श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को पूर्व आतंकी की हत्या के मामले में एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई. मारा गया शख्स तहरीक-उल-मुजाहिदीन का पूर्व प्रमुख अब्दुल गनी डार था. उसे अब्दुल्ला गजाली के नाम से भी जाना जाता था. वह जमीयत अहले हदीस का मौलवी भी था.
बडगाम जिले के बीरवाह के रहने वाले और तहरीक-उल-मुजाहिदीन के पूर्व प्रमुख गनी डार की हत्या 13 फरवरी, 2020 को श्रीनगर के मैसूमा इलाके की एक मस्जिद के अंदर श्रीनगर के ही रहने वाले गुलाम मोहि-उद-दीन डार ने कर दी थी.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर पुलिस ने मैसूमा पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 03/2020 के तहत दर्ज 2020 के हत्या के मामले में आरोपी को दोषी ठहराने में सफलता हासिल की है.
पुलिस प्रवक्ता ने कहा, 'अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत रस्सू, बडगाम के रहने वाले अब्दुल गनी डार की हत्या के लिए श्रीनगर के रहने वाले गुलाम मोहि-उद-दीन डार को दोषी ठहराया.'
प्रवक्ता ने कहा कि सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि हालांकि अपराध गंभीर और जघन्य था, लेकिन यह मौत की सजा के हकदार दुर्लभतम मामलों (rarest of rare cases) की श्रेणी में नहीं आता था.
अदालत ने दोषी को ₹50,000 के जुर्माने के साथ आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई. जुर्माने की राशि वसूल होने पर मृतक के कानूनी वारिसों को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी. कानून के अनुसार, दोषी को न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि का लाभ (set-off) भी दिया गया है.
सजा सुनाते वक्त अदालत ने इस बात का गंभीरता से संज्ञान लिया कि यह बर्बर हमला (लोहे की रॉड से) मस्जिद परिसर के अंदर हुआ था. अदालत ने कहा कि पूजा स्थल पर हिंसा सार्वजनिक शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और पवित्र संस्थानों की पवित्रता को नुकसान पहुंचाती है. CCTV फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य सबूतों से आरोपी का अपराध साबित हुआ.
पीड़ित परिवार की मुश्किलों, खासकर उनके बच्चों की निर्भरता को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने जम्मू-कश्मीर पीड़ित मुआवज़ा योजना, 2019 के तहत ₹7 लाख का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया. यह राशि जम्मू-कश्मीर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के जरिए से तय समय सीमा के भीतर जारी की जानी है.