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पुजारी बने कांग्रेसी CM रेवंत रेड्डी, बारिश के लिए पत्नी संग किया ‘वरुण यज्ञ’

तेलंगाना में इस बार मॉनसून की स्थिति अच्छी नहीं है. राज्य सरकार बारिश के लिए इस बार प्राचीन काल के उपायों का सहारा ले रही है. सरकार ने वैदिक विधि विधान से वरुण यज्ञ आयोजित किया है.

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तेलंगाना सरकार ने वरुण यज्ञ आयोजित किया है. (Photo: X/@revanth_anumula)
तेलंगाना सरकार ने वरुण यज्ञ आयोजित किया है. (Photo: X/@revanth_anumula)

तेलंगाना में कमजोर बारिश और जलाशयों में घटते पानी की चिंता के बीच कांग्रेस सरकार ने अच्छी बारिश की कामना के लिए ‘वरुण यज्ञ’ का आयोजन किया. नलगोंडा जिले के नागार्जुन सागर में कृष्णा नदी के किनारे इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पत्नी संग शामिल हुए. यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान वरुण से राज्य में पर्याप्त वर्षा की प्रार्थना की गई. 

इस आयोजन में 108 पुजारियों और वैदिक विद्वानों ने हिस्सा लिया. इसके लिए 11 हवन कुंड बनाए गए थे. अनुष्ठान की शुरुआत सुबह करीब 4 बजे ‘गो पूजा’ से हुई. आयोजन का उद्देश्य बारिश की कामना और कृष्णा और गोदावरी नदी घाटियों के जलाशयों में पर्याप्त पानी आने की प्रार्थना भी थी. 

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि, "मैंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर 'वरुण यज्ञ' के पूर्णाहुति कार्यक्रम में हिस्सा लिया. यह आयोजन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि राज्य में भरपूर बारिश हो और किसानों के जीवन में खुशहाली आए."

हमने यदागिरिगुट्टा श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के पुजारियों और वैदिक विद्वानों की देखरेख में यह 'वरुण यज्ञ' किया, जिसमें 108 ऋत्विक यानी कि आचार्य और 11 होम कुंड शामिल थे.

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रिपोर्ट के अनुसार सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी और उनकी पत्नी एवं विधायक एन. पद्मावती ने सुबह यज्ञ के अनुष्ठानों में हिस्सा लिया. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी बाद में यज्ञ के समापन कार्यक्रम यानी पूर्णाहुति में शामिल हुए. 

तेलंगाना में बारिश की कमी

तेलंगाना सरकार के सामने इस समय बारिश की कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है. कम बारिश का सीधा असर किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है. सरकार ने संभावित अल नीनो प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई थी।.समिति ने सरकार को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने, उनकी सब्सिडी बढ़ाने और कम पानी में तैयार होने वाली सूखा-रोधी फसलों को प्रोत्साहित करने जैसे सुझाव दिए हैं. 

खाली पड़े हैं जलाशय

द 'हिन्दू' की एक रिपोर्ट के अनुसार कृष्णा और गोदावरी बेसिन के ज़्यादातर हिस्सों में काफ़ी पानी आने के बावजूद ज़्यादा पानी जमा करने की क्षमता वाले बांध अभी भी पूरी तरह नहीं भरे हैं. इस सीज़न में अब तक सिर्फ़ जुराला, कड्डम और येल्लमपल्ली प्रोजेक्ट्स में ही ज़रूरत से ज़्यादा पानी जमा हुआ है. ज़्यादातर मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट्स और छोटे सिंचाई तालाबों में भी पानी का स्तर कम है.

श्रीरामसागर में पानी का स्टोरेज आधे स्तर के करीब पहुंच रहा है और नागार्जुन सागर अपनी 312 TMC फ़ीट की क्षमता का 44% भरा हुआ है; सिंगुर अपनी 29.9 TMC फ़ीट क्षमता का 13.9% भरा है; निज़ामसागर अपनी 17.8 TMC फ़ीट क्षमता का 57.5% भरा है. 

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सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि उन्होंने कामना की है कि कृष्णा और गोदावरी नदियों के किनारे वाले इलाकों में खूब बारिश हो और वहां के तालाब और जलाशय भर जाएं. फसलें भरपूर हो. किसानों को उनकी मेहनत का उचित फल मिले. 

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