सड़क किनारे एक शख्स बैठा था. चलने के लिए बैसाखी का सहारा ले रहा था. राहगीर उसे देखकर रुक रहे थे. कोई पैसे दे रहा था, कोई दुआ. लोगों को लग रहा था कि सामने बैठा व्यक्ति दिव्यांग है और मदद का हकदार है. लेकिन कुछ लोगों को उस पर शक हुआ. उन्होंने दूर से उसका पीछा करना शुरू किया. कैमरा लगातार रिकॉर्डिंग करता रहा. फिर कुछ देर बाद जो तस्वीर सामने आई, वही अब सोशल मीडिया पर वायरल है.
वीडियो में दावा किया जा रहा है कि जो शख्स कुछ देर पहले खुद को दिव्यांग बताकर भीख मांग रहा था, वही बाद में सामान्य तरीके से चलता दिखाई दिया. आसपास मौजूद लोगों ने उसे रोककर सवाल भी किए और पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड कर ली.
यहां देखें Video
यह वीडियो कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का है. सोशल मीडिया पर इसे लाखों बार देखा और साझा किया जा चुका है. वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है.
वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद कुछ लोगों का कहना है कि अगर वीडियो में दिख रहे दावे सही हैं, तो यह लोगों की संवेदनाओं के साथ धोखा है. वहीं कई लोग यह भी कह रहे हैं कि सभी भिखारियों या दिव्यांग लोगों को शक की नजर से नहीं देखा जा सकता. कई लोग मजबूरी और गंभीर परिस्थितियों में भीख मांगने को विवश होते हैं.
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फिलहाल यह साफ नहीं है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, संबंधित व्यक्ति की पहचान क्या है या घटना के बाद पुलिस अथवा प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है. लेकिन इस वायरल वीडियो ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है. अगर कोई व्यक्ति सहानुभूति हासिल करने के लिए खुद को झूठा दिव्यांग बताता है, तो नुकसान सिर्फ उन लोगों का नहीं होता जो मदद करते हैं. सबसे बड़ा नुकसान उन असली जरूरतमंदों का होता है, जिनकी मदद पर ऐसे मामलों के बाद लोग भरोसा करना कम कर देते हैं.