रूस के इतिहास में एक ऐसी भी महारानी हुई, जिसने अपने पति को ही गद्दी से हटाकर सत्ता हथिया ली थी. वह जितना अपने शातिर और खतरनाक चालों के लिए जानी जाती हैं. उससे कहीं ज्यादा उनके लव- अफेयर्स के किस्से चर्चित रहे हैं. चलिए जानते हैं रूस की इस महारानी की कहानी कितनी दिलचस्प है.
9 जुलाई 1762 को रूस में एक ऐसी महिला ने सत्ता अपने हाथ में ले ली, जो आगे चलकर रूस की सबसे ताकतवर और खतरनाक शासकों में गिनी गई. उसका नाम था कैथरीन- 2, जिन्हें इतिहास में कैथरीन द ग्रेट के नाम से जाना जाता है.
कैथरीन ने अपने पति और रूस के नए सम्राट पीटर तृतीय के खिलाफ सेना का समर्थन हासिल किया और खुद को रूस की एकमात्र शासक घोषित कर दिया. इसके महज आठ दिन बाद पीटर की हत्या कर दी गई. कैथरीन ने करीब 34 साल तक रूस पर शासन किया और वह रूस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महिला शासक बनीं.
कैथरीन की निजी जिंदगी भी कम दिलचस्प नहीं थी. उनके कई प्रेम संबंध रहे. इतिहास में उनके करीब 20 से ज्यादा प्रेमियों के नाम अक्सर बताए जाते हैं. उनके प्रेमियों को रिश्ता खत्म होने के बाद भी बड़े इनाम मिलते थे. किसी को जमीन, किसी को महल तो किसी को ऊंचे पद.
कैथरीन नाम भी उनका असली नाम नहीं था
जिस महिला को दुनिया कैथरीन द ग्रेट के नाम से जानती है. उसका जन्म रूस में हुआ ही नहीं था. उनका असली नाम सोफी वॉन अनहाल्ट-जरब्स्ट था. उनका जन्म 1729 में उस इलाके में हुआ था, जो आज पोलैंड का हिस्सा है. उनके पिता प्रशिया के एक छोटे राजकुमार थे. परिवार बहुत अमीर नहीं था, लेकिन उनकी मां का संबंध जर्मनी के एक प्रतिष्ठित शाही परिवार से था.
इसी पारिवारिक रिश्ते की वजह से सोफी के लिए यूरोप के शाही परिवारों में शादी के रास्ते खुले हुए थे. जब सोफी सिर्फ 15 साल की थीं, तब उन्हें रूस की महारानी एलिजाबेथ ने रूस आने का न्योता दिया. एलिजाबेथ, रूस के मशहूर शासक पीटर द ग्रेट की बेटी थीं.

एलिजाबेथ अपने भतीजे ग्रैंड ड्यूक पीटर के लिए दुल्हन तलाश रही थीं. पीटर आगे चलकर रूस का सम्राट बनने वाला था. सोफी रूस पहुंचीं और जल्द ही एलिजाबेथ को पसंद आ गईं. अगले साल उनकी शादी की तैयारी शुरू हो गई. शादी से पहले सोफी ने रूसी ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म अपना लिया और अपना नाम बदलकर कैथरीन रख लिया.
21 अगस्त 1745 को कैथरीन और पीटर की शादी हुई. लेकिन यह शादी शुरुआत से ही खुशहाल नहीं थी. कैथरीन और पीटर की शादीशुदा जिंदगी में शुरुआत से ही तनाव था. दोनों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे. दोनों के दूसरे लोगों के साथ संबंध रखने की भी चर्चा रही.
कैथरीन ने बाद में अपने संस्मरणों में अपने पति के साथ रिश्ते को लेकर कई संकेत दिए. उन्होंने यहां तक इशारा किया कि उनके बच्चों के पिता पीटर नहीं थे. हालांकि ज्यादातर इतिहासकार मानते हैं कि उनके पहले बेटे पॉल के पिता पीटर ही थे.
पति राजा बना तो कैथरीन ने उससे सत्ता छीन ली
समय के साथ कैथरीन की महत्वाकांक्षा बढ़ती गई और वह रूस की सत्ता के केंद्र में अपनी जगह मजबूत करने लगीं. 1762 की शुरुआत में महारानी एलिजाबेथ की मौत हो गई और पीटर रूस का सम्राट बन गया.
लेकिन पीटर के कई दुश्मन थे. उसके खिलाफ साजिशें शुरू हो गईं. कुछ लोग उसे हटाकर उसके छोटे बेटे पॉल को गद्दी पर बैठाना चाहते थे. कैथरीन ने इस मौके को अपने लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया.
