भारत की करेंसी रुपया (₹) बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इसके साथ ही रुपये में लगातार नौवें कारोबारी सत्र की बढ़त दर्ज की गई. रुपया 23 जुलाई को 1 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.73 के बंद स्तर से अब तक 165 पैसे यानी करीब 1.7% मजबूत हो चुका है. यह एक साल से अधिक समय में भारतीय रुपये की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे लंबी लगातार तेजी है. इससे पहले रुपये में ऐसी तेजी पिछले साल 5 जून से 12 जून के बीच देखने को मिली थी.
रुपये की मजबूती ऐसे समय आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है. आरबीआई की छह सदस्यीय मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपने 'न्यूट्रल' पॉलिसी के स्टैंड में भी कोई बदलाव नहीं किया. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आए इस फैसले ने बाजार को स्थिरता का संकेत दिया.
दिनभर कैसी रही रुपये की चाल?
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.90 के रेट पर खुला. कारोबार के दौरान यह 94.89 के उच्च स्तर और 95.25 के निचले स्तर के बीच कारोबार करता रहा. अंत में यह पिछले सत्र के मुकाबले 20 पैसे की बढ़त के साथ 95.08 पर बंद हुआ. इससे पहले 4 अगस्त को भी रुपया 9 पैसे मजबूत होकर 95.28 पर बंद हुआ था.
इन वजहों से मजबूत हुआ रुपया
फॉरेक्स बाजार के जानकारों के मुताबिक रात में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, वैश्विक बाजार में डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी से रुपये को समर्थन मिला. इन तीनों कारकों ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया और भारतीय मुद्रा को मजबूती दी. आरबीआई ने भी पिछली मौद्रिक नीति में घोषित उन उपायों पर भरोसा बरकरार रखा है, जिनका उद्देश्य फॉरेन कैपिटल इंफ्लो बढ़ाना और रुपये को समर्थन देना है.
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा
पॉलिसी रिव्यू के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत फॉरेन कैपिटल इंफ्लो के बावजूद रुपया अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ पाया है. उनका मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष कम होता है तो रुपये में और मजबूती आ सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई यह सुनिश्चित करेगा कि रुपये की चाल व्यवस्थित और संतुलित बनी रहे.
मार्केट एक्सपर्ट अनुज चौधरी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार हुआ है, जिसका फायदा रुपये को मिल सकता है. उन्होंने कहा कि बाजार की नजर अब अमेरिका के इंस्टीट्यूट ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) सर्विसेज के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों पर रहेगी, जो डॉलर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. उनके मुताबिक निकट अवधि में USD-INR स्पॉट रेट 94.80 से 95.50 के दायरे में रह सकती है.
शेयर मार्केट का हाल
कारोबार के अंत में डॉलर इंडेक्स 99.82 पर था, जिसमें 0.03 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं ब्रेंट क्रूड 1.75 फीसदी की बढ़त के साथ 80.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, हालांकि यह जुलाई में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर के स्तर की तुलना में काफी नीचे है.
घरेलू शेयर बाजार में भी मजबूती देखने को मिली. सेंसेक्स 152.05 अंक चढ़कर 78,581 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 9.75 अंक की बढ़त के साथ 24,624.65 पर बंद हुआ. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 943.42 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की.