9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया. इस बार निशाना नागासाकी था. इसके परिणामस्वरूप जापान ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया. तीन दिन पहले हिरोशिमा में हुई तबाही भी जापानी युद्ध परिषद को पॉट्सडैम सम्मेलन की बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग को स्वीकार करने के लिए राजी करने के लिए पर्याप्त नहीं थी. इसलिए अमेरिका ने दूसरा परमाणु बम जापान पर गिराने की प्लानिंग कर ली थी. इसके लिए 11 अगस्त की डेट तय की गई थी. लेकिन, खराब मौसम के पूर्वानुमान की वजह से 9 अगस्त को ही नागासाकी पर एटम बम गिरा दिया गया.
जिस परमाणु बम को नागासाकी पर गिराया गया, उसे 'फैट मैन' उपनाम दिया गया था. उस सुबह तड़के 1:56 बजे बी-29 बमवर्षक विमान ने फैट मैन के साथ उड़ा भरी. यह विमान मेजर चार्ल्स डब्ल्यू. स्वेनी की कमान में था. जिसका नाम उसके नियमित कमांडर फ्रेडरिक बॉक के नाम पर बॉकस्कर रखा गया था. प्लेन ने पश्चिमी प्रशांत महासागर में टिनियन द्वीप से उड़ान भरी थी.
नागासाकी एक जहाज निर्माण केंद्र था. बम सुबह 11:02 बजे शहर से 1,650 फीट ऊपर गिराया गया. विस्फोट से 22,000 टन टीएनटी के बराबर एनर्जी पैदा हुआ. शहर के चारों ओर की पहाड़ियों ने बम की विनाशकारी शक्ति को सीमित कर दिया. फिर भी तत्काल 39,000 लोग मारे गए. माना जाता है कि 1945 के अंत तक रेडिएशन के संपर्क में आने से 20,000 से 40,000 और लोगों की मृत्यु हो गई. सटीक आंकड़े उपलब्ध कराना असंभव है, क्योंकि विस्फोट में शव नष्ट हो गए थे और रिकॉर्ड मिट गए थे.
जनरल लेस्ली आर. ग्रोव्स, जो मैनहट्टन प्रोजेक्ट को ऑर्गनाइज करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति थे. उसने परमाणु विस्फोट के उत्पादन और वितरण की समस्या का समाधान किया. उन्होंने अनुमान लगाया था कि 17 या 18 अगस्त तक जापान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए एक और परमाणु बम तैयार हो सकता है - लेकिन इसकी आवश्यकता नहीं पड़ी.
हालांकि, जापानी युद्ध परिषद में मतभेद बना रहा. क्योंकि, एक सदस्य ने कहा कि जापान युद्ध हार गया है, ऐसा कहना अभी बहुत जल्दबाजी होगी. वहीं सम्राट हिरोहितो ने परिषद से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि युद्ध जारी रखने से केवल जापानी जनता का विनाश ही होगा. जापान के सम्राट ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की अनुमति दे दी , जिससे द्वितीय विश्व युद्ध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया.