लाठी चली, वीडियो वायरल हुआ, विपक्ष हमलावर हुआ... और अब सरकार ने DSP को सस्पेंड कर दिया. पंजाब के बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि आखिरकार भगवंत मान सरकार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेना पड़ा. सरकार ने बरनाला के डीएसपी सतवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. सवाल है कि आखिर बरनाला में ऐसा क्या हुआ था, जिसने पुलिस की कार्रवाई को पूरे पंजाब की राजनीति का मुद्दा बना दिया?
23 जुलाई को बरनाला में सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. दूसरी तरफ शहर में हड़ताल की वजह से कई जगह कूड़े के ढेर लग चुके थे. ऐसे में जिला प्रशासन और नगर निगम ने सफाई अभियान चलाकर कूड़ा हटाने का फैसला किया.
लेकिन प्रदर्शनकारी सफाई कर्मचारियों ने इस अभियान का विरोध किया. हंडियाया बाजार इलाके में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और कूड़े से भरे बैग पुलिस पर फेंके, जिसमें चार पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया.

उधर सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए. घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ लिया.
लाठीचार्ज की तस्वीरें सामने आते ही विपक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोल दिया. सवाल उठाए गए कि जो सरकार मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों की बात करती है, उसी के राज में सफाई कर्मचारियों पर लाठियां क्यों बरसीं?
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बढ़ते विवाद के बीच पंजाब पुलिस मुख्यालय ने कार्रवाई की. पटियाला रेंज की रिपोर्ट के आधार पर डीएसपी सतवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय मोहाली स्थित चौथी कमांडो बटालियन रहेगा.
पंजाब राज्य सफाई कर्मचारी आयोग ने भी घटना को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की मांग की. आयोग के अध्यक्ष चंदन ग्रेवाल ने बताया कि मामले में संबंधित SHO का तबादला भी कर दिया गया है. वहीं राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) ने भी रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लिया. आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है.
डीएसपी का सस्पेंशन सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है. लेकिन असली तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी. अगर जांच में पुलिस की कार्रवाई नियमों के खिलाफ पाई जाती है तो और अधिकारियों पर भी एक्शन हो सकता है. वहीं अगर पुलिस का दावा सही साबित होता है तो प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच भी आगे बढ़ेगी.