.
प्रीमियम और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स भी महंगे
ऑर्गेनिक दालें, शुद्ध शहद या प्रीमियम नट्स जैसी चीजों की कीमतें क्विक-कॉमर्स ऐप्स पर काफी ज्यादा होती हैं.
डेयरी प्रोडक्ट्स और ब्रेड की कीमत भी बराबर
दूध, दही, पनीर और ब्रेड जैसी रोजमर्रा की चीजें लगभग ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमत भी सेम ही होती है. लेकिन कैशबैक और बैंक ऑफर्स की वजह से यह सौदा और सस्ता हो सकता है. लेकिन रोज की छोटी-मोटी चीजों में यह भी काम नहीं करता है.
क्या है सस्ता और किन चीजों को खरीदना है फायदेमंद
स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, चिप्स, बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स और चॉकलेट्स पर इन ऐप्स पर अक्सर बाय वन गेट वन या कॉम्बो डील्स चलती रहती हैं जिससे ये सस्ते पड़ते हैं.
एमआरपी और डिस्काउंट का असली गणित
ब्लिंकिट जैसे ऐप्स पर अक्सर बड़े-बड़े अक्षरों में कम दाम या बंपर डिस्काउंट लिखा दिखाई देता है. लेकिन जब आप गहराई से तुलना करेंगे तो पाएंगे कि कई ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पर लोकल किराना वाले भी 5 से 10 फीसदी की छूट आसानी से दे देते हैं. वहीं, खुले सामान (जैसे दाल, चावल, चीनी) के मामले में लोकल किराना दुकान हमेशा बाजी मार ले जाती है क्योंकि ब्लिंकिट पर केवल पैकेट बंद और प्रीमियम ब्रांड्स के विकल्प ज्यादा होते हैं जिनकी कीमत अमूमन अधिक होती है.
ऑनलाइन Vs किराने की दुकान

डिलीवरी, हैंडलिंग और सर्ज प्राइजिंग का खेल
लोकल किराना दुकान से सामान लेने पर आपको केवल सामान की कीमत चुकानी होती है. इसके उलट ब्लिंकिट पर सामान सस्ता दिखने के बाद भी फाइनल बिल बढ़ जाता है. इसका कारण है डिलीवरी फीस, कनविनिएंस/हैंडलिंग फीस और भारी बारिश या पीक ऑवर्स के दौरान लगने वाला सर्ज चार्ज. कई बार छोटी छोटी चीजों को बार-बार मंगाने पर ये एक्स्ट्रा चार्जेस मिलकर एक बड़ा खर्चा बन जाते हैं.
कॉम्बो पैक्स और साइज का अंतर
ब्लिंकिट पर कई बार आपको छोटे पैकेट्स पर कोई डिस्काउंट नहीं मिलता या फिर वो आउट ऑफ स्टॉक होते हैं. ग्राहकों को मजबूरन बड़े या कॉम्बो पैक्स खरीदने पड़ते हैं जिससे उनका तुरंत बिल बढ़ जाता है. जबकि लोकल दुकान पर आपको आपकी जरूरत के हिसाब से सामान मिलता है. यहां आप 5 या 10 रुपये में भी चीज खरीद सकते हैं जिसके लिए आपको एक रुपया भी एक्स्ट्रा नहीं देना होगा. यहां तक कि आपको सामान कैरी करने के लिए पॉलीबैग के भी पैसे नहीं चुकाने होंगे.
Zepto, Instamart और Blinkit के बीच अंतर
हमने आपको ये तो बता दिया कि ऑनलाइन और किराने वाले के बीच क्या अंतर है. अब जरा ऑनलाइन खासकर ग्रॉसरी की चीजें मंगाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप्स के बीच का अंतर भी जान लेते हैं. यहां हमने 4 चीजें लगभग सेम वजन की तीनों ऐप्स से मंगाई और आप तीनों के बीच फर्क कर खुद देख सकते हैं.
जेप्टो से मंगाया गया सामान

Instamart से मंगाया गया सामान


ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट में कौन ज्यादा सस्ता
हमने ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट तीनों से सेम सामान मंगाया जो वजन में भी लगभग सामान था. जेप्टो में मुझे 4 चीजों के लिए 254 रुपये देने पड़े. जेप्टो ने मुझसे कोई डिलीवरी फी और हैंडलिंग चार्ज नहीं लिया. इंस्टामार्ट ने मुझसे इन्हीं 4 चीजों के लिए 235 रुपये प्लस 10 रुपये हैंडलिंग फी ली जो मिलाकर 245 रुपये हुए. हालांकि इन्होंने मुझसे डिलीवरी फी नहीं ली थी.
जबकि सेम सामान के लिए मुझसे ब्लिंकिट ने 234 रुपये लिए. साथ ही उन्होंने 12 रुपये डिलीवरी चार्ज और 9 रुपये हैंडलिंग चार्ज भी लिया. यानी टोटल हुआ 255.
अगर तीनों ऐप्स की तुलना की जाए तो मुझे इंस्टामार्ट से ब्लिंकिट और जेप्टो की तुलना में 10 रुपये की बचत हुई. हालांकि सामान कार्ट में डालने और तीनों की तुलना करते हुए चीजों का रेट 20 से 40 मिनट के गैप पर बदल रहा था. यानी तीनों के रेट्स में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है.
हालांकि डिलीवरी और हैंडलिंग फीस इस अंतर को बढ़ा देती है. अगर आप यही सामान किराने की दुकान से खरीदते हैं तो शायद आपको प्याज और अदरक कम दाम में मिल जाए. साथ ही आपका डिलीवरी और हैंडलिंग चार्ज भी बचेगा और हो सकता है कि दो-चार हरी मिर्च भी फ्री में मिल जाए.
ऐसे वक्त पर काम आती है 10 मिनट डिलीवरी
आखिरी वक्त पर मेहमान आने पर मंगाए जाने वाले स्नैक्स या और अचानक कोई जरूरत की चीज खरीदने में कोई नुकसान नहीं है क्योंकि ऐसे समय में आपको ये सुविधा पैसे से ज्यादा कीमती लगती है क्योंकि ये आपका समय बचाती है. इसलिए एक स्मार्ट खरीदार के तौर पर भारी और महीने भर के राशन के लिए स्थानीय किराना दुकान या सुपरमार्केट का रुख करना करना और अचानक जरूरत होने पर इन 10 मिनट ऐप्स का फायदा उठाना समझदारी है.
कौन सा ऑप्शन है फायदेमंद?
अगर आपको अचानक किसी चीज की जरूरत है और समय की कमी है तो ब्लिंकिट एक वरदान है. लेकिन अगर आप महीने भर का राशन एक साथ खरीद रहे हैं तो लोकल किराना दुकान या थोक बाजार आज भी आपकी जेब के लिए सबसे ज्यादा किफायती और समझदारी भरा विकल्प है.