पूर्वी लद्दाख में LAC पर गलवन घाटी में हुए खूनी संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच तनाव जारी है. वहीं, चीन को लेकर देश के भीतर राजनीतिक पार्टियों में बहस छिड़ गई है. बीते दिनों जहां बीजेपी ने राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से मिले दान पर सवाल उठाए थे, तो वहीं अब कांग्रेस की ओर से चीनी कंपनियों द्वारा पीएम केअर्स फंड में दान दिए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
पीएम केअर्स फंड में चीनी कंपनियों की ओर से दान दिए जाने को लेकर कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए, साथ ही पूछा कि क्या पीएम मोदी इस पर जवाब देंगे.
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कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने ट्वीट किया, विवादास्पद और अपारदर्शी पीएम केयर्स फंड में हुआवे, टिकटॉक, ओप्पो, शाओमी जैसी चीनी कंपनियों से करोड़ों का डोनेशन स्वीकार किया गया. जब चीनी भारत पर हमला कर रहे हैं, तो क्या पीएम ऐसे दानों को स्वीकार कर अपनी स्थिति से समझौता नहीं कर रहे? प्रधानमंत्री जवाब देंगे?
Hundreds of Crores of donations from Chinese companies like HUAWEI, TikTok, OPPO & XIAOMI have been accepted in the controversial & opaque fund PM CARES
Isn't the PM compromising his position by accepting such donations when the Chinese are attacking India? Will the PM answer?
— DK Shivakumar (@DKShivakumar)
बता दें कि राजीव गांधी फाउंडेशन को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला किया था. बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को गांधी परिवार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा क्यों दिया गया? जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने देश के साथ विश्वासघात किया. वहीं, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दावा करते हुए कहा था कि चीन ने राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए फंडिंग की है.
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कानून मंत्री ने कहा था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए, कांग्रेस ये बताए कि ये प्रेम कैसे बढ़ गया, इनके कार्यकाल में ही चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा किया. एक कानून है जिसके तहत कोई भी पार्टी बिना सरकार की अनुमति के विदेश से पैसा नहीं ले सकती. कांग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी?
इस पर कांग्रेस की तरफ से सफाई दी गई, जिसमें कहा गया कि राजीव गांधी फाउंडेशन को साल 2005-06 में PMNRF से 20 लाख रुपये की मामूली धनराशि मिली थी, जिसका इस्तेमाल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में राहत कार्यों में खर्च किया गया. इसके अलावा PMNRF से कोई पैसा नहीं मिला.