जब भी बारिश आना शुरू हो जाती है तो खुले में खड़े लोग कोई ना कोई शेल्टर खोजते हैं और भागना शुरू कर देते हैं. बारिश शुरू होने के बाद सबसे पहले लक्ष्य होता है कि कोई ना कोई शेल्टर मिल जाए. लेकिन, बारिश में भागना कितना सही है, इस बारे में कभी आपने सोचा है? आमतौर पर हम यही मानते हैं कि जितनी जल्दी बारिश से निकलेंगे, उतना कम भीगेंगे. लेकिन, इस सवाल का जवाब इतना सीधा नहीं है. वैज्ञानिक पिछले करीब 50 साल से यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बारिश में कम भीगने का सबसे सही तरीका क्या है? तो जानते हैं रिसर्च क्या कहती हैं...
1976 में भी हुई थी रिसर्च
हार्वर्ड के गणितज्ञ डेविड ई. बेल ने 1976 में इस सवाल का गणितीय जवाब दिया था और रिसर्च द मैथेमैटिकल गैजेट में प्रकाशित हुआ था. बेल ने बारिश की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बताया कि अगर बारिश सीधे ऊपर से नीचे गिर रही है, तो दौड़ना बेहतर है. आप जितनी तेजी से अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे, उतने कम समय तक बारिश के संपर्क में रहेंगे. यही बात तब भी लागू होती है जब हवा आपके सामने से आ रही हो. इस स्थिति में तेज दौड़ना आपको कम भीगा सकता है.
लेकिन, यहां एक दिलचस्प बात है. बेल की गणना के मुताबिक, बहुत तेज दौड़ने पर भी फर्क बहुत बड़ा नहीं होता. यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति विश्व रिकॉर्ड जैसी गति से दौड़े, तो सामान्य गति की तुलना में वह करीब 10 फीसदी ही कम भीगेगा. यानी सिर्फ बारिश से बचने के लिए जान लगाकर दौड़ना जरूरी नहीं है.
अगर हवा पीछे से आ जाए तो क्या होगा?
अब सबसे दिलचस्प स्थिति आती है जब हवा आपके पीछे से आ रही हो. ऐसी स्थिति में बारिश की बूंदें भी हवा के साथ आपकी दिशा में आगे बढ़ रही होती हैं. बेल के हिसाब से यहां सबसे तेज दौड़ना जरूरी नहीं है. सरल भाषा में कहें तो अगर हवा पीछे से आ रही है, तो हवा की स्पीड के करीब चलना या हवा की स्पीड के बराबर भागना कुछ परिस्थितियों में सबसे कम भीगने वाला विकल्प हो सकता है. यानी यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि बारिश में हमेशा जितना तेज भागेंगे, उतना कम भीगेंगे.
हाइट का भी पड़ता है असर
साल 2017 की एक रिसर्च में एक और फैक्टर जोड़ दिया गया. साल 2017 में जर्नल ऑफ द वॉशिंगटन एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन ने इस सवाल को और आगे बढ़ाया. इसमें सिर्फ चलने या दौड़ने की गति ही नहीं, बल्कि इंसान की ऊंचाई और शरीर के आकार को भी ध्यान में रखा गया. इस मॉडल के मुताबिक छोटे कद के व्यक्ति कुछ परिस्थितियों में लंबे व्यक्ति की तुलना में कम भीग सकते हैं. वजह यह है कि शरीर का आकार और बारिश के संपर्क में आने वाला हिस्सा भी महत्वपूर्ण होता है.