उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित 'शुद्धिकरण यज्ञ/हवन' प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया. राज्य सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर किसी अतिरिक्त न्यायिक निर्देश की जरूरत नहीं है.
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने कहा कि महाधिवक्ता की ओर से निष्पक्ष और कानूनसम्मत जांच का आश्वासन दिया गया है. याचिकाकर्ता, जो खुद को अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित अधिवक्ता बताते हैं, ने स्थानीय पुलिस से अलग किसी वरिष्ठ अधिकारी या विशेष टीम से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी.
याचिकाकर्ता ने घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश देने की भी मांग की थी. इसके अलावा राज्य में अस्पृश्यता निषेध और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करने की मांग की गई थी.
सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा
राज्य की ओर से महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर ने अदालत को बताया कि 30 अगस्त 2026 को हल्द्वानी थाने में इस मामले में एफआईआर संख्या 0297/2026 दर्ज की जा चुकी है. उन्होंने यह भी बताया कि बेंगलुरु में दर्ज एक जीरो एफआईआर को जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने की संभावना है. महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेगी और सभी सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा.
खंडपीठ ने कहा कि राज्य के सर्वोच्च विधि अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए मामले को राज्य सरकार के आश्वासन के अनुरूप समाप्त कर दिया.
कांग्रेस ने इसको लेकर क्या कहा
वहीं, कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष सुजाता पॉल ने कहा कि दलित सम्मान से जुड़े कथित शुद्धीकरण हवन के मामले में एफआईआर की मांग के बावजूद हाईकोर्ट में सरकार की ओर से हल्द्वानी और बेंगलुरु की अलग-अलग एफआईआर का हवाला दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि कथित घटना और उसमें शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर कहां है और इन एफआईआर को मूल मामले से जोड़कर अदालत के सामने रखने का आधार क्या था? उन्होंने कहा कि यह BJP-कांग्रेस का नहीं, बल्कि दलित सम्मान, कानून और जवाबदेही का सवाल है.
राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के दलित और आदिवासी सांसदों ने 'खड़गे शुद्धिकरण' मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है. सांसद दोपहर 2 बजे तक राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश करेंगे. अगर उन्हें समय नहीं मिलता है, तो कथित तौर पर आदिवासी महिला राष्ट्रपति पर सरकारी दबाव के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की संभावना है. दोपहर 2 बजे कांग्रेस सांसद 24 अकबर रोड पर दोबारा बैठक कर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा करेंगे. कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव से पहले अपने प्रमुख अभियान मुद्दों में शामिल करना चाहती है.