किराए के मकान में रहने वाले ज्यादातर लोग शिफ्ट होने से पहले मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट या एडवांस किराया देते हैं. यह रकम कई बार एक महीने के किराए जितनी होती है, तो कई मामलों में 2 से 6 महीने तक के किराए के बराबर भी ली जाती है. लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब मकान खाली करने के बाद मकान मालिक यह पैसा वापस देने से मना कर देता है या बिना वजह कटौती करने लगता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. कानून आपको कुछ अधिकार देता है, जिनकी मदद से आप अपना पैसा वापस पा सकते हैं.
एडवांस किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट में क्या अंतर है?
पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम बताते हैं कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एडवांस किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट एक जैसी चीजें नहीं हैं. एडवांस किराया वह पैसा होता है, जो आने वाले महीनों के किराए के रूप में पहले ही दिया जाता है. सिक्योरिटी डिपॉजिट घर की सुरक्षा के लिए लिया जाता है, ताकि अगर किरायेदार घर को नुकसान पहुंचाए या कोई बिल बकाया छोड़ दे, तो उसकी भरपाई की जा सके. अगर आपने घर सही हालत में खाली किया है और सभी बिल चुका दिए हैं, तो मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करना चाहिए.
किन परिस्थितियों में मकान मालिक पैसा काट सकता है?
हर कटौती गलत नहीं होती. कुछ मामलों में मकान मालिक पैसे काट सकता है, जैसे- घर को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया हो. बिजली, पानी या मेंटेनेंस का बिल बाकी हो या किराया बकाया हो या रेंट एग्रीमेंट में पहले से कटौती का नियम लिखा हो. लेकिन सामान्य टूट-फूट, जैसे दीवार का हल्का रंग उड़ना या रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाला मामूली नुकसान, इसके नाम पर पूरी सिक्योरिटी रोकना सही नहीं माना जाता.
सबसे पहले क्या करें?
अगर मकान मालिक पैसा नहीं लौटा रहा है, तो सबसे पहले उससे शांति से बात करें. कई बार बातचीत से ही मामला सुलझ जाता है. बात करते समय इन ज को अपने पास रखें- रेंट एग्रीमेंट, सिक्योरिटी जमा करने की रसीद या बैंक ट्रांजैक्शन, किराया देने का रिकॉर्ड, मकान खाली करते समय की फोटो या वीडियो और बिजली-पानी के बिल जमा होने का प्रूफ (रसीद). ये सभी सबूत बाद में आपके काम आएंगे.
अगर बार-बार कहने के बाद भी पैसा नहीं मिलता, तो मकान मालिक को वॉट्सअप ईमेल या लिखित नोटिस भेजें. इसमें साफ लिखें कि आपने कब मकान खाली किया और कितनी राशि वापस मिलनी है. लिखित रिकॉर्ड होने से बाद में यह साबित करना आसान हो जाता है कि आपने पैसा मांगा था.
कानूनी नोटिस भी भेज सकते हैं
यदि मकान मालिक फिर भी पैसा वापस नहीं करता, तो किसी वकील की मदद से लीगल नोटिस भेजा जा सकता है. कई मामलों में नोटिस मिलते ही मकान मालिक पैसा लौटा देता है, क्योंकि उसे पता होता है कि मामला अदालत तक पहुंच सकता है.
कोर्ट में भी कर सकते हैं शिकायत
अगर नोटिस के बाद भी समाधान नहीं निकलता, तो आप अपने दावे के आधार पर संबंधित सिविल कोर्ट में मामला दर्ज करा सकते हैं. अगर रकम कम है और मामला उपभोक्ता सेवा से जुड़ा बनता है, तो परिस्थितियों के अनुसार कानूनी सलाह लेकर उचित मंच पर भी शिकायत की जा सकती है.
भविष्य में इन बातों का रखें ध्यान
ऐसी परेशानी से बचने के लिए शुरुआत से ही कुछ सावधानियां बरतें. हमेशा लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाएं. नकद की बजाय बैंक से भुगतान करें. सिक्योरिटी डिपॉजिट की रसीद जरूर लें. मकान में प्रवेश और मकान छोड़ते समय फोटो और वीडियो बना लें. मकान खाली करते समय मकान मालिक से लिखित पुष्टि लेने की कोशिश करें कि घर सही हालत में सौंप दिया गया है.
मकान मालिक बिना उचित कारण आपके एडवांस किराए या सिक्योरिटी डिपॉजिट को हमेशा के लिए नहीं रोक सकता. अगर आपने समय पर किराया दिया है, घर को नुकसान नहीं पहुंचाया है और सभी बिल चुका दिए हैं, तो आपका पैसा वापस मिलना चाहिए. ऐसे मामलों में घबराने की बजाय सभी दस्तावेज संभालकर रखें, पहले बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाएं. सही जानकारी और सबूत होने पर अपना पैसा वापस पाना काफी आसान हो जाता है.