उन्होंने अपने करीबी और प्रेमी ग्रिगोरी ओर्लोव की मदद से सेना का समर्थन हासिल किया. सेंट पीटर्सबर्ग की सेना की रेजिमेंट उनके साथ आ गईं. इसके बाद जुलाई 1762 में कैथरीन ने खुद को रूस की एकमात्र शासक घोषित कर दिया. इस तरह पीटर को गद्दी छोड़नी पड़ी.
गद्दी छोड़ने के सिर्फ 8 दिन बाद पति की मौत
कैथरीन के सत्ता संभालने के आठ दिन बाद ही पीटर तृतीय की हत्या कर दी गई. बताया जाता है कि कैथरीन के समर्थक इसमें शामिल थे. पीटर की मौत ने कैथरीन के शासन की वैधता पर सवाल भी खड़े किए. हालांकि इसके बावजूद कैथरीन सत्ता पर मजबूती से काबिज रहीं और अगले 34 साल तक रूस पर शासन किया.
कैथरीन के 20 से ज्यादा प्रेमी थे?
कैथरीन द ग्रेट की निजी जिंदगी का सबसे चर्चित हिस्सा उनके प्रेम संबंध रहे. उनके कई प्रेमियों के नाम इतिहास में दर्ज हैं और अलग-अलग स्रोतों में संख्या अलग बताई जाती है. लोकप्रिय इतिहास में उनके 20 से ज्यादा प्रेमियों का जिक्र मिलता है.
लेकिन खास बात यह थी कि कैथरीन अपने प्रेमियों के साथ रिश्ते खत्म होने के बाद भी अक्सर उनके प्रति उदार रहती थीं. वह उन्हें जमीन, महल, खिताब और बड़ी संपत्ति तक दे देती थीं. एक पूर्व प्रेमी को उन्होंने 1,000 से ज्यादा सर्फ यानी बंधुआ किसानों पर अधिकार तक दे दिया था.
एक प्रेमी को बनाया पोलैंड का राजा
कैथरीन के प्रेमियों में स्टानिस्लाव पोनियातोव्स्की का नाम खास है. दोनों की मुलाकात उस समय हुई थी, जब कैथरीन अभी रूस की महारानी नहीं बनी थीं. पोनियातोव्स्की पोलिश कुलीन परिवार से थे और ब्रिटिश दूतावास से जुड़े हुए थे. दोनों के बीच रिश्ता बना. बाद में यह रिश्ता खत्म हो गया, लेकिन दोनों के बीच करीबी बनी रही.
1763 में कैथरीन ने पोनियातोव्स्की को पोलैंड का राजा बनाने में मदद की. इसके लिए उन्होंने रूस की सैन्य और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल किया. लेकिन सत्ता मिलने के बाद पोनियातोव्स्की ने कैथरीन की उम्मीद के मुताबिक सिर्फ रूस के हितों के लिए काम नहीं किया. उन्होंने पोलैंड की स्वतंत्रता मजबूत करने की कोशिश की.
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इससे दोनों के रिश्ते खराब हो गए. आखिरकार कैथरीन ने उन्हें गद्दी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और रूस ने पोलैंड-लिथुआनिया राष्ट्रमंडल के विभाजन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई.
बेटे से भी नहीं था ज्यादा लगाव
कैथरीन अपने प्रेम संबंधों के लिए जितनी चर्चित थीं, उतनी ही चर्चा उनके बेटे पॉल के साथ रिश्ते की भी रही. कहा जाता है कि कैथरीन अपने बेटे को ज्यादा पसंद नहीं करती थीं और एक समय वह पॉल को उत्तराधिकारी बनाने के बजाय उसके बेटे अलेक्जेंडर को अगला शासक बनाने के बारे में सोच रही थीं.
लेकिन ऐसा हो पाता, उससे पहले ही 1796 में कैथरीन की स्ट्रोक से मौत हो गई. उनके बाद उनके बेटे पॉल ने रूस की गद्दी संभाली. हालांकि पॉल भी ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रह पाए और पांच साल बाद उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद कैथरीन के पसंदीदा पोते अलेक्जेंडर प्रथम रूस के शासक बने.
34 साल तक रूस पर किया शासन
कैथरीन द ग्रेट का शासन करीब 34 साल चला. वह रूस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महिला शासक बनीं. उनकी कहानी सिर्फ प्रेम संबंधों या पति से सत्ता छीनने तक सीमित नहीं है. उन्होंने रूस की राजनीति और विदेश नीति पर गहरा प्रभाव डाला. लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानियों ने उन्हें इतिहास की सबसे चर्चित महिला शासकों में जरूर शामिल कर दिया.
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एक विदेशी लड़की के रूप में रूस पहुंची सोफी ने अपना नाम, धर्म और पहचान बदली और आखिरकार रूस की सबसे ताकतवर महारानी बन गईं. यही वजह है कि सदियों बाद भी कैथरीन द ग्रेट का नाम इतिहास के पन्नों में उतनी ही दिलचस्पी से पढ़ा जाता है.