UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति तक पहुंच गया है. सरकार का कहना है कि समिति ने यूपीआई के लिए MDR की सिफारिश की थी और रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के दौरान कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे, लेकिन किसी ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई. वहीं, अब विपक्षी सांसदों का कहना है कि समिति में MDR को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे और जिस खास शुल्क को अब लागू किया जा रहा है, वह समिति के सामने रखा ही नहीं गया था.
दरअसल, सरकारी सूत्रों ने वित्त संबंधी स्थायी समिति की 44वीं एक्शन टेकन रिपोर्ट का हवाला दिया है. रिपोर्ट में यूपीआई के लिए एक स्तरीय एमडीआर या रेवेन्यू मॉडल तैयार करने और उसे जल्द लागू करने की जरूरत बताई गई थी. सरकार का कहना है कि 12 अगस्त को रिपोर्ट को अपनाए जाने के समय कांग्रेस के पांच सांसद- पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ भी बैठक में मौजूद थे. प्रकाशित कार्यवाही में इनकी ओर से कोई औपचारिक असहमति दर्ज नहीं है.
सरकार इसी आधार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मौजूदा विरोध पर सवाल उठा रही है. उसका तर्क है कि कांग्रेस के सांसद जिस समिति का हिस्सा थे, उसने UPI के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत को स्वीकार किया था.
बता दें कि राहुल गांधी ने नए शुल्क ढांचे की आलोचना करते हुए इसे 'UPI टैक्स' बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस कदम का फायदा अमेरिका को मिलेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में झुक रहे हैं. राहुल गांधी ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है. हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है. उसका कहना है कि यह शुल्क ग्राहक पर नहीं लगाया गया है और नीति का उद्देश्य UPI व्यवस्था के लिए लंबे समय तक टिकाऊ वित्तीय ढांचा तैयार करना है.
विपक्ष का पलटवार- MDR पर सवाल उठाए गए थे
वहीं अब विपक्षी सांसद सरकार की इस व्याख्या से सहमत नहीं हैं. एक विपक्षी सांसद ने आजतक से बातचीत में दावा किया कि समिति की बैठकों में MDR को लेकर विपक्ष के साथ-साथ बीजेपी के सांसदों ने भी सवाल उठाए थे. सांसद के मुताबिक, सदस्यों ने सिफारिश में बदलाव की मांग भी की थी.
सांसद ने आरोप लगाया कि समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने संसद सत्र खत्म होने से पहले रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा का हवाला दिया और रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया गया. विपक्षी सांसद का दावा है कि सदस्यों की ओर से सुझाए गए बदलाव रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए.
यह दावा प्रकाशित समिति रिकॉर्ड से अलग है, जिसमें औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है. इसलिए विवाद अब इस बात पर केंद्रित है कि समिति की बंद कमरे में उठाई गई आपत्तियों और अंतिम प्रकाशित रिपोर्ट में दर्ज औपचारिक असहमति को किस तरह देखा जाए.
UPI का खास प्रस्ताव समिति में आया ही नहीं: गौरव गोगोई
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार के दावे को खारिज किया है. गोगोई का कहना है कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने हाल में घोषित किए गए खास UPI शुल्क प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की थी.
गोगोई के मुताबिक, जब वित्तीय सेवा विभाग समिति के सामने आया था, तब उसके पास UPI पर इस तरह का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि समिति की बैठकों में MDR की जरूरत को लेकर सवाल जरूर उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकारी प्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया.
दर, रकम और छूट की सीमा पर चर्चा नहीं हुई: मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी गोगोई की बात का समर्थन किया है. उनका कहना है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले MDR के संबंध में समिति के सामने कोई खास प्रस्ताव नहीं रखा गया था.
तिवारी के मुताबिक, MDR की दर कितनी होगी, शुल्क की रकम क्या होगी, इसकी अधिकतम सीमा क्या होगी और किन लेनदेन को इससे छूट मिलेगी- इन तमाम बिंदुओं पर समिति में चर्चा नहीं हुई थी.
उन्होंने यह भी कहा कि MDR की जरूरत और उसकी उपयोगिता को लेकर समिति की अलग-अलग बैठकों में सदस्यों ने सवाल उठाए थे. तिवारी ने समिति की गोपनीय कार्यवाही का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्तिगत सांसदों द्वारा मौजूदा व्यवस्था का समर्थन किए जाने का दावा सही तस्वीर पेश नहीं करता.
अब क्या है सरकार का नया आदेश?
सरकार के नए आदेश के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र कारोबारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. यह शुल्क ग्राहक के बजाय व्यापारी से लिया जाएगा. 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI लेनदेन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा.
छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है. UPI क्यूआर के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारियों को इस MDR से बाहर रखा गया है. कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग दर तय की गई है.
सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क ढांचे में निवेश बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था की जरूरत बताई गई है.