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भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी बोले- चीन में व्यपार बढ़ाना चाहती है सरकार

मिसरी ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि भारत अपने कृषि उत्पादों की बाजार में बेहतर हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 58 अरब डॉलर के पार पहुंच जाने पर चिंता व्यक्त की.

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विक्रम मिसरी(फोटो ट्विटर)
विक्रम मिसरी(फोटो ट्विटर)

भारत ने बुधवार को चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता व्यक्त की. चीन में भारत के नए राजदूत ने चिंता जताते हुए कहा कि इस मुद्दे का हल निकालना उनकी पहली प्राथमिकता होगी. चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 58 अरब डॉलर के पार जा चुका है. विक्रम मिसरी को आठ जनवरी को चीन में भारत का नया राजदूत बनाया गया है.

मिसरी ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि भारत अपने कृषि उत्पादों की बाजार में बेहतर हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 58 अरब डॉलर के पार पहुंच जाने पर चिंता व्यक्त की. दोनों देशों के बीच 80 अरब डॉलर का  व्यापार होता है. जबकि इस वित्तीय वर्ष में दोनों देशों का आपसी व्यापार 100 अरब डॉलर के पार जाने की उम्मीद है.

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मिसरी ने कहा कि भारत का 58 अरब डॉलर का घाटा कई सालों से बढ़कर यहां तक पहुंचा है. व्यापार घाटे को दूर करना मेरी पहली प्राथमिकता  होगी क्योंकि इस तरह का व्यापार घाटा लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत चावल और चीनी जैसे कृषि उत्पादों, विभिन्न फलों एवं सब्जियों, दवा तथा आईटी के लिए चीन के बाजार में बेहतर हिस्सेदारी के लिए चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ क्षेत्रों में सुधार है लेकिन इस प्रगति को वास्तविक बनाना और निर्यात को टिकाउ बनाना महत्वपूर्ण है. उम्मीद है कि इस संबंध में चीन की ओर से भी समर्थन मिलेगा और हम व्यापार का दायरा बढ़ा सकेंगे.

मिसरी ने कहा कि इसके अलावा चीन के बाजार में भारतीय दवाओं तथा आईटी उत्पादों एवं सेवाओं के लिए बाजार की बेहतर उपलब्धता की राह के रुकावटों को दूर करना होगा. उन्होंने कहा कि जहां दोनों देश पूरी दुनिया के लिए निवेश के दो सबसे बडे देश बनकर उभरे हैं वहीं इनके बीच आपसी निवेश ने अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ी है.

मिसरी ने कहा कि चीन की कई कंपनियां भारत में अच्छा कारोबार कर रही है. शाओमी और चीन की कई अन्य कंपनियां भारत में मोबाइल की बड़ी कंपनियां हैं. हम इन कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनाने के लिए स्वागत कर रहे हैं जिससे व्यापार घाटा कम होगा.

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उन्होंने कहा कि हम सड़क एवं रेलवे, इंडस्ट्रियल पार्क और फूड पार्क  जैसे बुनियादी संरचना क्षेत्र में भी चीन का  निवेश देखना पसंद करेंगे. बता दें कि दोनों देशों के बीच 2017 में 84.44 अरब डॉलर का व्यापार रहा था.

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