पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के विवादित इंटरव्यू मामले में पंजाब पुलिस के DSP गुरशेर सिंह संधू की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वो संधू को सेवा में बहाल करें.
दरअसल मार्च 2023 में एक प्राइवेट न्यूज चैनल पर लॉरेंस बिश्नोई के दो इंटरव्यू टेलीकास्ट हुए थे. इनमें आरोप था कि जब बिश्नोई पुलिस हिरासत में था, तब संधू ने उसका इंटरव्यू कराने में मदद की थी.
इसके बाद पंजाब सरकार ने आर्टिकल 311 का इस्तेमाल करते हुए 2 जनवरी 2025 को बिना विभागीय जांच के संधू को नौकरी से निकाल दिया था. अब जस्टिस नामित कुमार की सिंगल बेंच ने संधू की याचिका पर फैसला सुनाते हुए इस आदेश को खारिज कर दिया है.
गुरशेर सिंह संधू का आरोपों से इनकार
गुरशेर सिंह संधू ने सरकार के इस कदम को अदालत में चुनौती दी थी. उन्होंने दलील दी कि बिना जांच और बिना उनका पक्ष सुने उन्हें बर्खास्त किया गया. संधू का कहना था कि बिश्नोई को पंजाब लाने या मोहाली CIA स्टाफ परिसर में उसकी कस्टडी की देखरेख में उनका हाथ नहीं था. वो बिश्नोई से जुड़े किसी भी मामले में जांच अधिकारी नहीं थे. उन्हें सितंबर और अक्टूबर 2024 में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे.
इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि संधू की नौकरी में बहाली, उनके या दूसरे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पर असर नहीं डालेगी. सरकार के पास पूछताछ अधिकारी के सामने लंबित विभागीय जांच को नियमों के मुताबिक जारी रखने का अधिकार सुरक्षित रहेगा.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार ने सिर्फ इस आधार पर जांच रोकी कि याचिकाकर्ता सहयोग नहीं कर रहा था या उसने चार्जशीट नहीं ली. अदालत ने कहा कि अगर कोई कर्मचारी सहयोग नहीं करता या मौजूद नहीं रहता है, तो भी संविधान के आर्टिकल 311(2)(b) के तहत जांच बंद करना सही नहीं है.
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विभागीय जांच न कराने पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा, 'सक्षम प्राधिकारी को ये साबित करना होगा कि उस समय ऐसे क्या हालात थे कि विभागीय जांच कराना मुमकिन नहीं था.' बेंच ने टिप्पणी की कि ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जिससे लगे कि याचिकाकर्ता ने गवाहों को डराया, सबूतों से छेड़छाड़ की या जांच अधिकारी के काम में रुकावट डाली. इसलिए सरकार का आदेश संवैधानिक मानकों पर खरा नहीं उतरता.