संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार महिला आरक्षण को 2029 में लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने वाले परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश तेज कर दी है. तीन महीने पहले अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में ये दो बिल गिर गए थे.
मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल संसद के मॉनसून सत्र में लाने की तैयारी में है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटाने की एक्सरसाइज शुरू कर दी है. ममता बनर्जी की टीएमसी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में बगावत के बाद शरद पवार के यू-टर्न लेने के बाद एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन अभी भी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से सरकार दूर है. ऐसे में एनडीए की नजर डीएमके के ऊपर है, जिसे अगर साधने में कामयाब रहती है तो आसानी से बिल पास करा लेगी.
परिसीमन और लोकसभा की सीटों के विस्तार सबसे ज्यादा विरोध डीएमके ही करती रही है. डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन तर्क देते रहे हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को परिसीमन के चलते लोकसभा में अपनी सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. डीएमके से चलते ही अप्रैल में बिल गिर गया था, तीन महीने में क्या बदल गया है कि बीजेपी ने डीएमके से समर्थन की उम्मीद लगा रखी है?
डीएमके के बिना दो-तिहाई का बहुमत नहीं आसान
मोदी सरकार ने अप्रैल के विशेष संसद सत्र में संविधान के संसोधन बिल के जरिए लोकसभा और राज्यसभा की विधानसभा में 33 फीसदी महिलाओं के लिए आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती थी, जिसके लिए बकायदा बिल लेकर लोकसभा में आई थी. दो-तिहाई बहुमत न होने के चलते यह बिल लोकसभा में गिर गया था. सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने इसके खिलाफ वोट पड़े थे. कांग्रेस से लेकर सपा और डीएमके ने बिल के खिलाफ वोट किया था.
बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास लोकसभा में फिलहाल 293 सदस्य हैं. टीएमसी के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के साथ आने के बाद यह आंकड़ा 319 पहुंच गया है. शरद पवार की पार्टी 8 सांसदों को जोड़ देते हैं तो फिर नंबर 327 हो रहा है. इसके अलावा अप्रैल में एनडीए से अतरिक्त 5 लोकसभा सांसदों ने सरकार के समर्थन में वोट किया था, उसे जोड़ देते हैं फिर ये नंबर 332 हो जाता है.
लोकसभा के कुल 543 सांसद के लिहाज से दो-तिहाई बहुमत के लिए ज़रूरी 360 की संख्या चाहिए. इस लिहाज से 28 सांसदों के समर्थन की सरकार को और जरूरत होगी. ऐसे में डीएमके के बिना दो-तिहाई का नंबर जुटाना आसान नहीं है. डीएमके के पास 22 लोकसभा सांसद है, जिसे अपने साथ डायरेक्ट या इन डायरेक्ट समर्थन हासिल कर सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को आसानी से पास करा लेगी.
डीएमके से बीजेपी ने क्यों लगा रखी है समर्थन की उम्मीद?
अप्रैल से जुलाई तक सियासत बहुत बदल गई है. डीएमके अब तमिलनाडु की सत्ता से बाहर है और कांग्रेस के साथ उसके रिश्ते खराब हो गए हैं. इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह चर्चा गर्म है कि मोदी सरकार को दोनों बिल को पास कराने के लिए डीएमके पर एक 'खास भरोसा' है. एनडीए के इस भरोसे के पीछे भी एक गहरी रणनीतिक बिसात, बदलती सियासी परिस्थितियां और कुछ व्यावहारिक समीकरण हैं.
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विश्वास जताते हुए कहा कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयक पारित हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि एनडीए के पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए आसानी से दोनों विधेयक पास हो जाएंगे. अठावले के लिहाज से कई विपक्षी दलों ने अपनी राय बदली है और अब बिल को समर्थन करने के लिए तैयार हैं.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बीजेपी लीडरशिप भी डीएमके के साथ बातचीत कर रही है. सत्ता पक्ष को उम्मीद है कि डीएमके बिल के पक्ष में वोट न भी करे, तो कम से कम वोटिंग के वक्त सदन से दूर रहे. इस तरह डीएमके के सहारे की सरकार बिल को पास कराने की आस लगाए हुए हैं, लेकिन डीएमके ने अभी तक अपने रुख के बारे में कोई फैसला नहीं किया है.
