घर बनाने के कई चरण होते हैं. हर एक लेवल के अपने अलग फायदे हैं. इसमें से किसी भी एक को अगर स्किप कर दिया जाए, तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. इनमें से एक है डीपीसी. बिल्डिंग बनाने में आरसीसी के बारे में तो सबको पता होगा, लेकिन ये डीपीसी क्या है और इसके क्या फायदे हैं? यहां हम इन्हीं चीजों पर बात करेंगे.
घर बनाना एक दिन का काम नहीं होता है. इसके लिए काफी सारी तैयारियां की जाती है. इसमें घर के नक्शे और डिजाइन से लेकर, कंस्ट्रक्शन के तरीके और बिल्डिंग मटेरियल के सिलेक्शन तक पर सोच- समझकर फैसला लेना होता है. ऐसे में घर बनाने समय काफी सारी सावधानियां बरतनी होती है. बजट जरूरत से ज्यादा न बढ़ जाए, इसलिए कई नई तरीकों के इस्तेमाल करने से बचते हैं.
फिर भी अपने घरों की दीवारों को सीलन से बचाने के जो बेसिक उपाय हैं. उन्हें तो जरूर कर लेना चाहिए. कंस्ट्रक्शन में DPC ऐसा ही एक उपाय है. डीपीसी यानी डैम्प- प्रूफ कोर्स. जब घर की नींव दी जाती है तो सतह से ऊपर कुछ ऊंचाई तक दीवार खड़ी होने के बाद डीपीसी करवाना चाहिए. डीपीसी दरअसल प्लींथ की ऊंचाई पर किया जाता है.
प्लींथ लेवल जमीन से फर्श की ऊंचाई का स्तर होता है. प्लींथ लेवल पर ईंटों के ऊपर कंक्रीट की पतली सी लेयर दी जाती है. यह महीन बजरी या बिटुमिन और वॉटरप्रूफ केमिल और सीमेंट से मिलकर बनी होती है. प्लींथ लेवल पर डीपीसी करने के बाद फिर इसके ऊपर दीवार खड़ी की जाती है.
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डीपीसी का मतलब ही होता है - नमी रोधी कंक्रीट. यह पीसीसी के समान है. इसे आमतौर पर भवन या स्ट्रक्चर के प्लिंथ स्तर के नीचे लगाया जाता है. इसकी मोटाई लगभग 50 मिमी होती है. इसे जमीन से लगभग 1 फीट या स्ट्रक्चर के डिजाइन के अनुसार रखा जाता है.जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है. इसका मुख्य उद्देश्य दीवारों और फर्श को नमी से बचाना है.
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डीपीसी के कई फायदे हैं. यह जमीन से दीवारों में आने वाली नमी को रोकती है. इसकी वजह से फर्श में भी नहीं नहीं आती है. यही वजह है कि डीपीसी किए हुए घरों की दीवारों में सीलन नहीं लगती है. इसे करवा लेने के बाद सीलन, दीवारों की पपड़ी उजड़ना और फंगस जैसी समस्याओं से निजात मिल जाता है.