दिल्ली में रहने वाली प्रतिभा की उम्र 24 साल है. उनको कुछ महीनों से पीरियड्स नहीं हो रहे थे. पेट फूला रहता था, भूख कभी कम तो कभी ज्यादा लगती थी, मूड स्विंग्स हो रहे थे, चेहरे और गर्दन पर झाइयां पड़ रही थी और बाल भी बहुत झड़ रहे थे. यहां तक कि पिंपल भी ठीक नहीं ठीक हो रहे थे. इन सब समस्याओं के लिए वह डॉक्टर के पास गई तो पीसीओएस की बीमारी बताई. प्रतिभा ने कई जगह इलाज कराया लेकिन आराम नहीं मिला, फिर किसी की सलाह पर होम्योपैथिक ट्रीटमेंट शुरू किया. इसके कुछ महीनों बाद आराम मिलने लगा. पीरियड्स थोड़ा नॉर्मल हुए और बाल झड़ने से लेकर मुंहासों तक लगभग बहुत सी परेशानियां कम हो गई. अल्ट्रासाउंड में भी पीसीओएस की डायग्नोसिस ठीक आई.
डॉक्टर कहते हैं कि बीते कुछ सालों में पीसीओएस की बीमारी तेजी से बढ़ रही है. 20 से 25 साल की लड़कियों को भी ये हो रही है. इसको काबू करने के लिए होम्योपेथी का सहारा लिया जा सकता है. इस ट्रीटमेंट से कोई भी मेजर साइड इफेक्ट नहीं होता है.
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होम्योपैथी से कैसे कंट्रोल हुई PCOS की बीमारी
सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट एवं होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर डॉ. आरुषि सिंह ने इस बारे में बताया है. वह कहती हैं कि PCOS की बीमारी को अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कहा जाने लगा है. ये महिलाओं में बहुत कॉमन हो गई है. इसकी वजह से वजन बढ़ना, पीरियड्स समय पर न आना, चेहरे पर बाल और कुछ मामलों में बांझपन भी हो सकता है. इसको ट्रीटमेंट के लिए एलोपैथी में कई तरह की दवाएं हैं, जिससे इसको कंट्रोल किया जा सकता है.
इस बीमारी के मामलों में मरीज के बारे में पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेना जरूरी होता है, तभी सही दवा चुनी जाती है. इस लड़की की बीमारी भी ऐसे ही कंट्रोल की गई है. इसके लिए मेडिसिन तय की गई. साथ ही डाइट चार्ट भी दिया गया. इलाज में थोड़ा समय लगा, लेकिन अब काफी सुधार है. उसके पीरियड्स भी नॉर्मल हुए हैं और बाल झड़ने से लेकर मुंहासों तक, लगभग बहुत सी परेशानियां कम हो रही हैं.
डॉ. आरुषि ने कहा कि होम्योपैथी में केस टेकिंग का बहुत महत्व होता है. कई सवाल मिलकर पूरी तस्वीर साफ करते हैं. उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में पीरियड्स का पैटर्न कैसा रहा है? पीरियड साइकिल कितने दिनों का रहा है? क्या कई महीनों तक पीरियड्स नहीं आते? वजन बढ़ रहा है या कम हुआ है? क्या मुंहासे या अनचाहे बालों की समस्या है? क्या बाल झड़ रहे हैं? उनकी भूख कैसी है? इसी तरह क्रेविंग, नींद, स्ट्रेस और इमोशनल स्थिति जैसे और भी कई सवाल इलाज तय करने में मदद करते हैं. इनके बाद ही ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है.
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होम्योपैथी में बेहतर तरीके से कंट्रोल होती है बीमारी
डॉ. आरुषि कहती हैं कि होम्योपैथी में फायदा यह है कि.पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट हो सकता है. जांच जरूरी है, लेकिन इलाज तय करने से पहले हर छोटी-बड़ी बात को ध्यान में रखना भी उतना ही जरूरी है, भले ही होम्योपैथी में इलाज में समय लगता है. लेकिन ये बीमारी को बेहतर तरीके से कंट्रोल करती है.