तीन महीने में क्या बदला, जो डीएमके बदलेगी?
परिसीमन बिल के खिलाफ डीएमके के जिस तरह से तेवर अप्रैल में अपना रखे थे, उसमें अब क्या बदलाव आ गया है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के थलापति विजय की TVK के साथ मिलकर सरकार बनाने के फैसले के बाद डीएमके ने लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की थी. इतना ही नहीं कांग्रेस के साथ डीएमके का गठबंधन टूट गया है, जिसके चलते बीजेपी ने उम्मीद पाल रखी है.
हालांकि, डीएमके ने डीलिमिटेशन (परिसीमन) के मुद्दे पर एक कैंपेन चलाया था. डीएमके का तर्क था कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि नार्थ की तुलना में दक्षिण के राज्यों ने आबादी को कंट्रोल करने में कामयाबी हासिल की है. तीन महीने में बहुत कुछ बदला है, जिसके चलते डीएमके के तेवर ढीले पड़े हैं. बीजेपी अपने रुख में भी बदलाव किया है.
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में डीएमके के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मोदी सरकार ने बीच का रास्ता निकालने के लिए डीएमके लीडरशिप से संपर्क किया है. डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमें कुछ चिंताएं हैं और हमने उन्हें (बीजेपी) बता दिया है, जहां तक हमें पता है, सरकार उन पर सकारात्मक रूप से विचार करने को तैयार है. अब ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसे हम हल न कर सकें. हमें उम्मीद है कि वे कोई समाधान निकालेंगे.
डीएमके का समर्थन के लिए बीजेपी-कांग्रेस में शह-मात
मोदी सरकार और अपनी पार्टी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की पुष्टि करते हुए डीएमके नेता कनिमोझी करुणानिधि ने हमने परिसीमन से जुड़े कुछ मुद्दे उठाए हैं. सरकार को तमिलनाडु के हितों की रक्षा करनी होगी. दक्षिण भारत के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण करने के उपायों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्यों को सज़ा नहीं मिलने देंगे.
बीजेपी सूत्रों ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता विपक्ष के क्षेत्रीय नेताओं और अलग-अलग सांसदों (जिनमें समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं) के साथ लगातार संपर्क में हैं. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ज़ोर-शोर से कोशिशें चल रही हैं, लेकिन जब तक ज़रूरी संख्या पक्की नहीं हो जाती, हम बिल को आगे बढ़ाने में जल्दबाज़ी नहीं करेंगे. हम कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते.
परिसीमन बिल पर शरद पवार की पार्टी के रुख नरम करने के बाद डीएमके को साधने की कवायद में बीजेपी है. कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि उन्हें चिंता है कि बीजेपी संसद में बिल पास कराने के लिए ज़रूरी संख्या जुटाने में जुटी है, लेकिन हम भी विपक्ष को एकजुट रखना चाहते हैं. कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमने विपक्ष को एकजुट रखने के लिए डीएमके से संपर्क किया है, क्योंकि अप्रैल में लोकसभा में बिल को गिराने के लिए विपक्ष एकजुट खड़ा था.
परिसीमन बिल की किंगमेकर बनी डीएमके!
लोकसभा में दो-तिहाई के नंबर गेम में डीएमके किंगमेकर बनकर उभरी है. सत्ता पक्ष यानि एनडीए की कोशिश है कि डीएमके को साधकर परिसीमन बिल को पास करा ले जाए तो कांग्रेस किसी भी सूरत में डीएमके का समर्थन बनाए रखना चाहती है. बीजेपी की कोशिश है कि डीएमके अपने रुख को बदल कर समर्थन करे या फिर उसके 22 लोकसभा सांसद वोटिंग से दूर रहें.
मतदान के समय डीएमके सांसद वॉकाउट करते हैं तो फिर सरकार आसानी से बिल पास करा लेगी, लेकिन अगर वोटिंग के समय परिसीमन बिल के खिलाफ वोटिंग में विपक्ष के साथ हिस्सा लेती है तो फिर मोदी सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटाना आसान नहीं होगा. इसी